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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र की गहन दुनिया में आपका स्वागत है! यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक कौशल को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रमुख समाजशास्त्रीय विचारकों, मौलिक अवधारणाओं और समकालीन सामाजिक मुद्दों पर आधारित इन 25 बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी का परीक्षण करें। यह सिर्फ एक क्विज़ नहीं, बल्कि आपकी ज्ञान यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अपनी सीट बेल्ट बांध लें और इस बौद्धिक चुनौती के लिए तैयार हो जाएँ!


  1. टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया एल्गोरिदम के 2024 अमेरिकी चुनावों में एक विशेष राजनीतिक पक्ष की ओर झुकाव की रिपोर्ट किस समाजशास्त्रीय अवधारणा से सर्वाधिक संबंधित हो सकती है?

    1. सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility)
    2. एजेंडा-सेटिंग (Agenda-Setting)
    3. संरचनात्मक प्रकार्यवाद (Structural Functionalism)
    4. सांकेतिक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: एजेंडा-सेटिंग सिद्धांत बताता है कि मीडिया (या इस मामले में एल्गोरिदम) क्या सोचना है यह नहीं बताता, बल्कि यह बताता है कि किस बारे में सोचना है। सोशल मीडिया एल्गोरिदम, विशिष्ट सामग्री को बढ़ावा देकर या दबाकर, सार्वजनिक बहस के विषयों और प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं के विचारों और धारणाओं को एक विशेष राजनीतिक झुकाव की ओर मोड़ा जा सकता है। अन्य विकल्प सामाजिक गतिशीलता (व्यक्तियों या समूहों की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन), संरचनात्मक प्रकार्यवाद (समाज को एक संतुलन प्रणाली के रूप में देखना), और सांकेतिक अंतःक्रियावाद (व्यक्तिगत अर्थों और प्रतीकों पर ध्यान केंद्रित करना) इस संदर्भ में कम प्रासंगिक हैं।

  2. अमेरिकी व्यापार और विधि विद्यालयों में उच्च नस्लीय विविधता के अकादमिक और पेशेवर परिणामों में सुधार से जुड़े होने के निष्कर्ष को किस अवधारणा से समझा जा सकता है?

    1. सांस्कृतिक विलंबना (Cultural Lag)
    2. सामाजिक पूंजी (Social Capital)
    3. विचलित व्यवहार (Deviant Behavior)
    4. समरूपता (Homogeneity)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: सामाजिक पूंजी विभिन्न पृष्ठभूमि और अनुभवों वाले व्यक्तियों के बीच निर्मित संबंधों और नेटवर्कों को संदर्भित करती है। उच्च नस्लीय विविधता एक मजबूत सामाजिक पूंजी का निर्माण करती है, क्योंकि यह विभिन्न दृष्टिकोणों, विचारों और समस्या-समाधान के तरीकों को लाती है। यह सहयोग, ज्ञान साझाकरण, नवाचार और नए अवसरों तक पहुंच को बढ़ावा देती है, जिससे अकादमिक और पेशेवर प्रदर्शन में सुधार होता है। सांस्कृतिक विलंबना (भौतिक संस्कृति के आगे अमूर्त संस्कृति का पिछड़ना) और विचलित व्यवहार (सामाजिक मानदंडों से हटकर व्यवहार) इस संदर्भ में लागू नहीं होते हैं। समरूपता (एक जैसी होना) विविधता के विपरीत है।

  3. कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    1. पूंजीपतियों से मजदूरों का अलगाव
    2. स्वयं के श्रम उत्पाद से अलगाव
    3. प्रकृति से मानव का अलगाव
    4. सामाजिक मानदंडों से अलगाव

