प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र के हमारे दैनिक अभ्यास सेट में आपका स्वागत है, जो आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC-NET, UPSC, State PSCs आदि) की तैयारी को नई ऊँचाई देगा। “The Sociology Scholar” के रूप में, मैंने यह क्विज़ विशेष रूप से आपकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया है। यहाँ आपको समाजशास्त्रीय विचारकों, सिद्धांतों और समकालीन मुद्दों पर आधारित 25 चुनौतीपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न मिलेंगे। प्रत्येक प्रश्न को ध्यान से हल करें और अपनी तैयारी के स्तर का मूल्यांकन करें।
समाजशास्त्र क्विज़: अपनी तैयारी को परखें
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प्रश्न 1: एमाइल दुर्खीम के अनुसार, समाज में नैतिक विनियमन की कमी से उत्पन्न होने वाली स्थिति क्या कहलाती है?
- A) विजातीयकरण (Alienation)
- B) विसंगति (Anomie)
- C) अलगाव (Isolation)
- D) विचलन (Deviance)
सही उत्तर: B) विसंगति (Anomie)
विस्तृत व्याख्या:
दुर्खीम ने ‘विसंगति’ (Anomie) की अवधारणा का उपयोग समाज में नैतिक विनियमन या मानदंडों की अनुपस्थिति या भ्रम की स्थिति को दर्शाने के लिए किया था। यह तब उत्पन्न होती है जब सामाजिक मानदंड व्यक्ति के व्यवहार को निर्देशित करने में विफल रहते हैं, जिससे दिशाहीनता और निराशा की भावना पैदा होती है। उनकी प्रसिद्ध कृति “आत्महत्या का अध्ययन” (Suicide) में, दुर्खीम ने विसंगतिपूर्ण आत्महत्या (Anomic Suicide) की व्याख्या की, जो ऐसी ही स्थिति का परिणाम है। विजातीयकरण (Alienation) मार्क्स से संबंधित है, अलगाव एक सामान्य शब्द है, और विचलन सामाजिक मानदंडों से भटकना है। -
प्रश्न 2: कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में श्रमिक का अपने श्रम उत्पाद, श्रम प्रक्रिया और अपनी मानवीय सार से अलग हो जाना क्या कहलाता है?
- A) वस्तुकरण (Reification)
- B) विजातीयकरण (Alienation)
- C) विखंडन (Fragmentation)
- D) द्वंद्वात्मकता (Dialectics)
सही उत्तर: B) विजातीयकरण (Alienation)
विस्तृत व्याख्या:
कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के तहत ‘विजातीयकरण’ (Alienation) की अवधारणा का वर्णन किया। यह वह प्रक्रिया है जिसमें श्रमिक अपने श्रम के उत्पाद, स्वयं कार्य प्रक्रिया, अपनी मानवीय सार (species-being) और अन्य मनुष्यों से अलग हो जाता है। इसका कारण उत्पादन के साधनों पर पूंजीपतियों का नियंत्रण और श्रमिकों का शोषण है। वस्तुकरण (Reification) मार्क्स से संबंधित एक अन्य अवधारणा है, लेकिन विजातीयकरण विशेष रूप से इस अलगाव की भावना को संदर्भित करता है। -
प्रश्न 3: मैक्स वेबर ने अपनी किस अवधारणा के माध्यम से आधुनिक पश्चिमी समाज में तर्कसंगतता (Rationality) के बढ़ते प्रभुत्व और उसके नकारात्मक परिणामों की व्याख्या की?
