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समाजशास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

समाजशास्त्र: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें

प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र की गहन दुनिया में आपका स्वागत है! यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रमुख समाजशास्त्रीय विचारकों से लेकर समकालीन सामाजिक मुद्दों तक, प्रत्येक प्रश्न आपको चुनौती देगा और आपकी तैयारी को एक नया आयाम देगा। अपनी क्षमता का परीक्षण करने और समाजशास्त्र में महारत हासिल करने के लिए तैयार हो जाइए!


प्रश्न 1: कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी समाज में ‘वस्तु फ़ेटिशिज्म’ (Commodity Fetishism) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

  1. वस्तुओं का अत्यधिक उपभोग।
  2. वस्तुओं को बनाने में लगे मानवीय श्रम संबंधों की अनदेखी करके उन्हें जादुई गुणों से संपन्न मानना।
  3. वस्तुओं का उपयोग सामाजिक स्थिति को दर्शाने के लिए करना।
  4. वस्तुओं का उत्पादन केवल लाभ के लिए करना।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

कार्ल मार्क्स की ‘वस्तु फ़ेटिशिज्म’ की अवधारणा यह बताती है कि पूंजीवादी समाजों में, वस्तुओं को केवल उनके उपयोग-मूल्य या विनिमय-मूल्य के बजाय, रहस्यमय या जादुई गुणों से संपन्न माना जाता है। यह मानवीय श्रम संबंधों (जो उन्हें बनाने में लगे हैं) को अस्पष्ट कर देता है और वस्तुओं को ‘जीवन’ और शक्ति से संपन्न कर देता है। यह अवधारणा मार्क्स की पुस्तक ‘दास कैपिटल’ में वर्णित है। विकल्प A, C और D आंशिक रूप से पूंजीवाद से संबंधित हैं लेकिन मार्क्स के वस्तु फ़ेटिशिज्म की केंद्रीय परिभाषा को सटीक रूप से प्रस्तुत नहीं करते हैं।


प्रश्न 2: मैक्स वेबर के अनुसार, सत्ता (Authority) के कौन से तीन शुद्ध प्रकार हैं?

  1. पारंपरिक, करिश्माई और कानूनी-तार्किक।
  2. वैधानिक, निरंकुश और लोकतांत्रिक।
  3. सत्तावादी, लोकतांत्रिक और सहभागी।
  4. उत्पीड़क, सहमत और नियंत्रित।

सही उत्तर: A

विस्तृत व्याख्या:

मैक्स वेबर ने सत्ता (Authority) के तीन शुद्ध प्रकारों की पहचान की है: 1. पारंपरिक सत्ता (Traditional Authority), जो रीति-रिवाजों और पुरानी परंपराओं पर आधारित होती है (जैसे राजशाही)। 2. करिश्माई सत्ता (Charismatic Authority), जो किसी व्यक्ति के असाधारण गुणों या व्यक्तित्व पर आधारित होती है (जैसे धार्मिक नेता या क्रांतिकारी)। 3. कानूनी-तार्किक सत्ता (Legal-Rational Authority), जो नियमों, विनियमों और कानूनी प्रक्रियाओं पर आधारित होती है (जैसे आधुनिक नौकरशाही)। अन्य विकल्प वेबर के वर्गीकरण से सीधे संबंधित नहीं हैं।


प्रश्न 3: एमिल दुर्खीम के अनुसार, ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Facts) क्या हैं?

  1. व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक अनुभव।
  2. वे विचार और भावनाएं जो व्यक्ति के भीतर उत्पन्न होती हैं।
  3. व्यवहार के वे तरीके जो समाज में व्यापक रूप से फैले होते हैं और व्यक्तियों पर एक बाहरी बाध्यकारी शक्ति रखते हैं।
  4. व्यक्तिगत पसंद और निर्णय।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्य’ को व्यवहार के ऐसे तरीकों के रूप में परिभाषित किया है जो समाज में व्यापक रूप से फैले होते हैं और व्यक्तियों पर बाहरी रूप से बाध्यकारी शक्ति रखते हैं, भले ही व्यक्ति उन्हें व्यक्तिगत रूप से पसंद न करें। ये तथ्य व्यक्तिगत चेतना से स्वतंत्र होते हैं और सामूहिक चेतना का हिस्सा होते हैं। दुर्खीम का मानना था कि समाजशास्त्र को इन्हीं सामाजिक तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए। उनकी कृति ‘द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड’ में इसका विस्तृत वर्णन है।