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के तहत मजदूरों के अलगाव के चार रूपों की पहचान की: उत्पाद से, उत्पादन की प्रक्रिया से, अपनी प्रजाति-सत्ता (human essence) से, और अन्य मनुष्यों से। सबसे महत्वपूर्ण में से एक यह है कि मजदूर अपने द्वारा बनाए गए उत्पाद से अलग हो जाता है, जिस पर उसका कोई स्वामित्व या नियंत्रण नहीं होता है, और यह उत्पाद उसके खिलाफ एक बाहरी शक्ति के रूप में खड़ा होता है। विकल्प A भी एक प्रकार का अलगाव है, लेकिन B अधिक विशिष्ट और मौलिक है।

  4. मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रकार’ (Ideal Type) की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    1. सामाजिक वास्तविकताओं का यथार्थवादी चित्रण करना
    2. सामाजिक घटनाओं का अनुभवजन्य अध्ययन करना
    3. सामाजिक विश्लेषण के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण प्रदान करना
    4. भविष्य की सामाजिक प्रवृत्तियों की भविष्यवाणी करना

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: वेबर के ‘आदर्श प्रकार’ एक अवधारणात्मक या विश्लेषणात्मक उपकरण है, जो सामाजिक वास्तविकता की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं को उजागर करने के लिए निर्मित किया जाता है। यह एक अनुभवजन्य वास्तविकता का पूर्ण या औसत चित्रण नहीं है, बल्कि एक वैचारिक निर्माण है जिसका उपयोग अनुभवजन्य वास्तविकताओं को समझने, मापने और तुलना करने के लिए किया जाता है। यह एक मानसिक तस्वीर है जो शोधकर्ता को वास्तविक मामलों का अध्ययन करने के लिए एक बेंचमार्क प्रदान करती है।

  5. एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?

    1. जब समाज में अत्यधिक एकीकरण होता है
    2. जब सामाजिक मानदंड स्पष्ट या अनुपस्थित होते हैं
    3. जब व्यक्ति समूह से अलग-थलग पड़ जाता है
    4. जब आर्थिक असमानता चरम पर होती है

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: दुर्खीम के अनुसार, एनोमी एक ऐसी स्थिति है जहां समाज में सामाजिक मानदंड (norms) कमजोर पड़ जाते हैं, अस्पष्ट हो जाते हैं, या अनुपस्थित होते हैं। यह स्थिति व्यक्तियों के लिए दिशाहीनता और अनिश्चितता पैदा करती है, जिससे वे यह नहीं जान पाते कि उनसे क्या अपेक्षा की जाती है। यह अक्सर तेजी से सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक संकट, या युद्ध जैसी अव्यवस्था की अवधि के दौरान होता है, जिससे आत्महत्या दर बढ़ सकती है।

  6. ‘जाति’ (Caste) को स्तरीकरण के किस रूप के रूप में सबसे अच्छा वर्णित किया जा सकता है?

    1. वर्ग-आधारित (Class-based)
    2. उपलब्धि-आधारित (Achievement-based)
    3. आरोपित स्थिति-आधारित (Ascribed Status-based)
    4. स्थिति-आधारित (Status-based)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: जाति एक बंद स्तरीकरण प्रणाली है जहां किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म से निर्धारित होती है (आरोपित स्थिति) और उसे जीवन भर बदला नहीं जा सकता। यह एक पदानुक्रमित प्रणाली है जो विवाह, व्यवसाय और सामाजिक अंतःक्रिया पर सख्त नियम लगाती है। वर्ग-आधारित प्रणाली (Class-based) अधिक खुली होती है और उपलब्धि (achievement) पर आधारित होती है।

  7. वह प्रक्रिया जिसमें व्यक्ति अपने स्वयं के सांस्कृतिक मूल्यों को अन्य संस्कृतियों के मूल्यों से श्रेष्ठ मानता है, क्या कहलाती है?