- A) लौह पिंजरा (Iron Cage)
- B) आदर्श प्रकार (Ideal Type)
- C) करिश्माई प्रभुत्व (Charismatic Domination)
- D) सामाजिक क्रिया (Social Action)
सही उत्तर: A) लौह पिंजरा (Iron Cage)
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने ‘लौह पिंजरा’ (Iron Cage) की अवधारणा का उपयोग आधुनिक नौकरशाही और तर्कसंगतता के बढ़ते प्रभुत्व के नकारात्मक परिणामों का वर्णन करने के लिए किया। उनका मानना था कि हालांकि तर्कसंगतता कार्यकुशलता लाती है, यह व्यक्तियों को नियमों और प्रक्रियाओं के एक कठोर, अमानवीय जाल में फँसा सकती है, जिससे उनकी स्वतंत्रता और रचनात्मकता कम हो जाती है। यह अवधारणा उनकी कृति “द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म” में निहित है। आदर्श प्रकार एक विश्लेषणात्मक उपकरण है, करिश्माई प्रभुत्व शक्ति का एक प्रकार है, और सामाजिक क्रिया उनकी पद्धति का केंद्र है। -
प्रश्न 4: टैल्कॉट पार्सन्स के कार्यात्मकतावादी सिद्धांत में ‘AGIL’ मॉडल का ‘G’ क्या दर्शाता है?
- A) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
- B) एकीकरण (Integration)
- C) अनुकूलन (Adaptation)
- D) गुप्तता (Latency)
सही उत्तर: A) लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment)
विस्तृत व्याख्या:
टैल्कॉट पार्सन्स ने ‘AGIL’ मॉडल प्रस्तुत किया, जो किसी भी सामाजिक व्यवस्था के चार आवश्यक कार्यात्मक अनिवार्यताएँ बताता है। ‘A’ अनुकूलन (Adaptation), ‘G’ लक्ष्य प्राप्ति (Goal Attainment), ‘I’ एकीकरण (Integration), और ‘L’ गुप्तता या प्रतिरूप अनुरक्षण (Latency/Pattern Maintenance) को दर्शाता है। लक्ष्य प्राप्ति से तात्पर्य है कि समाज को अपने उद्देश्यों को परिभाषित करना चाहिए और उन्हें प्राप्त करने के लिए संसाधन जुटाने चाहिए। -
प्रश्न 5: रॉबर्ट के. मर्टन के अनुसार, एक सामाजिक क्रिया के वे परिणाम जो अभिनेताओं द्वारा न तो इच्छित होते हैं और न ही पहचाने जाते हैं, क्या कहलाते हैं?
- A) प्रकट कार्य (Manifest Functions)
- B) अव्यक्त कार्य (Latent Functions)
- C) दुष्कार्य (Dysfunctions)
- D) अनपेक्षित परिणाम (Unintended Consequences)
सही उत्तर: B) अव्यक्त कार्य (Latent Functions)
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘प्रकट कार्य’ (Manifest Functions) और ‘अव्यक्त कार्य’ (Latent Functions) की अवधारणाएँ दीं। प्रकट कार्य वे हैं जो जानबूझकर और पहचाने जाते हैं, जबकि अव्यक्त कार्य वे परिणाम हैं जो अनपेक्षित और अक्सर अपरिचित होते हैं लेकिन फिर भी सामाजिक व्यवस्था में योगदान करते हैं। उदाहरण के लिए, कॉलेज शिक्षा का प्रकट कार्य ज्ञान प्रदान करना है, जबकि अव्यक्त कार्य जीवनसाथी खोजना या सामाजिक नेटवर्क बनाना हो सकता है। -
प्रश्न 6: जी. एच. मीड के ‘स्व’ (Self) के सिद्धांत में, ‘मैं’ (I) क्या संदर्भित करता है?