प्रश्न 4: टैल्कॉट पार्सन्स के पैटर्न वैरिएबल्स (Pattern Variables) में से कौन सा सार्वभौमिकता बनाम विशिष्टता (Universalism vs. Particularism) से संबंधित है?

  1. अफेक्टिविटी बनाम अफेक्टिव न्यूट्रैलिटी।
  2. अचीवमेंट बनाम एस्क्रिप्शन।
  3. विशिष्टता बनाम विसार।
  4. सार्वभौमिकता बनाम विशिष्टता।

सही उत्तर: D

विस्तृत व्याख्या:

टैल्कॉट पार्सन्स ने सामाजिक क्रिया के विश्लेषण के लिए पांच पैटर्न वैरिएबल्स दिए थे। सार्वभौमिकता बनाम विशिष्टता (Universalism vs. Particularism) यह दर्शाता है कि क्या व्यक्तियों का मूल्यांकन सार्वभौमिक मानदंडों (जैसे नियम और कानून) के आधार पर किया जाता है या व्यक्तिगत संबंधों और विशिष्ट परिस्थितियों (जैसे परिवार या दोस्त) के आधार पर। यह आधुनिक और पारंपरिक समाजों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर को दर्शाता है। अन्य विकल्प पार्सन्स के अन्य पैटर्न वैरिएबल्स के जोड़े हैं।


प्रश्न 5: जॉर्ज हर्बर्ट मीड के अनुसार, ‘मी’ (Me) का क्या अर्थ है?

  1. व्यक्ति की सहज, अपरिवर्तित आत्म।
  2. समाज के संगठित दृष्टिकोणों और अपेक्षाओं का आंतरिककरण।
  3. अन्य व्यक्तियों के साथ व्यक्ति का सीधा संपर्क।
  4. अचेतन इच्छाओं का संग्रह।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

जॉर्ज हर्बर्ट मीड के आत्म के सिद्धांत में ‘मी’ (Me) वह हिस्सा है जो समाज के संगठित दृष्टिकोणों और अपेक्षाओं का आंतरिककरण करता है। यह वह आत्म है जिसे हम दूसरों की प्रतिक्रियाओं और सामाजिक नियमों के माध्यम से सीखते हैं, और यह सामाजिक नियंत्रण का प्रतिनिधित्व करता है। ‘आई’ (I) आत्म का सहज, रचनात्मक और अपरंपरागत हिस्सा है, जो सामाजिक अपेक्षाओं पर प्रतिक्रिया करता है। विकल्प A ‘आई’ को संदर्भित करता है।


प्रश्न 6: रॉबर्ट के. मर्टन द्वारा प्रतिपादित ‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा किससे संबंधित है?

  1. सामाजिक मानदंडों का अभाव।
  2. समाज द्वारा निर्धारित लक्ष्यों और उन्हें प्राप्त करने के वैध साधनों के बीच असंतुलन।
  3. व्यक्तिगत मूल्यों का पतन।
  4. पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं का विघटन।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

रॉबर्ट के. मर्टन ने दुर्खीम की अवधारणा ‘एनोमी’ को संशोधित करते हुए इसे समाज द्वारा निर्धारित सांस्कृतिक लक्ष्यों (जैसे सफलता) और उन्हें प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संस्थागत या वैध साधनों के बीच असंतुलन के रूप में परिभाषित किया। इस असंतुलन के कारण व्यक्ति विभिन्न प्रकार के अनुकूलन (conformity, innovation, ritualism, retreatism, rebellion) प्रदर्शित करते हैं। विकल्प A दुर्खीम की एनोमी से अधिक निकट है, लेकिन मर्टन ने इसे लक्ष्यों और साधनों के संदर्भ में स्पष्ट किया।


प्रश्न 7: सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification) का क्या अर्थ है?

