दैनिक समाजशास्त्र क्विज़: अपनी अकादमिक दक्षता का परीक्षण करें
समाजशास्त्र के जटिल संसार में गोता लगाने के लिए तैयार हैं? यह दैनिक अभ्यास सेट आपके लिए है – चाहे आप UGC-NET, UPSC, या किसी अन्य राज्य PSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हों। हमने विशेष रूप से 25 चुनौतीपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न तैयार किए हैं जो आपकी वैचारिक स्पष्टता, विश्लेषणात्मक कौशल और समाजशास्त्रीय सोच को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न के बाद विस्तृत व्याख्या आपके ज्ञान को और भी समृद्ध करेगी। तो, इस बौद्धिक चुनौती को स्वीकार करें और देखें कि आप कहां खड़े हैं!
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किस समाजशास्त्री ने ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Fact) की अवधारणा प्रस्तुत की?
- एमिल दुर्खीम
- मैक्स वेबर
- कार्ल मार्क्स
- टैल्कॉट पार्सन्स
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्य’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसे उन्होंने अपनी पुस्तक “द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड” में परिभाषित किया। उनके अनुसार, सामाजिक तथ्य व्यवहार के वे तरीके हैं जो व्यक्ति के बाहर मौजूद होते हैं और उस पर बाध्यकारी शक्ति रखते हैं। ये सामूहिक चेतना और सामूहिक प्रतिनिधित्व का हिस्सा होते हैं। अन्य विकल्प (वेबर, मार्क्स, पार्सन्स) ने समाजशास्त्र में अन्य महत्वपूर्ण अवधारणाएँ दीं, जैसे वेबर की सामाजिक क्रिया, मार्क्स का अलगाव और पार्सन्स का क्रिया सिद्धांत, लेकिन ‘सामाजिक तथ्य’ दुर्खीम से जुड़ा है।
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‘प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
- कार्ल मार्क्स
- मैक्स वेबर
- जॉर्ज सिमेल
- फर्डिनेंड टॉनीज़
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर इस प्रसिद्ध कार्य के लेखक हैं। इस पुस्तक में, वेबर ने तर्क दिया कि प्रोटेस्टेंट धर्म, विशेष रूप से केल्विनवाद, ने पूंजीवाद के विकास के लिए एक अनुकूल नैतिक और सांस्कृतिक वातावरण प्रदान किया। उन्होंने ‘तर्कसंगतता’ (rationalization) की प्रक्रिया पर जोर दिया, जिसे वह पश्चिमी समाजों की प्रमुख विशेषता मानते थे। मार्क्स ने पूंजीवाद का विश्लेषण किया, लेकिन इसे आर्थिक संरचनाओं से जोड़ा; सिमेल ने औपचारिक समाजशास्त्र पर ध्यान केंद्रित किया; और टॉनीज़ ने गेमेंशाफ्ट और गेसेलशाफ्ट की अवधारणाएँ दीं।
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‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा मुख्य रूप से किस विचारक से संबंधित है?
- एमिल दुर्खीम
- कार्ल मार्क्स
- मैक्स वेबर
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी समाज में ‘अलगाव’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने चार प्रकार के अलगाव की बात की: उत्पाद से अलगाव, उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव, प्रजाति-सार (species-being) से अलगाव, और अन्य मनुष्यों से अलगाव। दुर्खीम ने ‘एनोमी’ (anomie) की अवधारणा दी, वेबर ने ‘तर्कसंगतता’ पर जोर दिया, और मीड ने ‘स्व’ (self) के सामाजिक निर्माण पर काम किया।
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सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) की अवधारणा के संदर्भ में, एक व्यक्ति का अपने माता-पिता की तुलना में भिन्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति प्राप्त करना क्या कहलाता है?