- A) समाज द्वारा आत्मसात की गई भूमिकाएँ और अपेक्षाएँ
- B) समाज के प्रति व्यक्ति की सहज, अपरिवर्तित प्रतिक्रिया
- C) दूसरों के दृष्टिकोण का आंतरिककरण
- D) सामान्यीकृत अन्य (Generalized Other) का प्रतिनिधित्व
सही उत्तर: B) समाज के प्रति व्यक्ति की सहज, अपरिवर्तित प्रतिक्रिया
विस्तृत व्याख्या:
जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘स्व’ (Self) दो घटकों से बना है: ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me)। ‘मुझे’ (Me) समाज द्वारा आत्मसात की गई भूमिकाओं और अपेक्षाओं (सामान्यीकृत अन्य) का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ‘मैं’ (I) व्यक्ति की समाज के प्रति सहज, अपरिवर्तित और रचनात्मक प्रतिक्रिया है। ‘मैं’ स्व का अभिनव और अप्रत्याशित पहलू है, जो व्यक्ति को अपनी पहचान बनाने की अनुमति देता है। -
प्रश्न 7: इरविंग गोफमैन के ‘नाटकीयता’ (Dramaturgy) के सिद्धांत में, व्यक्ति के प्रदर्शन को समाज के सामने प्रस्तुत करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- A) भूमिका निभाना (Role-playing)
- B) छाप प्रबंधन (Impression Management)
- C) भूमिका-दूरत्व (Role-distance)
- D) सामाजिक संपर्क (Social Interaction)
सही उत्तर: B) छाप प्रबंधन (Impression Management)
विस्तृत व्याख्या:
इरविंग गोफमैन ने अपने ‘नाटकीयता’ (Dramaturgy) के सिद्धांत में सामाजिक संपर्क को एक रंगमंच के प्रदर्शन के रूप में देखा। ‘छाप प्रबंधन’ (Impression Management) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति दूसरों के सामने अपनी एक विशिष्ट छवि या छाप को नियंत्रित करने या बनाने का प्रयास करता है। यह वह तरीका है जिससे हम दूसरों के सामने खुद को प्रस्तुत करते हैं, जैसे एक अभिनेता मंच पर अपनी भूमिका निभाता है। -
प्रश्न 8: समाजशास्त्र में ‘सामाजिक संरचना’ (Social Structure) की अवधारणा का सबसे उपयुक्त वर्णन क्या है?
- A) समाज में व्यक्तियों के बीच के अनौपचारिक संबंध।
- B) सामाजिक समूहों और संस्थाओं के अपेक्षाकृत स्थिर प्रतिमान।
- C) व्यक्तियों के व्यक्तिगत विश्वास और मूल्य।
- D) समाज में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ।
सही उत्तर: B) सामाजिक समूहों और संस्थाओं के अपेक्षाकृत स्थिर प्रतिमान।
विस्तृत व्याख्या:
‘सामाजिक संरचना’ (Social Structure) समाज में सामाजिक समूहों, संस्थाओं, भूमिकाओं और मानदंडों के अपेक्षाकृत स्थिर, व्यवस्थित और अंतःसंबंधित प्रतिमानों को संदर्भित करती है। यह वह ढाँचा है जिसके भीतर सामाजिक जीवन होता है और जो व्यक्तियों के व्यवहार को आकार देता है। यह व्यक्तियों के बीच केवल अनौपचारिक संबंधों से कहीं अधिक व्यापक है, और सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन स्वयं संरचनात्मक विश्लेषण का एक हिस्सा है। -
प्रश्न 9: भारत में जाति व्यवस्था के संबंध में ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की?