  1. समाज का क्षैतिज विभाजन।
  2. लोगों का सामाजिक वर्गों, जातियों या समूहों में पदानुक्रमित विभाजन।
  3. सामाजिक संघर्षों का अध्ययन।
  4. व्यक्तियों के बीच मनोवैज्ञानिक अंतर।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

सामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों और समूहों का पदानुक्रमित विभाजन है जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक शक्ति, प्रतिष्ठा और संसाधनों तक उनकी पहुंच में असमानता को दर्शाता है। यह समाज में असमानता के व्यवस्थित पैटर्न को संदर्भित करता है। जाति, वर्ग और लिंग स्तरीकरण के सामान्य रूप हैं।


प्रश्न 8: संस्कृति (Culture) का कौन सा घटक मूर्त (material) और अमूर्त (non-material) दोनों तत्वों को समाहित करता है?

  1. केवल कलाकृतियाँ (artifacts)।
  2. केवल मूल्य और विश्वास।
  3. ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, कानून, रीति-रिवाज और अन्य सभी क्षमताएं और आदतें जो मनुष्य समाज के सदस्य के रूप में प्राप्त करता है।
  4. केवल भाषा।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

संस्कृति एक व्यापक अवधारणा है जिसमें किसी समाज के साझा ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, कानून, रीति-रिवाज और जीवन शैली शामिल होती है। ई.बी. टायलर ने संस्कृति को “वह समग्र जटिलता” के रूप में परिभाषित किया जिसमें ये सभी तत्व शामिल हैं। इसमें भौतिक वस्तुएँ (जैसे उपकरण, कपड़े) और अमूर्त तत्व (जैसे भाषा, मूल्य, धर्म) दोनों शामिल होते हैं।


प्रश्न 9: सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) का वह प्रकार जिसमें एक व्यक्ति अपनी स्थिति को एक पीढ़ी के भीतर बदलता है, क्या कहलाता है?

  1. अंतरा-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intergenerational Mobility)।
  2. अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intragenerational Mobility)।
  3. क्षैतिज गतिशीलता (Horizontal Mobility)।
  4. संरचनात्मक गतिशीलता (Structural Mobility)।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता’ (Intragenerational Mobility) एक व्यक्ति के जीवनकाल के भीतर उसकी सामाजिक स्थिति में होने वाले परिवर्तनों को संदर्भित करती है। उदाहरण के लिए, एक क्लर्क का प्रबंधक बनना। इसके विपरीत, ‘अंतरा-पीढ़ीगत गतिशीलता’ (Intergenerational Mobility) विभिन्न पीढ़ियों के बीच सामाजिक स्थिति में बदलाव को दर्शाती है, जैसे कि पिता की तुलना में बेटे की सामाजिक स्थिति।


प्रश्न 10: जब एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक भूमिकाओं की अपेक्षाओं को पूरा करने में कठिनाई का अनुभव होता है, तो उसे क्या कहा जाता है?

  1. भूमिका तनाव (Role Strain)।
  2. भूमिका संघर्ष (Role Conflict)।
  3. भूमिका विफलता (Role Failure)।
  4. भूमिका दूरी (Role Distance)।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘भूमिका संघर्ष’ (Role Conflict) तब होता है जब एक व्यक्ति को विभिन्न भूमिकाओं से संबंधित परस्पर विरोधी अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, एक पुलिस अधिकारी जो एक ही समय में एक दोस्त और एक कानून प्रवर्तक दोनों की भूमिका निभा रहा हो। ‘भूमिका तनाव’ (Role Strain) एक ही भूमिका की विभिन्न अपेक्षाओं को पूरा करने में कठिनाई को संदर्भित करता है।


प्रश्न 11: विवाह की वह पद्धति जिसमें एक पुरुष एक से अधिक महिलाओं से विवाह करता है, क्या कहलाती है?