- क्षैतिज गतिशीलता (Horizontal Mobility)
- अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intergenerational Mobility)
- अंतरा-पीढ़ीगत गतिशीलता (Intragenerational Mobility)
- संरचनात्मक गतिशीलता (Structural Mobility)
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
‘अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता’ तब होती है जब एक व्यक्ति अपने जन्म परिवार (माता-पिता) की सामाजिक स्थिति से भिन्न सामाजिक स्थिति प्राप्त करता है। यह ऊपर या नीचे की ओर हो सकती है। ‘अंतरा-पीढ़ीगत गतिशीलता’ एक व्यक्ति के अपने जीवनकाल में होने वाले सामाजिक स्थिति में बदलाव को संदर्भित करती है। ‘क्षैतिज गतिशीलता’ सामाजिक स्थिति में बदलाव के बिना एक ही स्तर पर व्यवसाय बदलने को कहते हैं, और ‘संरचनात्मक गतिशीलता’ बड़े पैमाने पर सामाजिक संरचना में परिवर्तनों के कारण होती है।
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समाजशास्त्र में, ‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा किससे संबंधित है?
- आर.के. मर्टन
- जी.एच. मीड
- एच. ब्लूमर
- सी.एच. कूले
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट के. मर्टन ने ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया, यह उस समूह को संदर्भित करता है जिसका उपयोग व्यक्ति अपने व्यवहार, दृष्टिकोण और मूल्यों को आकार देने और मूल्यांकन करने के लिए करता है। संदर्भ समूह आवश्यक रूप से वह समूह नहीं होता जिससे व्यक्ति संबंधित होता है, बल्कि वह समूह होता है जिससे वे संबंधित होना चाहते हैं या जिसके मानदंड वे अपनाते हैं। मीड ने ‘सामान्यीकृत अन्य’ (generalized other) की अवधारणा दी, ब्लूमर प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद से जुड़े हैं, और कूले ने ‘लुकिंग-ग्लास सेल्फ’ की अवधारणा दी।
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निम्नलिखित में से कौन सा दृष्टिकोण यह मानता है कि समाज के सभी भाग एक प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं और संतुलन बनाए रखते हैं?
- संघर्ष परिप्रेक्ष्य (Conflict Perspective)
- प्रकार्यवादी परिप्रेक्ष्य (Functionalist Perspective)
- प्रतीकात्मक अंतःक्रियावादी परिप्रेक्ष्य (Symbolic Interactionist Perspective)
- फेमिनिस्ट परिप्रेक्ष्य (Feminist Perspective)
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
प्रकार्यवादी परिप्रेक्ष्य, दुर्खीम और पार्सन्स जैसे विचारकों से जुड़ा है, यह मानता है कि समाज के सभी भाग (जैसे परिवार, शिक्षा, धर्म, अर्थव्यवस्था) अंतर्संबंधित होते हैं और समाज की स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए विशिष्ट कार्य करते हैं। संघर्ष परिप्रेक्ष्य सामाजिक असमानता और शक्ति संघर्ष पर जोर देता है। प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद सूक्ष्म-स्तरीय अंतःक्रियाओं और अर्थों पर केंद्रित है, और फेमिनिस्ट परिप्रेक्ष्य लिंग असमानता और पितृसत्ता पर प्रकाश डालता है।
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‘जाति व्यवस्था’ (Caste System) के अध्ययन में निम्नलिखित में से किस भारतीय समाजशास्त्री का योगदान उल्लेखनीय है?
- एम.एन. श्रीनिवास
- ए.आर. देसाई
- डी.पी. मुखर्जी
- योगेंद्र सिंह
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या:
एम.एन. श्रीनिवास को भारतीय समाज, विशेष रूप से जाति और ग्रामीण समाज के अध्ययन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization), ‘पश्चिमीकरण’ (Westernization), और ‘प्रमुख जाति’ (Dominant Caste) जैसी अवधारणाएं दीं, जो जाति व्यवस्था की गतिशीलता को समझने में महत्वपूर्ण हैं। ए.आर. देसाई ने मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य से भारतीय राष्ट्रवाद का विश्लेषण किया; डी.पी. मुखर्जी ने भारतीय परंपराओं और आधुनिकीकरण पर जोर दिया; और योगेंद्र सिंह ने भारतीय समाज के आधुनिकीकरण और सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन किया।
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भारत में ‘जजमानी व्यवस्था’ (Jajmani System) क्या थी?