    1. सांस्कृतिक सापेक्षवाद (Cultural Relativism)
    2. नृजातिकेन्द्रवाद (Ethnocentrism)
    3. बहुसंस्कृतिवाद (Multiculturalism)
    4. सांस्कृतिक आत्मसातीकरण (Cultural Assimilation)

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: नृजातिकेन्द्रवाद (Ethnocentrism) एक दृष्टिकोण है जिसमें व्यक्ति अपनी संस्कृति को दूसरों की संस्कृतियों के मूल्यांकन के लिए एक मानक मानता है, और अक्सर अपनी संस्कृति को श्रेष्ठ समझता है, जबकि अन्य संस्कृतियों को हीन या असामान्य मानता है। सांस्कृतिक सापेक्षवाद इसके विपरीत है, जहाँ प्रत्येक संस्कृति को उसके अपने संदर्भ में समझा जाता है।

  8. एक ऐसी पारिवारिक संरचना जिसमें एक पुरुष की कई पत्नियाँ होती हैं, उसे क्या कहा जाता है?

    1. एकविवाह (Monogamy)
    2. बहुपति प्रथा (Polyandry)
    3. बहुपत्नी प्रथा (Polygyny)
    4. समूह विवाह (Group Marriage)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: बहुपत्नी प्रथा (Polygyny) विवाह का एक रूप है जिसमें एक पुरुष एक साथ एक से अधिक पत्नियों से विवाह करता है। एकविवाह (Monogamy) एक समय में केवल एक पति या पत्नी होने को संदर्भित करता है। बहुपति प्रथा (Polyandry) वह प्रथा है जिसमें एक महिला के एक से अधिक पति होते हैं।

  9. गुणात्मक शोध (Qualitative Research) की मुख्य विशेषता क्या है?

    1. सांख्यिकीय विश्लेषण पर जोर
    2. व्यक्तिपरक अनुभव और अर्थों की गहन समझ
    3. बड़ी जनसंख्या के सामान्यीकरण पर ध्यान
    4. परिकल्पना परीक्षण पर निर्भरता

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक शोध सामाजिक घटनाओं के गहरे अर्थों, अनुभवों और व्याख्याओं को समझने पर केंद्रित होता है। यह अक्सर छोटे नमूनों, गहन साक्षात्कारों, फोकस समूहों और सहभागी अवलोकन जैसे तरीकों का उपयोग करके गैर-संख्यात्मक डेटा एकत्र करता है। इसके विपरीत, मात्रात्मक शोध (Quantitative Research) सांख्यिकीय विश्लेषण और सामान्यीकरण पर जोर देता है।

  10. एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

    1. निचली जातियों का अपनी परंपराओं को छोड़ना
    2. निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों का अनुकरण
    3. पश्चिमीकरण की प्रक्रिया
    4. जनजातीय संस्कृतियों का मुख्यधारा में विलय

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक ‘निम्न’ जाति या जनजाति या अन्य समूह अपनी स्थिति को बदलने के लिए एक ‘उच्च’ और अक्सर ‘द्विज’ जाति के अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाता है। यह सामाजिक गतिशीलता का एक साधन है, जहाँ समूह अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करते हैं।

  11. टालकोट पार्सन्स के अनुसार, सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज के लिए आवश्यक चार कार्यात्मक अनिवार्यताएं कौन सी हैं (AGIL प्रतिमान)?

    1. अनुकूलन, लक्ष्य प्राप्ति, एकीकरण, गुप्त प्रतिमान अनुरक्षण
    2. अधिग्रहण, गतिशीलता, अलगाव, नियंत्रण
    3. सहयोग, प्रतिस्पर्धा, संघर्ष, समामेलन
    4. मूल्यांकन, सामान्यीकरण, अंतरनिर्भरता, विधान

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या: टालकोट पार्सन्स का AGIL प्रतिमान (Adaptation, Goal Attainment, Integration, Latency/Pattern Maintenance) बताता है कि किसी भी सामाजिक व्यवस्था को जीवित रहने और कार्य करने के लिए चार कार्यात्मक समस्याओं का समाधान करना होता है। अनुकूलन (पर्यावरण से संसाधन प्राप्त करना), लक्ष्य प्राप्ति (सामूहिक उद्देश्यों को परिभाषित करना और प्राप्त करना), एकीकरण (उप-प्रणालियों को सुसंगत रूप से जोड़ना), और गुप्त प्रतिमान अनुरक्षण (मूल्यों और मानदंडों को बनाए रखना और प्रसारित करना) ये चार अनिवार्यताएं हैं।

  12. रॉबर्ट मर्टन के ‘एनोमी’ के सिद्धांत में ‘नवाचार’ (Innovation) का क्या अर्थ है?