  1. एकल विवाह (Monogamy)।
  2. बहुपति विवाह (Polyandry)।
  3. बहुपत्नी विवाह (Polygyny)।
  4. समूह विवाह (Group Marriage)।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

‘बहुपत्नी विवाह’ (Polygyny) विवाह का वह रूप है जिसमें एक पुरुष की एक से अधिक पत्नियाँ होती हैं। यह कई समाजों में ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान में भी प्रचलित है। ‘बहुपति विवाह’ (Polyandry) में एक महिला के एक से अधिक पति होते हैं, जबकि ‘एकल विवाह’ (Monogamy) में एक पति और एक पत्नी होते हैं।


प्रश्न 12: एमिल दुर्खीम के अनुसार, धर्म का प्राथमिक कार्य क्या है?

  1. व्यक्तिगत आध्यात्मिक संतुष्टि प्रदान करना।
  2. सामाजिक एकजुटता और एकता को बढ़ावा देना।
  3. ईश्वरीय नियमों का प्रचार करना।
  4. मानव पीड़ा के लिए एक स्पष्टीकरण प्रदान करना।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

एमिल दुर्खीम ने धर्म को समाज के लिए एक कार्यात्मक आवश्यकता के रूप में देखा। उनकी पुस्तक ‘द एलिमेंटरी फॉर्म्स ऑफ द रिलीजियस लाइफ’ में उन्होंने तर्क दिया कि धर्म का प्राथमिक कार्य ‘सामाजिक एकजुटता’ (Social Solidarity) और ‘एकता’ (Unity) को बढ़ावा देना है। यह लोगों को साझा विश्वासों और अनुष्ठानों के माध्यम से एक साथ लाता है, जिससे सामूहिक चेतना मजबूत होती है। दुर्खीम के लिए, पवित्र वस्तुएँ वास्तव में समाज का प्रतीक थीं।


प्रश्न 13: शिक्षा का ‘प्रच्छन्न पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) क्या संदर्भित करता है?

  1. स्कूल में आधिकारिक तौर पर पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम।
  2. अकादमिक विषयों के अलावा अनौपचारिक रूप से सिखाए गए मूल्य, मानदंड और अपेक्षाएं।
  3. छात्रों को घर पर सिखाए गए नैतिक सिद्धांत।
  4. स्कूलों में गैर-शैक्षणिक गतिविधियां।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘प्रच्छन्न पाठ्यक्रम’ (Hidden Curriculum) शिक्षाशास्त्र और समाजशास्त्र में एक अवधारणा है जो उन अनौपचारिक और अक्सर अनकही शिक्षाओं को संदर्भित करती है जो छात्र स्कूल में प्राप्त करते हैं। इसमें सामाजिक मानदंड, मूल्य, अपेक्षाएं और व्यवहार के तरीके शामिल हो सकते हैं जो सीधे पढ़ाए नहीं जाते लेकिन स्कूल के माहौल, संरचना और शिक्षकों के व्यवहार के माध्यम से अवशोषित होते हैं (जैसे समय की पाबंदी, आज्ञाकारिता, पदानुक्रम का सम्मान)।


प्रश्न 14: गुणात्मक शोध (Qualitative Research) में डेटा संग्रह की एक सामान्य विधि कौन सी है?

  1. सर्वेक्षण (Surveys)।
  2. सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis)।
  3. गहन साक्षात्कार (In-depth Interviews) और प्रतिभागी अवलोकन (Participant Observation)।
  4. प्रायोगिक डिजाइन (Experimental Designs)।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

गुणात्मक शोध का उद्देश्य सामाजिक घटनाओं की गहरी समझ प्राप्त करना होता है। इसके लिए ‘गहन साक्षात्कार’ (In-depth Interviews), ‘प्रतिभागी अवलोकन’ (Participant Observation), फ़ोकस समूह (Focus Groups) और केस स्टडी (Case Studies) जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। ये विधियाँ समृद्ध, विस्तृत और प्रासंगिक डेटा प्रदान करती हैं जो संख्यात्मक डेटा से प्राप्त नहीं हो सकते। सर्वेक्षण और सांख्यिकीय विश्लेषण आमतौर पर मात्रात्मक शोध से संबंधित हैं।


प्रश्न 15: समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘नैतिकता’ (Ethics) का क्या महत्व है?