- एक भूमि कार्यकाल प्रणाली
- ग्रामीण भारत में वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान
- एक शहरी व्यापार नेटवर्क
- एक राजनीतिक शासन प्रणाली
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
जजमानी व्यवस्था ग्रामीण भारत में एक पारंपरिक आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था थी जिसमें विभिन्न जाति समूहों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान होता था। इसमें एक ‘जजमान’ (उच्च जाति का भूस्वामी) और विभिन्न ‘कमीन्स’ (सेवाएँ प्रदान करने वाली निचली जातियाँ) शामिल होते थे। यह व्यवस्था वंशानुगत संबंधों और जाति-आधारित श्रम विभाजन पर आधारित थी। यह मौद्रिक विनिमय के बजाय सेवा-उन्मुख था।
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मैक्स वेबर द्वारा दी गई ‘सत्ता’ (Authority) की अवधारणा के कितने प्रकार हैं?
- दो
- तीन
- चार
- पांच
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने सत्ता (जिसे वह वैध प्रभुत्व भी कहते हैं) के तीन शुद्ध प्रकारों की पहचान की:
- पारंपरिक सत्ता (Traditional Authority): यह परंपराओं और स्थापित रीति-रिवाजों पर आधारित होती है।
- करिश्माई सत्ता (Charismatic Authority): यह नेता के असाधारण व्यक्तिगत गुणों पर आधारित होती है।
- तर्कसंगत-कानूनी सत्ता (Rational-Legal Authority): यह नियमों, कानूनों और प्रक्रियाओं पर आधारित होती है, जो आधुनिक नौकरशाही की विशेषता है।
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‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) का मुख्य सिद्धांत किससे जुड़ा है?
- संरचनात्मक कार्यवाद
- संघर्ष सिद्धांत
- सामाजिक व्यवहार में अर्थ का महत्व
- सामाजिक व्यवस्था का रखरखाव
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद, हर्बर्ट ब्लूमर और जी.एच. मीड जैसे विचारकों से जुड़ा है, यह इस विचार पर केंद्रित है कि लोग वस्तुओं और घटनाओं के लिए उनके अर्थ के आधार पर कार्य करते हैं, और ये अर्थ सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से उत्पन्न होते हैं। यह सूक्ष्म-स्तरीय सामाजिक व्यवहार और व्यक्तियों के बीच प्रतीकों और भाषा के माध्यम से अर्थ के निर्माण पर जोर देता है। यह परिप्रेक्ष्य सामाजिक व्यवहार में अर्थ के महत्व को रेखांकित करता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा सामाजिक अनुसंधान में गुणात्मक विधि (Qualitative Method) का एक उदाहरण है?
- सर्वेक्षण
- सांख्यिकीय विश्लेषण
- जाति-वर्णनात्मक अध्ययन (Ethnography)
- प्रायोगिक डिजाइन
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
जाति-वर्णनात्मक अध्ययन (Ethnography) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसमें शोधकर्ता किसी समूह या संस्कृति का गहन अध्ययन करने के लिए लंबे समय तक उनके साथ रहता है और उनके जीवन में भाग लेता है। सर्वेक्षण, सांख्यिकीय विश्लेषण और प्रायोगिक डिजाइन मुख्य रूप से मात्रात्मक अनुसंधान विधियाँ हैं जो संख्यात्मक डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
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‘समाजीकरण’ (Socialization) की प्रक्रिया क्या है?
- व्यक्ति द्वारा जैविक विशेषताओं का अधिग्रहण
- एक समूह द्वारा भौतिक संसाधनों का अधिग्रहण
- व्यक्ति द्वारा सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और कौशलों को सीखना
- एक समाज में राजनीतिक शक्ति का वितरण
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने समाज के मानदंडों, मूल्यों, विश्वासों और कौशलों को सीखते हैं और आंतरिक बनाते हैं, जिससे वे समाज के प्रभावी सदस्य बन पाते हैं। यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें परिवार, स्कूल, सहकर्मी समूह और मीडिया जैसे विभिन्न अभिकर्ता शामिल होते हैं। अन्य विकल्प जैविक, भौतिक या राजनीतिक पहलुओं से संबंधित हैं, न कि सामाजिक शिक्षा प्रक्रिया से।
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‘एनोमी’ (Anomie) की अवधारणा किसने विकसित की, जो मानदंडों की कमी या नैतिक भ्रम की स्थिति को संदर्भित करती है?