    1. सांस्कृतिक लक्ष्यों और संस्थागत साधनों दोनों को स्वीकार करना
    2. सांस्कृतिक लक्ष्यों को अस्वीकार करना लेकिन संस्थागत साधनों को स्वीकार करना
    3. सांस्कृतिक लक्ष्यों को स्वीकार करना लेकिन उन्हें प्राप्त करने के लिए अवैध साधनों का उपयोग करना
    4. सांस्कृतिक लक्ष्यों और संस्थागत साधनों दोनों को अस्वीकार करना

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट मर्टन ने तनाव सिद्धांत (Strain Theory) के तहत एनोमी की अवधारणा को विकसित किया, जहाँ नवाचार (Innovation) तब होता है जब व्यक्ति सांस्कृतिक रूप से स्वीकृत लक्ष्यों (जैसे धन या सफलता) को स्वीकार करते हैं लेकिन उन्हें प्राप्त करने के लिए समाज द्वारा अनुमोदित (संस्थागत) साधनों के बजाय अवैध या वर्जित साधनों का उपयोग करते हैं। यह लक्ष्यों और साधनों के बीच बेमेल का परिणाम है।

  13. जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘मैं’ (I) और ‘मुझे’ (Me) में क्या अंतर है?

    1. ‘मैं’ व्यक्ति का सामाजिक स्व है जबकि ‘मुझे’ जैविक स्व है
    2. ‘मैं’ व्यक्ति का सहज, अप्रत्याशित स्व है जबकि ‘मुझे’ समाजीकृत स्व है
    3. ‘मैं’ चेतन मन है जबकि ‘मुझे’ अचेतन मन है
    4. ‘मैं’ मूर्त स्व है जबकि ‘मुझे’ अमूर्त स्व है

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के सिद्धांत में, ‘मैं’ (I) व्यक्ति का सहज, रचनात्मक, अप्रत्याशित और तात्कालिक स्व है जो सामाजिक अपेक्षाओं पर प्रतिक्रिया करता है। इसके विपरीत, ‘मुझे’ (Me) समाज की अपेक्षाओं, दृष्टिकोणों और मानदंडों के आंतरिककरण (internalization) के माध्यम से विकसित हुआ समाजीकृत स्व है। ‘मुझे’ वह है जो ‘मैं’ को आकार देता है।

  14. भारत में जनजातीय समुदायों के एकीकरण के लिए एल्विन द्वारा कौन सा दृष्टिकोण प्रस्तावित किया गया था?

    1. अलगाव का दृष्टिकोण
    2. आत्मसातीकरण का दृष्टिकोण
    3. सांस्कृतिक संलयन का दृष्टिकोण
    4. संरक्षण और विकास का दृष्टिकोण

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या: वेरियर एल्विन, एक प्रसिद्ध मानवविज्ञानी, ने भारत की जनजातीय आबादी के लिए ‘राष्ट्रीय उद्यान’ या ‘अलगाव’ (Isolation) की नीति की वकालत की। उनका मानना था कि जनजातियों को बाहरी दुनिया के हानिकारक प्रभावों से बचाना चाहिए ताकि उनकी अनूठी संस्कृति और जीवन शैली को संरक्षित किया जा सके। हालांकि, इस दृष्टिकोण की बाद में कई समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओं द्वारा आलोचना की गई।

  15. फर्डीनेंड टॉनीज़ द्वारा प्रतिपादित ‘गेमाइनशाफ्ट’ (Gemeinschaft) का मुख्य लक्षण क्या है?