  1. यह सुनिश्चित करना कि शोधकर्ता अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करें।
  2. यह सुनिश्चित करना कि प्रतिभागियों को कोई शारीरिक या मनोवैज्ञानिक नुकसान न हो, उनकी गोपनीयता बनी रहे और सूचित सहमति प्राप्त की जाए।
  3. केवल शोधकर्ता के व्यक्तिगत मूल्यों का पालन करना।
  4. शोध परिणामों को सार्वजनिक करने से बचना।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

समाजशास्त्रीय अनुसंधान में नैतिकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के अधिकारों और भलाई की रक्षा करना है। इसमें ‘सूचित सहमति’ (Informed Consent) प्राप्त करना (जहां प्रतिभागियों को शोध के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है), ‘गोपनीयता’ (Confidentiality) और ‘गुमनामी’ (Anonymity) सुनिश्चित करना, और ‘नुकसान से बचाव’ (Protection from Harm) शामिल है। एक नैतिक शोधकर्ता यह सुनिश्चित करता है कि उसके शोध से किसी को भी कोई शारीरिक या मनोवैज्ञानिक क्षति न पहुँचे।


प्रश्न 16: भारत में जाति व्यवस्था की प्रमुख विशेषता कौन सी है?

  1. जातियों के बीच खुली सामाजिक गतिशीलता।
  2. जन्म आधारित सदस्यता और अंतर्विवाही समूह।
  3. व्यवसाय चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता।
  4. सामाजिक समानता।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

भारत में जाति व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता ‘जन्म आधारित सदस्यता’ (Ascribed Status by Birth) है, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति जिस जाति में जन्म लेता है, उसी का सदस्य रहता है। साथ ही, यह ‘अंतर्विवाही’ (Endogamous) समूह होते हैं, जहाँ विवाह आमतौर पर अपनी ही जाति के भीतर होता है। यह एक ‘पदानुक्रमित’ (Hierarchical) व्यवस्था है जो सामाजिक गतिशीलता को प्रतिबंधित करती है और समानता के विपरीत है।


प्रश्न 17: एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित ‘प्रभुत्वशाली जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा का क्या अर्थ है?

  1. एक जाति जो संख्यात्मक रूप से सबसे बड़ी हो।
  2. एक जाति जो आर्थिक और राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हो और संख्यात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण हो।
  3. एक जाति जो केवल अनुष्ठानिक रूप से श्रेष्ठ हो।
  4. एक जाति जो केवल आधुनिक शिक्षा में आगे हो।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

एम.एन. श्रीनिवास ने ‘प्रभुत्वशाली जाति’ (Dominant Caste) की अवधारणा को भारत के ग्रामीण समाज के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, एक जाति ‘प्रभुत्वशाली’ कहलाती है जब उसमें कई तत्वों का संयोजन होता है: संख्यात्मक शक्ति (demographic strength), आर्थिक शक्ति (जैसे भूमि का स्वामित्व), राजनीतिक शक्ति (स्थानीय नेतृत्व), और उच्च अनुष्ठानिक स्थिति। यह जाति गाँव के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है।


प्रश्न 18: भारत में जनजातीय समुदायों की पहचान की एक प्रमुख विशेषता क्या है?

  1. उच्च शहरीकरण स्तर।
  2. अलग-थलग भौगोलिक क्षेत्र और विशिष्ट संस्कृति।
  3. उच्च साक्षरता दर।
  4. मुख्यधारा के समाज के साथ पूर्ण एकीकरण।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

भारत में जनजातीय समुदायों (Tribal Communities) की पहचान आमतौर पर उनके ‘अलग-थलग भौगोलिक क्षेत्रों’ (Isolated Geographical Areas), ‘विशिष्ट संस्कृति’ (Distinct Culture), अपनी भाषाओं और सामाजिक संगठन के अनूठे रूपों से होती है। वे अक्सर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखते हैं, हालाँकि आधुनिकीकरण और विकास के कारण उनमें परिवर्तन आ रहे हैं। अन्य विकल्प उनकी पारंपरिक विशेषताओं के विपरीत हैं।


प्रश्न 19: ग्रामीण और शहरी समाजशास्त्र (Rural and Urban Sociology) के अध्ययन में ‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा क्या दर्शाती है?