- A) एम. एन. श्रीनिवास (M. N. Srinivas)
- B) आंद्रे बेतेई (Andre Beteille)
- C) जी. एस. घुरिए (G. S. Ghurye)
- D) लुई ड्यूमॉन्ट (Louis Dumont)
सही उत्तर: A) एम. एन. श्रीनिवास (M. N. Srinivas)
विस्तृत व्याख्या:
एम. एन. श्रीनिवास ने ‘प्रभावी जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा प्रस्तुत की। उनके अनुसार, एक जाति को तब प्रभावी माना जाता है जब उसके पास संख्यात्मक शक्ति, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति (भूमि स्वामित्व और स्थानीय प्रशासन में हिस्सेदारी के माध्यम से), और आधुनिक शिक्षा तक पहुंच होती है। यह अवधारणा भारतीय ग्राम अध्ययन और सामाजिक गतिशीलता को समझने में महत्वपूर्ण है। -
प्रश्न 10: समकालीन समाज में ‘गिग इकॉनमी’ (Gig Economy) के उदय का श्रमिकों की पहचान और सामूहिक सौदेबाजी पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
- A) यह श्रमिकों की पहचान को मजबूत करता है और सामूहिक सौदेबाजी को बढ़ावा देता है।
- B) यह श्रमिकों को अधिक लचीलापन प्रदान करता है लेकिन पहचान और सौदेबाजी को कमजोर कर सकता है।
- C) इसका श्रमिकों की पहचान या सामूहिक सौदेबाजी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ता है।
- D) यह केवल उच्च-कुशल श्रमिकों को प्रभावित करता है।
सही उत्तर: B) यह श्रमिकों को अधिक लचीलापन प्रदान करता है लेकिन पहचान और सौदेबाजी को कमजोर कर सकता है।
विस्तृत व्याख्या:
‘गिग इकॉनमी’ (Gig Economy) में स्वतंत्र ठेकेदारों और फ्रीलांसरों को अल्पकालिक अनुबंधों पर काम पर रखा जाता है। जबकि यह श्रमिकों को लचीलापन प्रदान करता है, यह अक्सर नौकरी की असुरक्षा, लाभों की कमी और कमजोर पहचान की ओर ले जाता है। चूंकि श्रमिक स्वतंत्र होते हैं और एक पारंपरिक कर्मचारी-नियोक्ता संबंध में नहीं होते, इसलिए सामूहिक सौदेबाजी (जो आमतौर पर यूनियनों के माध्यम से होती है) चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जिससे व्यक्तिगत श्रमिक की सौदेबाजी की शक्ति कम हो जाती है। यह हालिया समाचार में भी चर्चा का विषय था। -
प्रश्न 11: हाल के अध्ययनों में, डिजिटल प्लेटफॉर्म कैसे सामाजिक संपर्क और गोपनीयता की अपेक्षाओं को नया आकार दे रहे हैं?
- A) वे सामाजिक संपर्क को बढ़ाते हैं और गोपनीयता को और अधिक सुरक्षित बनाते हैं।
- B) वे भौतिक संपर्क को प्रतिस्थापित करते हैं और गोपनीयता की सीमाओं को धुंधला करते हैं।
- C) उनका सामाजिक संपर्क या गोपनीयता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
- D) वे केवल ऑनलाइन दोस्ती को बढ़ावा देते हैं।
सही उत्तर: B) वे भौतिक संपर्क को प्रतिस्थापित करते हैं और गोपनीयता की सीमाओं को धुंधला करते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सामाजिक संपर्क के तरीकों को मौलिक रूप से बदल दिया है। वे भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता के बिना संचार की सुविधा प्रदान करते हैं, लेकिन साथ ही वे अक्सर हमारी व्यक्तिगत जानकारी को साझा करते हैं, जिससे गोपनीयता की पारंपरिक अपेक्षाएँ बदल जाती हैं। उपयोगकर्ताओं को यह तय करना होता है कि वे कितनी जानकारी सार्वजनिक करना चाहते हैं, जिससे गोपनीयता की सीमाएँ धुंधली हो जाती हैं और नए सामाजिक मानदंड स्थापित होते हैं। यह हालिया समाचार में प्रौद्योगिकी-केंद्रित समाजशास्त्रियों द्वारा चर्चा का विषय था। -
प्रश्न 12: ‘नए सामाजिक आंदोलन’ (New Social Movements) की एक प्रमुख विशेषता क्या है, विशेषकर जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसे मुद्दों के संदर्भ में?