- कार्ल मार्क्स
- मैक्स वेबर
- एमिल दुर्खीम
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने अपनी पुस्तक “आत्महत्या” (Suicide) में ‘एनोमी’ की अवधारणा का वर्णन किया। एनोमी एक ऐसी स्थिति है जहाँ सामाजिक मानदंड कमजोर या अनुपस्थित हो जाते हैं, जिससे व्यक्तियों में उद्देश्यहीनता, भ्रम और सामाजिक विघटन की भावना पैदा होती है। दुर्खीम ने इसे आधुनिक औद्योगिक समाजों की एक समस्या के रूप में देखा। मार्क्स ने अलगाव पर ध्यान केंद्रित किया, वेबर ने तर्कसंगतता पर, और मीड ने ‘स्व’ के विकास पर।
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संरचनात्मक कार्यवाद में, ‘स्पष्ट कार्य’ (Manifest Function) और ‘अस्पष्ट कार्य’ (Latent Function) की अवधारणाएँ किससे संबंधित हैं?
- टैल्कॉट पार्सन्स
- रॉबर्ट के. मर्टन
- एमिल दुर्खीम
- अल्फ्रेड शुट्ज़
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट के. मर्टन ने समाजशास्त्रीय विश्लेषण में ‘स्पष्ट कार्य’ और ‘अस्पष्ट कार्य’ के बीच अंतर किया। स्पष्ट कार्य वे कार्य होते हैं जो किसी सामाजिक पैटर्न के जानबूझकर और मान्यता प्राप्त परिणाम होते हैं। अस्पष्ट कार्य वे कार्य होते हैं जो अनजाने और अनजाने परिणाम होते हैं लेकिन फिर भी समाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पार्सन्स संरचनात्मक कार्यवाद के एक अन्य प्रमुख प्रस्तावक थे, लेकिन यह विशिष्ट अवधारणा मर्टन द्वारा विकसित की गई थी। दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों और एनोमी पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि शुट्ज़ ने घटना-क्रिया विज्ञान पर।
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‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा, जो भारतीय समाज में निचली जातियों द्वारा उच्च जातियों के रीति-रिवाजों और जीवन शैली को अपनाने की प्रक्रिया का वर्णन करती है, किसके द्वारा गढ़ी गई?
- जी.एस. घुर्ये
- एम.एन. श्रीनिवास
- इरावती कर्वे
- आंद्रे बेतेई
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें एक ‘निम्न’ जाति या जनजाति या अन्य समूह किसी ‘उच्च’ और अक्सर ‘द्विज’ जाति के रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, विचारधारा और जीवन शैली को अपनाकर अपनी स्थिति को ऊपर उठाने का प्रयास करता है। घुर्ये ने जाति पर प्रारंभिक कार्य किया, कर्वे ने नातेदारी पर, और बेतेई ने असमानता के विभिन्न पहलुओं पर लिखा।
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किसने तर्क दिया कि पूंजीवाद का सार ‘अतिरिक्त मूल्य’ (Surplus Value) के उत्पादन में निहित है, जो श्रमिकों के शोषण से उत्पन्न होता है?
- मैक्स वेबर
- एमिल दुर्खीम
- कार्ल मार्क्स
- एडम स्मिथ
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
कार्ल मार्क्स ने अपने विश्लेषण में ‘अतिरिक्त मूल्य’ की अवधारणा को केंद्रीय माना। उनके अनुसार, पूंजीपति श्रमिकों को उनके द्वारा उत्पादित मूल्य से कम भुगतान करते हैं, और यह अंतर ‘अतिरिक्त मूल्य’ का गठन करता है, जो पूंजीपतियों के लाभ का स्रोत है और पूंजीवादी शोषण का आधार है। वेबर ने धर्म और पूंजीवाद पर ध्यान केंद्रित किया, दुर्खीम ने सामाजिक एकता पर, और एडम स्मिथ पूंजीवाद के एक अर्थशास्त्री और समर्थक थे।
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निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता ग्रामीण समुदाय की नहीं है?
- कृषि मुख्य व्यवसाय है
- घनिष्ठ संबंध और प्राथमिक समूह की प्रधानता
- सामाजिक गतिशीलता की उच्च दर
- परंपराओं का पालन
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
ग्रामीण समुदायों की विशेषताएँ आमतौर पर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, घनिष्ठ सामाजिक संबंध (प्राथमिक समूह), परंपरावाद और सामाजिक गतिशीलता की अपेक्षाकृत कम दर होती हैं। शहरी समुदायों में सामाजिक गतिशीलता की उच्च दर देखी जाती है, जहाँ व्यक्ति अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बदलने के अधिक अवसर पाते हैं।
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किसने कहा कि धर्म समाज का दर्पण है और इसे ‘सामूहिक चेतना’ (Collective Consciousness) का एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति माना?