  1. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्पष्ट विभाजन।
  2. ग्रामीण और शहरी विशेषताओं का एक सतत फैलाव, जिसमें कोई स्पष्ट सीमा नहीं होती।
  3. केवल ग्रामीण क्षेत्रों का विकास।
  4. केवल शहरी क्षेत्रों का विकास।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘ग्रामीण-शहरी सातत्य’ (Rural-Urban Continuum) की अवधारणा यह मानती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र पूर्णतः अलग-अलग इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि विशेषताओं का एक सतत स्पेक्ट्रम बनाते हैं। एक छोर पर पूरी तरह से ग्रामीण विशेषताएं होती हैं और दूसरे पर पूरी तरह से शहरी, जिनके बीच में विभिन्न संक्रमणकालीन क्षेत्र होते हैं जहाँ दोनों प्रकार की विशेषताओं का मिश्रण पाया जाता है। यह सीमांकित विभाजन के बजाय एक क्रमिक परिवर्तन को दर्शाता है।


प्रश्न 20: डिजिटल युग में ‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ (Digital Caste System) की अवधारणा क्या संदर्भित करती है?

  1. पारंपरिक जाति व्यवस्था का अंत।
  2. इंटरनेट एक्सेस और डिजिटल साक्षरता के आधार पर नई सामाजिक असमानताएँ और स्तरीकरण।
  3. केवल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का उपयोग।
  4. डिजिटल उपकरणों के निर्माण में शामिल जातियों का अध्ययन।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘डिजिटल जाति व्यवस्था’ एक समकालीन सामाजिक अवधारणा है जो यह दर्शाती है कि कैसे डिजिटल तकनीक, इंटरनेट एक्सेस और डिजिटल साक्षरता तक पहुँच में असमानताएँ समाज में नई प्रकार की सामाजिक असमानताएँ और स्तरीकरण पैदा कर रही हैं। जिनके पास इन संसाधनों तक पहुँच है, वे अधिक लाभान्वित होते हैं, जबकि जो वंचित हैं वे और हाशिये पर चले जाते हैं, जिससे एक ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) उत्पन्न होता है जो पारंपरिक सामाजिक विभाजनों को प्रतिबिंबित और मजबूत कर सकता है या नए विभाजन बना सकता है।


प्रश्न 21: समाजशास्त्र में ‘भावनाओं का समाजशास्त्र’ (Sociology of Emotions) क्या अध्ययन करता है?

  1. केवल व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक अनुभव।
  2. भावनाओं की जैविक उत्पत्ति।
  3. भावनाओं का सामाजिक निर्माण, अभिव्यक्ति, विनियमन और समाज पर उनका प्रभाव।
  4. भावनाओं का चिकित्सा उपचार।

सही उत्तर: C

विस्तृत व्याख्या:

‘भावनाओं का समाजशास्त्र’ (Sociology of Emotions) इस बात पर केंद्रित है कि भावनाएँ कैसे सामाजिक रूप से निर्मित होती हैं, व्यक्त की जाती हैं, विनियमित होती हैं और समाज पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है। यह मानता है कि भावनाएँ केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं हैं, बल्कि सामाजिक संपर्क, सांस्कृतिक मानदंड और शक्ति संरचनाओं से गहराई से प्रभावित होती हैं। यह सामाजिक संदर्भ में भावनाओं के कार्यों और परिणामों का विश्लेषण करता है।


प्रश्न 22: सार्वजनिक नीतियों (Public Policies) का स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन समाजशास्त्र के किस उपक्षेत्र से संबंधित है?