- A) मुख्य रूप से आर्थिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना।
- B) श्रमिक वर्ग के हितों का प्रतिनिधित्व करना।
- C) पहचान, जीवन शैली और सांस्कृतिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना।
- D) सैन्य साधनों का उपयोग करना।
सही उत्तर: C) पहचान, जीवन शैली और सांस्कृतिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना।
विस्तृत व्याख्या:
‘नए सामाजिक आंदोलन’ (New Social Movements – NSMs) 1960 के दशक के बाद उभरे, जो पारंपरिक वर्ग-आधारित आंदोलनों से भिन्न थे। NSMs अक्सर पर्यावरण, नारीवाद, शांति, LGBT+ अधिकार और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनकी विशेषता पहचान (Identity), जीवन शैली (Lifestyle) और सांस्कृतिक अधिकारों (Cultural Rights) पर जोर देना है, न कि केवल आर्थिक या राजनीतिक शक्ति पर। जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसे वैश्विक मुद्दे इन आंदोलनों के केंद्र में हैं। -
प्रश्न 13: समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘प्रतिभागियों का अवलोकन’ (Participant Observation) किस प्रकार की विधि है?
- A) मात्रात्मक (Quantitative)
- B) गुणात्मक (Qualitative)
- C) प्रयोगात्मक (Experimental)
- D) सर्वेक्षण (Survey)
सही उत्तर: B) गुणात्मक (Qualitative)
विस्तृत व्याख्या:
‘प्रतिभागियों का अवलोकन’ (Participant Observation) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जहाँ शोधकर्ता एक विशेष सामाजिक समूह या समुदाय में रहते हैं और उनकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं ताकि उनके जीवन और संस्कृति की गहरी समझ प्राप्त कर सकें। इसका उद्देश्य सामाजिक व्यवहार के पीछे के अर्थों और संदर्भों को समझना है, न कि संख्यात्मक डेटा एकत्र करना। -
प्रश्न 14: भारतीय समाज के संदर्भ में, ‘संस्कृतीकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा का क्या अर्थ है?
- A) निम्न जाति द्वारा उच्च जाति के अनुष्ठानों और जीवन शैली को अपनाना।
- B) उच्च जाति द्वारा निम्न जाति की जीवन शैली को अपनाना।
- C) पश्चिमी संस्कृति का भारतीय समाज में प्रसार।
- D) ग्रामीण जीवन शैली का शहरीकरण।
सही उत्तर: A) निम्न जाति द्वारा उच्च जाति के अनुष्ठानों और जीवन शैली को अपनाना।
विस्तृत व्याख्या:
एम. एन. श्रीनिवास द्वारा दी गई ‘संस्कृतीकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा उस प्रक्रिया को संदर्भित करती है जहाँ निम्न जाति या जनजाति के सदस्य उच्च जाति, विशेषकर ‘द्विज’ जातियों के अनुष्ठानों, रीति-रिवाजों, मूल्यों और जीवन शैली को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करते हैं। यह भारतीय सामाजिक गतिशीलता को समझने की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। -
प्रश्न 15: समाजशास्त्र में ‘पूंजी’ (Capital) के विभिन्न रूपों (आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक) की अवधारणा किसने विकसित की?
- A) पियरे बोर्डियो (Pierre Bourdieu)
- B) मिशेल फूको (Michel Foucault)
- C) जुरगेन हैबरमास (Jürgen Habermas)
- D) एंथनी गिडन्स (Anthony Giddens)
सही उत्तर: A) पियरे बोर्डियो (Pierre Bourdieu)
विस्तृत व्याख्या:
पियरे बोर्डियो ने ‘पूंजी’ (Capital) की अवधारणा को विस्तारित करते हुए न केवल आर्थिक पूंजी बल्कि सांस्कृतिक पूंजी (ज्ञान, शिक्षा, कौशल), सामाजिक पूंजी (नेटवर्क, संबंध) और प्रतीकात्मक पूंजी (प्रतिष्ठा, सम्मान) को भी शामिल किया। उनका मानना था कि ये सभी प्रकार की पूंजी सामाजिक स्थिति और शक्ति के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। -
प्रश्न 16: भारत में ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा किस सामाजिक समस्या को उजागर करती है?