- मैक्स वेबर
- कार्ल मार्क्स
- एमिल दुर्खीम
- सी.एच. कूले
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
एमिल दुर्खीम ने धर्म को समाज की सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति माना। उनकी पुस्तक “द एलिमेंट्री फॉर्म्स ऑफ द रिलीजियस लाइफ” में, उन्होंने तर्क दिया कि धर्म समाज के पवित्र और अपवित्र के विभाजन और समाज की नैतिक व्यवस्था को दर्शाता है। धर्म व्यक्ति को समाज से जोड़ता है और सामाजिक एकता को मजबूत करता है। मार्क्स ने धर्म को “जनता की अफीम” कहा, वेबर ने तर्कसंगतता पर ध्यान केंद्रित किया, और कूले ने ‘लुकिंग-ग्लास सेल्फ’ पर काम किया।
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अमेरिकी भारतीय/अलास्का मूल निवासियों के लिए आरक्षण के अंदर और आसपास घातक पुलिस हिंसा के बढ़े हुए जोखिम पर हालिया शोध किस सामाजिक समस्या को उजागर करता है?
- शहरीकरण के मुद्दे
- जाति-आधारित भेदभाव
- संरचनात्मक हिंसा और जातीय-नस्लीय असमानता
- केवल आर्थिक असमानता
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
हालिया शोध जो अमेरिकी भारतीय/अलास्का मूल निवासियों के लिए आरक्षण के अंदर और आसपास घातक पुलिस हिंसा के बढ़े हुए जोखिम को उजागर करता है, यह व्यापक संरचनात्मक हिंसा और जातीय-नस्लीय असमानता का संकेत है। यह केवल आर्थिक असमानता तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी प्रणालियों में गहरी बैठी असमानताओं और संस्थागत भेदभाव को दर्शाता है जो कुछ समूहों को दूसरों की तुलना में पुलिस हिंसा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। यह समकालीन सामाजिक समस्याओं का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणा, जो समाजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, किसने दी?
- जी.एच. मीड
- ई. गोफमैन
- चार्ल्स एच. कूले
- अल्फ्रेड शुट्ज़
सही उत्तर: A
विस्तृत व्याख्या:
जॉर्ज हर्बर्ट मीड ने ‘सामान्यीकृत अन्य’ की अवधारणा प्रस्तुत की। यह वह दृष्टिकोण है जिसे व्यक्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति के बजाय पूरे समुदाय या समाज से अपनाता है। यह अवधारणा हमें सामाजिक मानदंडों, अपेक्षाओं और मूल्यों को समझने और अपने व्यवहार को तदनुसार समायोजित करने में मदद करती है, जिससे ‘स्व’ (Self) का विकास होता है। गोफमैन ने नाट्यशास्त्र (dramaturgy) पर काम किया, कूले ने ‘लुकिंग-ग्लास सेल्फ’ पर, और शुट्ज़ ने घटना-क्रिया विज्ञान पर।
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आय असमानता, विश्व व्यवस्था और राजनीतिक धर्मनिरपेक्षीकरण (Political Secularization) जैसे समकालीन शोध विषय किस अवधारणा से निकटता से जुड़े हैं?
- प्रकार्यवादी एकीकरण
- वैश्विक पूंजीवाद और सामाजिक परिवर्तन
- सांस्कृतिक प्रसार
- पारंपरिक सामंजस्य
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
आय असमानता, विश्व व्यवस्था और राजनीतिक धर्मनिरपेक्षीकरण जैसे विषय वैश्विक पूंजीवाद और उससे जुड़े सामाजिक परिवर्तनों से गहराई से जुड़े हुए हैं। वैश्वीकरण और पूंजीवादी विस्तार अक्सर आय असमानता को बढ़ाते हैं, जबकि राजनीतिक धर्मनिरपेक्षीकरण आधुनिक राज्य की विशेषताओं में से एक है जो धर्म और राज्य के बीच संबंधों को पुनः परिभाषित करता है। ये सभी बड़े पैमाने पर सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक प्रणालियों के परस्पर क्रिया को दर्शाते हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा परिवार का एक प्राथमिक कार्य है?