    1. impersonal और तर्कसंगत संबंध
    2. औपचारिक नियम और बड़े पैमाने पर संगठन
    3. व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंध
    4. द्वितीयक समूहों का प्रभुत्व

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: फर्डीनेंड टॉनीज़ ने समाज के दो प्रकारों – गेमाइनशाफ्ट (समुदाय) और गेज़ेलशाफ्ट (समाज) – की अवधारणाएँ दीं। गेमाइनशाफ्ट एक ऐसे समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ संबंध व्यक्तिगत, भावनात्मक, गहरे और पारंपरिक होते हैं, जो अक्सर छोटे, ग्रामीण समाजों में पाए जाते हैं। इसके विपरीत, गेज़ेलशाफ्ट में संबंध अवैयक्तिक, तर्कसंगत और औपचारिक होते हैं, जो बड़े शहरी समाजों की विशेषता है।

  16. ‘सापेक्ष गरीबी’ (Relative Poverty) का क्या अर्थ है?

    1. जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता
    2. समाज के औसत जीवन स्तर की तुलना में कम संसाधनों का होना
    3. सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा से नीचे रहना
    4. सभी देशों में एक समान गरीबी रेखा

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: सापेक्ष गरीबी तब होती है जब व्यक्तियों या परिवारों के पास समाज के अधिकांश अन्य सदस्यों की तुलना में काफी कम आय और संसाधन होते हैं, जिससे वे समाज के सामान्य जीवन स्तर को बनाए रखने या उसमें भाग लेने में असमर्थ होते हैं। यह पूर्ण गरीबी (Absolute Poverty) के विपरीत है, जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता को संदर्भित करती है।

  17. समाज में व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अनौपचारिक साधनों का एक उदाहरण क्या है?

    1. कानून और अदालतें
    2. पुलिस बल
    3. हंसी और सामाजिक बहिष्कार
    4. जेल और जुर्माना

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: अनौपचारिक सामाजिक नियंत्रण में वे साधन शामिल होते हैं जो गैर-राज्य संस्थाओं या अनौपचारिक समूहों द्वारा लागू किए जाते हैं। इनमें परिवार, दोस्त, पड़ोसी और समुदाय द्वारा लागू किए गए मानदंड और प्रतिबंध शामिल होते हैं, जैसे आलोचना करना, उपहास करना, गपशप करना, या सामाजिक बहिष्कार करना। कानून, अदालतें, पुलिस और जेल औपचारिक सामाजिक नियंत्रण के उदाहरण हैं।

  18. इरविंग गॉफमैन के ‘नाटकीयता’ (Dramaturgy) के सिद्धांत में ‘फ्रंट स्टेज’ (Front Stage) से क्या तात्पर्य है?

    1. वह स्थान जहाँ व्यक्ति अपने सच्चे स्व को व्यक्त करते हैं
    2. वह स्थान जहाँ व्यक्ति सामाजिक प्रदर्शन करते हैं
    3. वह स्थान जहाँ व्यक्ति आराम करते हैं और भूमिकाएं नहीं निभाते
    4. वह स्थान जहाँ पूर्वाभ्यास किया जाता है

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: इरविंग गॉफमैन के नाटकीयता के सिद्धांत में, ‘फ्रंट स्टेज’ वह क्षेत्र है जहाँ व्यक्ति सामाजिक रूप से स्वीकार्य भूमिका निभाते हैं और दूसरों के सामने एक निश्चित छाप प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे एक अभिनेता मंच पर प्रदर्शन करता है। यहाँ व्यक्ति अपनी वेशभूषा, व्यवहार और भाषा को नियंत्रित करते हैं ताकि वे एक वांछित छवि प्रस्तुत कर सकें। ‘बैक स्टेज’ वह क्षेत्र है जहाँ व्यक्ति इन भूमिकाओं से मुक्त होकर आराम कर सकते हैं।

  19. जब शोधकर्ता जनसंख्या के प्रत्येक सदस्य को चुने जाने का समान और स्वतंत्र अवसर देता है, तो इस प्रकार के नमूनाकरण को क्या कहा जाता है?