- A) ऑनलाइन विवाह प्लेटफार्मों का प्रसार।
- B) डिजिटल कौशल और पहुंच के आधार पर नई असमानताएँ।
- C) ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच में वृद्धि।
- D) डिजिटल माध्यमों से पारंपरिक त्योहारों का उत्सव।
सही उत्तर: B) डिजिटल कौशल और पहुंच के आधार पर नई असमानताएँ।
विस्तृत व्याख्या:
‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ की अवधारणा उन नई असमानताओं को दर्शाती है जो डिजिटल प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, उनके उपयोग की क्षमता और डिजिटल साक्षरता के आधार पर उत्पन्न हो रही हैं। जिस प्रकार पारंपरिक जाति व्यवस्था ने समाज को स्तरीकृत किया, उसी प्रकार डिजिटल विभाजन (Digital Divide) उन लोगों के बीच एक नई सामाजिक पदानुक्रम बनाता है जिनके पास डिजिटल संसाधनों तक पहुंच है और जिनके पास नहीं है, जिससे मौजूदा सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ और गहरी होती हैं। -
प्रश्न 17: समाजशास्त्र में ‘नगरीकरण’ (Urbanization) की प्रक्रिया का एक मुख्य परिणाम क्या है?
- A) ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या में वृद्धि।
- B) शहरी क्षेत्रों में सामाजिक संबंधों का अधिक व्यक्तिगत और औपचारिक होना।
- C) कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण।
- D) सामुदायिक भावना का मजबूत होना।
सही उत्तर: B) शहरी क्षेत्रों में सामाजिक संबंधों का अधिक व्यक्तिगत और औपचारिक होना।
विस्तृत व्याख्या:
‘नगरीकरण’ (Urbanization) ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर जनसंख्या के प्रवास और शहरी जीवन शैली के प्रसार की प्रक्रिया है। इसके मुख्य परिणामों में से एक शहरी क्षेत्रों में सामाजिक संबंधों का अधिक व्यक्तिगत, खंडित और औपचारिक होना है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में संबंध अधिक घनिष्ठ और अनौपचारिक होते हैं। शहरी जीवन अक्सर गुमनामी और सामाजिक नियंत्रण में कमी की विशेषता रखता है। -
प्रश्न 18: अमेरिकी शहरों में हत्याओं की दर में गिरावट के हालिया विश्लेषण में ‘पुलिस सुधार’ और ‘समुदाय निवेश’ जैसे कारकों का उल्लेख किया गया। यह किस समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण को दर्शाता है?
- A) केवल व्यक्तिगत विचलन का अध्ययन।
- B) संरचनात्मक और सामुदायिक कारकों का अपराध पर प्रभाव।
- C) जैविक निर्धारणवाद।
- D) केवल आर्थिक कारकों का विश्लेषण।
सही उत्तर: B) संरचनात्मक और सामुदायिक कारकों का अपराध पर प्रभाव।
विस्तृत व्याख्या:
हत्याओं की दर में गिरावट का विश्लेषण, जिसमें पुलिस सुधार, समुदाय निवेश और सामाजिक मानदंड जैसे कारकों को शामिल किया गया है, यह दर्शाता है कि अपराध केवल व्यक्तिगत व्यवहार का परिणाम नहीं है, बल्कि यह व्यापक सामाजिक संरचनाओं और सामुदायिक संदर्भों से भी प्रभावित होता है। यह कार्यात्मकतावादी और संघर्षवादी दोनों दृष्टिकोणों के तत्वों को छूता है, जो सामाजिक व्यवस्था और असमानता के प्रभावों का अध्ययन करते हैं। यह हालिया समाचार में चर्चा का विषय था। -
प्रश्न 19: समाजशास्त्र में ‘लिंग’ (Gender) की अवधारणा ‘सेक्स’ (Sex) से किस प्रकार भिन्न है?