- धार्मिक शिक्षा प्रदान करना
- आर्थिक वस्तुओं का उत्पादन करना
- बच्चों का समाजीकरण
- राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करना
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
बच्चों का समाजीकरण परिवार के प्राथमिक और सार्वभौमिक कार्यों में से एक है। परिवार बच्चों को सामाजिक मानदंड, मूल्य, भाषा और व्यवहार सिखाता है, जिससे वे समाज के कार्यात्मक सदस्य बन सकें। यद्यपि कुछ परिवार आर्थिक उत्पादन में संलग्न हो सकते हैं या धार्मिक शिक्षा प्रदान कर सकते हैं, बच्चों का समाजीकरण सभी प्रकार के परिवारों में एक केंद्रीय कार्य है। राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करना राज्य या अन्य राजनीतिक संस्थाओं का कार्य है।
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मैक्स वेबर के अनुसार, नौकरशाही (Bureaucracy) निम्नलिखित में से किस प्रकार की सत्ता पर आधारित है?
- करिश्माई सत्ता
- पारंपरिक सत्ता
- तर्कसंगत-कानूनी सत्ता
- शक्ति सत्ता
सही उत्तर: C
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने नौकरशाही को तर्कसंगत-कानूनी सत्ता का शुद्धतम प्रकार माना। नौकरशाही नियमों, विनियमों, पदानुक्रम और निष्पक्षता पर आधारित होती है, जिसमें अधिकार व्यक्तिगत गुणों या परंपराओं के बजाय पद और नियमों से प्राप्त होता है। यह आधुनिक समाजों की एक प्रमुख विशेषता है। करिश्माई और पारंपरिक सत्ता के अन्य रूप हैं, लेकिन नौकरशाही की पहचान तर्कसंगत-कानूनी आधार से होती है।
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‘अभिनव विचलन’ (Deviance Innovation) की अवधारणा, जो सामाजिक मानदंडों को प्राप्त करने के लिए अवैध साधनों के उपयोग को संदर्भित करती है, किससे जुड़ी है?
- एमिल दुर्खीम
- रॉबर्ट के. मर्टन
- एना सोरोकिन
- एडविन सदरलैंड
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट के. मर्टन ने अपनी ‘एनोमी सिद्धांत’ (Strain Theory) के तहत विचलन के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया, जिसमें ‘अभिनव विचलन’ (Innovation) भी शामिल है। अभिनव विचलन तब होता है जब व्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित सांस्कृतिक लक्ष्यों (जैसे धन) को स्वीकार करते हैं लेकिन उन्हें प्राप्त करने के लिए समाज द्वारा अनुमोदित वैध साधनों (जैसे कड़ी मेहनत) को अस्वीकार करते हुए अवैध साधनों (जैसे चोरी, धोखाधड़ी) का उपयोग करते हैं। दुर्खीम ने एनोमी को सामाजिक विघटन के रूप में देखा, सदरलैंड ने श्वेतपोश अपराध पर काम किया, और सोरोकिन सामाजिक गतिशीलता पर काम किया।
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प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्टों में नास्तिकों के प्रति राज्य के व्यवहार या राजनीतिक धर्मनिरपेक्षीकरण जैसे विषयों पर शोध क्या दर्शाता है?
- केवल आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना
- राजनीति और धर्म के बीच बदलते संबंधों का अध्ययन
- केवल धार्मिक कट्टरता का विश्लेषण
- सांस्कृतिक एकरूपता का बढ़ावा
सही उत्तर: B
विस्तृत व्याख्या:
नास्तिकों के प्रति राज्य के व्यवहार या राजनीतिक धर्मनिरपेक्षीकरण जैसे विषयों पर शोध राजनीति और धर्म के बीच बदलते संबंधों का अध्ययन दर्शाता है। यह दिखाता है कि कैसे राज्य और इसकी संस्थाएं धार्मिक या गैर-धार्मिक आबादी के साथ व्यवहार करती हैं, और कैसे धर्म का प्रभाव सार्वजनिक क्षेत्र में कम हो रहा है या बदल रहा है। यह सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पहलू है जो वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण से प्रभावित होता है, जैसा कि हाल के शोधों में भी उजागर हुआ है।
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