    1. स्नोबॉल नमूनाकरण (Snowball Sampling)
    2. सुविधाजनक नमूनाकरण (Convenience Sampling)
    3. यादृच्छिक नमूनाकरण (Random Sampling)
    4. कोटा नमूनाकरण (Quota Sampling)

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: यादृच्छिक नमूनाकरण (या संभाव्यता नमूनाकरण) एक नमूनाकरण विधि है जहां जनसंख्या के प्रत्येक सदस्य के नमूने में शामिल होने की एक ज्ञात और अक्सर समान संभावना होती है। यह पूर्वाग्रह (bias) को कम करता है और शोधकर्ताओं को नमूने से प्राप्त निष्कर्षों को बड़ी जनसंख्या में सामान्यीकृत करने की अनुमति देता है। अन्य विकल्प गैर-संभाव्यता नमूनाकरण विधियाँ हैं।

  20. ‘भावनाओं के समाजशास्त्र’ (Sociology of Emotions) में ‘भावनात्मक श्रम’ (Emotional Labor) की अवधारणा किसने विकसित की?

    1. अर्ली रसेल हॉचचाइल्ड (Arlie Russell Hochschild)
    2. मैरी डगलस (Mary Douglas)
    3. पेट्रीसिया हिल कॉलिन्स (Patricia Hill Collins)
    4. जूडी बटलिन (Judith Butler)

    सही उत्तर: A

    विस्तृत व्याख्या: अर्ली रसेल हॉचचाइल्ड ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “द मैनेज्ड हार्ट: कमर्शियलाइजेशन ऑफ ह्यूमन फीलिंग” (The Managed Heart: Commercialization of Human Feeling) में ‘भावनात्मक श्रम’ की अवधारणा विकसित की। यह उन नौकरियों को संदर्भित करती है जहाँ कर्मचारियों को अपनी भावनाओं को (चेहरे के भाव, आवाज का लहजा आदि) प्रबंधित या दबाने की आवश्यकता होती है ताकि संगठन द्वारा निर्धारित भावनात्मक प्रदर्शन मानकों को पूरा किया जा सके, विशेष रूप से ग्राहक सेवा भूमिकाओं में।

  21. ‘आधुनिकीकरण सिद्धांत’ (Modernization Theory) मुख्य रूप से किस पर केंद्रित है?

    1. उपनिवेशवाद के प्रभावों पर
    2. अविकसित देशों के विकास के आंतरिक कारकों पर
    3. विश्व-व्यवस्था के पदानुक्रम पर
    4. बहुराष्ट्रीय निगमों की भूमिका पर

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: आधुनिकीकरण सिद्धांत एक विकासवादी सिद्धांत है जो यह मानता है कि अविकसित देश पश्चिमी देशों के समान पथ का अनुसरण करके विकसित हो सकते हैं। यह सिद्धांत मुख्य रूप से विकासशील देशों के भीतर आंतरिक कारकों, जैसे मूल्यों, संस्थाओं और प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है, और आर्थिक विकास के लिए तर्कसंगतता और औद्योगिकरण को महत्वपूर्ण मानता है। यह निर्भरता सिद्धांत (Dependency Theory) और विश्व-व्यवस्था सिद्धांत (World-Systems Theory) के विपरीत है जो बाहरी कारकों पर जोर देते हैं।

  22. मैक्स वेबर के अनुसार, ‘करिश्माई सत्ता’ (Charismatic Authority) का आधार क्या है?