- A) लिंग एक जैविक श्रेणी है, जबकि सेक्स एक सामाजिक निर्माण है।
- B) लिंग एक सामाजिक निर्माण है, जबकि सेक्स एक जैविक श्रेणी है।
- C) लिंग और सेक्स दोनों एक ही अवधारणा को संदर्भित करते हैं।
- D) लिंग केवल महिलाओं को संदर्भित करता है।
सही उत्तर: B) लिंग एक सामाजिक निर्माण है, जबकि सेक्स एक जैविक श्रेणी है।
विस्तृत व्याख्या:
समाजशास्त्र में, ‘सेक्स’ (Sex) एक जैविक श्रेणी है जो जन्म के समय शारीरिक विशेषताओं (क्रोमोसोम, जननांग) के आधार पर पुरुष या महिला के रूप में वर्गीकरण को संदर्भित करती है। इसके विपरीत, ‘लिंग’ (Gender) एक सामाजिक निर्माण है जो उन भूमिकाओं, व्यवहारों, गतिविधियों और गुणों को संदर्भित करता है जिन्हें एक विशेष समाज पुरुष और महिला के लिए उपयुक्त मानता है। यह सीखा हुआ होता है और समय तथा संस्कृतियों के साथ बदलता रहता है। -
प्रश्न 20: ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) का क्या अर्थ है?
- A) सभी संस्कृतियों को एक ही सार्वभौमिक मानक के अनुसार आंकना।
- B) किसी संस्कृति को उसके अपने मूल्यों और मानदंडों के संदर्भ में समझना।
- C) एक संस्कृति को दूसरी संस्कृति से श्रेष्ठ मानना।
- D) संस्कृति के अध्ययन में तुलनात्मक दृष्टिकोण से बचना।
सही उत्तर: B) किसी संस्कृति को उसके अपने मूल्यों और मानदंडों के संदर्भ में समझना।
विस्तृत व्याख्या:
‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) यह विचार है कि किसी व्यक्ति के विश्वासों, मूल्यों और प्रथाओं को उसकी अपनी संस्कृति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि किसी अन्य संस्कृति के मानकों के अनुसार। यह विभिन्न संस्कृतियों के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ावा देता है और किसी एक संस्कृति को दूसरों से श्रेष्ठ मानने से रोकता है। -
प्रश्न 21: किस समाजशास्त्री ने ‘तर्कसंगत-कानूनी प्रभुत्व’ (Rational-Legal Domination) की अवधारणा प्रस्तुत की, जो आधुनिक राज्यों और नौकरशाही की विशेषता है?
- A) कार्ल मार्क्स (Karl Marx)
- B) मैक्स वेबर (Max Weber)
- C) एमाइल दुर्खीम (Emile Durkheim)
- D) टैल्कॉट पार्सन्स (Talcott Parsons)
सही उत्तर: B) मैक्स वेबर (Max Weber)
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने तीन प्रकार के वैध प्रभुत्व या अधिकार की पहचान की: पारंपरिक (Traditional), करिश्माई (Charismatic) और तर्कसंगत-कानूनी (Rational-Legal)। ‘तर्कसंगत-कानूनी प्रभुत्व’ नियमों और विनियमों पर आधारित होता है, जहाँ सत्ता धारक व्यक्ति के पद या कार्यालय के कारण वैध मानी जाती है, न कि उसकी व्यक्तिगत विशेषताओं के कारण। यह आधुनिक नौकरशाही और राज्य प्रशासन की विशिष्टता है। -
प्रश्न 22: ‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य ध्यान किस पर है?