  1. राजनीतिक समाजशास्त्र।
  2. चिकित्सा समाजशास्त्र।
  3. आर्थिक समाजशास्त्र।
  4. पर्यावरण समाजशास्त्र।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘चिकित्सा समाजशास्त्र’ (Sociology of Medicine/Health) वह उपक्षेत्र है जो स्वास्थ्य, बीमारी, स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा प्रथाओं के सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करता है। इसमें सार्वजनिक नीतियों (जैसे स्वास्थ्य बीमा, स्वच्छता कार्यक्रम) का जनसंख्या के स्वास्थ्य परिणामों, स्वास्थ्य असमानताओं और स्वास्थ्य प्रणालियों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना शामिल है। यह समाज और स्वास्थ्य के बीच के जटिल संबंधों को समझने का प्रयास करता है।


प्रश्न 23: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उदय के साथ, समाजशास्त्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण विचारणीय विषय क्या है?

  1. AI द्वारा समाजशास्त्रियों के प्रतिस्थापन की संभावना।
  2. AI का सामाजिक असमानताओं, श्रम बाजार और मानवीय बातचीत पर प्रभाव।
  3. AI के तकनीकी विकास की गति।
  4. AI का उपयोग केवल इंजीनियरिंग क्षेत्रों में।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उदय ने समाजशास्त्रियों के लिए कई महत्वपूर्ण विचारणीय विषय प्रस्तुत किए हैं। इनमें AI का ‘सामाजिक असमानताओं’ (Social Inequalities) पर पड़ने वाला प्रभाव (जैसे डेटा पक्षपात), ‘श्रम बाजार’ (Labor Market) में परिवर्तन (नौकरियों का स्वचालन), ‘मानवीय बातचीत’ (Human Interaction) और संबंध, नैतिक निहितार्थ और निगरानी समाज का निर्माण शामिल है। समाजशास्त्री AI को केवल एक तकनीकी घटना के बजाय एक सामाजिक-तकनीकी घटना के रूप में देखते हैं जिसके दूरगामी सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।


प्रश्न 24: डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (Digital Platforms) और उनके माध्यम से होने वाले सामाजिक अंतःक्रियाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन किस क्षेत्र में आता है?

  1. पारंपरिक मीडिया अध्ययन।
  2. डिजिटल समाजशास्त्र (Digital Sociology)।
  3. संचार इंजीनियरिंग।
  4. अर्थमिति (Econometrics)।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

‘डिजिटल समाजशास्त्र’ (Digital Sociology) समाजशास्त्र का एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो डिजिटल मीडिया, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ उनके सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करता है। यह ऑनलाइन समुदायों, साइबर-संस्कृति, डिजिटल पहचान, गोपनीयता के मुद्दों और डिजिटल साधनों से होने वाली सामाजिक असमानताओं जैसे विषयों पर केंद्रित है। पारंपरिक मीडिया अध्ययन व्यापक हो सकता है, लेकिन डिजिटल समाजशास्त्र विशेष रूप से डिजिटल पहलुओं पर केंद्रित है।


प्रश्न 25: वैश्वीकरण (Globalization) का भारतीय समाज पर एक प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव क्या है?

  1. पारंपरिक रीति-रिवाजों का पूर्ण उन्मूलन।
  2. उपभोक्तावाद का उदय और पश्चिमी जीवन शैली का प्रभाव।
  3. केवल आर्थिक विकास।
  4. स्थानीय पहचान का सुदृढ़ीकरण।

सही उत्तर: B

विस्तृत व्याख्या:

वैश्वीकरण का भारतीय समाज पर गहरा सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव पड़ा है। इसके प्रमुख प्रभावों में से एक ‘उपभोक्तावाद’ (Consumerism) का उदय और ‘पश्चिमी जीवन शैली’ (Western Lifestyle) के मूल्यों और व्यवहारों का बढ़ता प्रभाव है। जबकि कुछ स्थानीय पहचानें सुदृढ़ हुई हैं, वैश्वीकरण ने वैश्विक सांस्कृतिक मिश्रण और कुछ हद तक पारंपरिक जीवन शैली में परिवर्तनों को भी बढ़ावा दिया है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसके बहुआयामी परिणाम हैं।


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