    1. परंपरा और प्रथाएं
    2. कानूनी-तर्कसंगत नियम
    3. व्यक्तिगत असाधारण गुण और आकर्षण
    4. आर्थिक शक्ति

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने सत्ता के तीन शुद्ध प्रकारों की पहचान की: पारंपरिक, कानूनी-तर्कसंगत और करिश्माई। करिश्माई सत्ता किसी नेता के असाधारण व्यक्तिगत गुणों, आकर्षण, साहस या पवित्रता पर आधारित होती है, जो अनुयायियों को प्रेरित करता है और उन्हें एक असाधारण व्यक्ति के रूप में देखता है। यह व्यक्तिगत भक्ति और विश्वास पर निर्भर करता है, न कि कानूनों या परंपराओं पर।

  23. ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा किस संदर्भ में समझी जा सकती है?

    1. डिजिटल उपकरणों के उपयोग के पारंपरिक जातिगत प्रतिबंध
    2. डिजिटल सेवाओं तक पहुंच और लाभों में जाति-आधारित असमानताएं
    3. जाति गणना के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग
    4. डिजिटल विवाह पोर्टलों में जातिगत वरीयताएँ

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ की अवधारणा उन सामाजिक असमानताओं को संदर्भित करती है जहाँ डिजिटल तकनीकों (जैसे इंटरनेट, स्मार्टफोन) तक पहुंच, उनके उपयोग की क्षमता और उनसे प्राप्त होने वाले लाभों में जाति-आधारित भेदभाव या असमानताएं बनी रहती हैं। यह डिजिटल विभाजन का एक रूप है जो पारंपरिक सामाजिक स्तरीकरण को डिजिटल क्षेत्र में भी विस्तारित करता है, जिससे कुछ समूहों को डिजिटल दुनिया के अवसरों से वंचित रखा जाता है।

  24. समाजशास्त्र में, शिक्षा को अक्सर किस रूप में देखा जाता है जो सामाजिक स्तरीकरण को बनाए रखता है और पुनरुत्पादित करता है?

    1. सामाजिक गतिशीलता का प्राथमिक इंजन
    2. योग्यता-आधारित व्यवस्था का आधार
    3. एक ऐसा संस्थान जो सामाजिक असमानताओं को मजबूत करता है
    4. सांस्कृतिक एकीकरण का एकमात्र स्रोत

    सही उत्तर: C

    विस्तृत व्याख्या: संघर्ष सिद्धांतवादी और कुछ प्रकार्यवादी आलोचक शिक्षा को एक ऐसे संस्थान के रूप में देखते हैं जो मौजूदा सामाजिक स्तरीकरण (जैसे वर्ग, जाति) को बनाए रखता है और पुनरुत्पादित करता है। यह सांस्कृतिक पूंजी, सामाजिक पूंजी में अंतर और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक ‘ट्रैकों’ के माध्यम से ऐसा करता है, जिससे समाज में असमानताएँ कायम रहती हैं।

  25. ‘सापेक्षिक अभाव’ (Relative Deprivation) सिद्धांत किस प्रकार के सामाजिक आंदोलनों की व्याख्या करता है?

    1. उन आंदोलनों की जो पूर्ण गरीबी से उत्पन्न होते हैं
    2. उन आंदोलनों की जहाँ लोग दूसरों की तुलना में खुद को वंचित महसूस करते हैं
    3. उन आंदोलनों की जो सामाजिक पहचान के निर्माण पर आधारित होते हैं
    4. उन आंदोलनों की जहाँ एक स्पष्ट वैचारिक कार्यक्रम होता है

    सही उत्तर: B

    विस्तृत व्याख्या: सापेक्षिक अभाव सिद्धांत बताता है कि लोग तब सामाजिक आंदोलनों में शामिल होते हैं जब वे महसूस करते हैं कि उनके पास वह नहीं है जो उनके विचार में उन्हें होना चाहिए, खासकर जब वे खुद की तुलना दूसरों से करते हैं जिनके पास अधिक है। यह पूर्ण अभाव (absolute deprivation) के बजाय perceived deprivation पर जोर देता है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति गरीब न होकर भी दूसरों की तुलना में खुद को वंचित महसूस कर सकता है और इससे सामाजिक आंदोलन में शामिल हो सकता है।

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