- A) व्यापक सामाजिक संरचनाओं का विश्लेषण।
- B) व्यक्तिपरक अर्थों और प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक अंतःक्रिया।
- C) समाज में संघर्ष और शक्ति संबंध।
- D) सामाजिक व्यवस्था के कार्य।
सही उत्तर: B) व्यक्तिपरक अर्थों और प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक अंतःक्रिया।
विस्तृत व्याख्या:
‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) एक सूक्ष्म-स्तरीय समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य है जो इस बात पर जोर देता है कि लोग प्रतीकों (भाषा, हावभाव) के माध्यम से एक-दूसरे के साथ कैसे बातचीत करते हैं और इन प्रतीकों को कैसे अर्थ प्रदान करते हैं। यह व्यक्तिपरक अर्थ, व्याख्या और सामाजिक वास्तविकता के निर्माण पर केंद्रित है। जॉर्ज हर्बर्ट मीड और हरबर्ट ब्लूमर इसके प्रमुख समर्थक हैं। -
प्रश्न 23: एक अध्ययन में, अवसादग्रस्तता के लक्षणों और पारस्परिक संवेदनशीलता के बीच मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी पाई गई। यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य परिणामों में _______ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- A) केवल आनुवंशिक कारक।
- B) पीयर संबंध और मनोवैज्ञानिक पूंजी।
- C) व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति।
- D) केवल पारिवारिक इतिहास।
सही उत्तर: B) पीयर संबंध और मनोवैज्ञानिक पूंजी।
विस्तृत व्याख्या:
हालिया समाचार डेटा में चीन के कॉलेज छात्रों के एक अध्ययन का उल्लेख किया गया है, जिसमें अवसादग्रस्तता के लक्षणों, पारस्परिक संवेदनशीलता और मनोवैज्ञानिक पूंजी के बीच मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी का पता चला। यह परिणाम स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि सहकर्मी संबंध (पीयर रिलेशनशिप्स) और व्यक्तिगत लचीलापन (मनोवैज्ञानिक पूंजी) मानसिक स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह समाजशास्त्र में मानसिक स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों पर प्रकाश डालता है। -
प्रश्न 24: ‘अध्ययन के लिए नैतिक दिशानिर्देश’ (Ethical Guidelines for Research) का एक महत्वपूर्ण पहलू क्या है?
- A) केवल शोधकर्ता की सुविधा पर ध्यान केंद्रित करना।
- B) प्रतिभागियों की गोपनीयता और सूचित सहमति सुनिश्चित करना।
- C) किसी भी परिस्थिति में शोध परिणामों को संशोधित करना।
- D) केवल मात्रात्मक डेटा एकत्र करना।
सही उत्तर: B) प्रतिभागियों की गोपनीयता और सूचित सहमति सुनिश्चित करना।
विस्तृत व्याख्या:
समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘नैतिक दिशानिर्देश’ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें प्रतिभागियों की गोपनीयता (Confidentiality) की रक्षा करना, सूचित सहमति (Informed Consent) प्राप्त करना (जहाँ प्रतिभागियों को अध्ययन के उद्देश्य और संभावित जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है), और उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाना शामिल है। शोधकर्ता की सुविधा या परिणामों में हेरफेर जैसे कार्य अनैतिक माने जाते हैं। -
प्रश्न 25: समाजशास्त्र में ‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) का क्या अर्थ है?
- A) समाज में सभी व्यक्तियों की समानता।
- B) सामाजिक संसाधनों और अवसरों का असमान वितरण।
- C) व्यक्तियों का एक-दूसरे से अलगाव।
- D) सामाजिक संबंधों का विकास।
सही उत्तर: B) सामाजिक संसाधनों और अवसरों का असमान वितरण।
विस्तृत व्याख्या:
‘सामाजिक स्तरीकरण’ (Social Stratification) समाज में व्यक्तियों और समूहों का एक पदानुक्रमित विभाजन है जो सामाजिक संसाधनों, धन, शक्ति और प्रतिष्ठा के असमान वितरण के कारण होता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जो सामाजिक श्रेणियों के आधार पर लोगों को रैंक करती है और पीढ़ियों तक बनी रह सकती है, जैसे जाति व्यवस्था या वर्ग व्यवस्था।
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