दैनिक समाजशास्त्र क्विज़: अपनी अवधारणात्मक पकड़ को मज़बूत करें
समाजशास्त्र के अभ्यर्थियों के लिए, प्रत्येक दिन एक नई चुनौती लेकर आता है। आज, ‘The Sociology Scholar’ आपके लिए लाया है 25 अत्यंत महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का यह विशेष सेट, जिसे प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UGC-NET, UPSC, और State PSCs की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह क्विज़ न केवल आपकी वैचारिक स्पष्टता को परखेगा, बल्कि आपको समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और सिद्धांतों की गहरी समझ विकसित करने में भी मदद करेगा। तो, तैयार हो जाइए इस बौद्धिक यात्रा के लिए और देखिए कि आप कितने प्रश्नों का सही उत्तर दे पाते हैं!
समाजशास्त्र अभ्यास सेट – 1
1. प्रश्न: ‘सकारात्मक समाजशास्त्र’ (Positivist Sociology) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?
- एमिल दुर्खीम
- मैक्स वेबर
- अगस्ट कॉम्ते
- कार्ल मार्क्स
सही उत्तर: c
विस्तृत व्याख्या:
अगस्ट कॉम्ते को समाजशास्त्र का जनक माना जाता है और उन्होंने ही ‘सकारात्मक समाजशास्त्र’ (Positivist Sociology) की अवधारणा प्रस्तुत की थी। उनका मानना था कि समाज का अध्ययन प्राकृतिक विज्ञानों के समान वैज्ञानिक विधियों से किया जा सकता है।
- अगस्ट कॉम्ते: ‘प्रत्यक्षवाद’ (Positivism) के संस्थापक, उनका मुख्य कार्य ‘कोर्स ऑफ पॉज़िटिव फिलॉसफी’ (Course of Positive Philosophy) है।
- एमिल दुर्खीम: उन्होंने ‘सामाजिक तथ्य’ (Social Facts) के अध्ययन पर जोर दिया और समाजशास्त्र को एक विशिष्ट विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
- मैक्स वेबर: उन्होंने ‘व्याख्यात्मक समाजशास्त्र’ (Interpretive Sociology) का प्रस्ताव रखा और सामाजिक क्रिया (Social Action) के अध्ययन पर जोर दिया।
- कार्ल मार्क्स: उन्होंने वर्ग संघर्ष (Class Conflict) और पूंजीवाद (Capitalism) के आलोचनात्मक विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित किया।
2. प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा एमिल दुर्खीम से संबंधित नहीं है?
- एनोमी (Anomie)
- सामाजिक तथ्य (Social Fact)
- पवित्र और अपवित्र (Sacred and Profane)
- सामाजिक क्रिया (Social Action)
सही उत्तर: d
विस्तृत व्याख्या:
‘सामाजिक क्रिया’ (Social Action) की अवधारणा मुख्य रूप से मैक्स वेबर से संबंधित है। वेबर ने सामाजिक क्रिया को ऐसी क्रिया के रूप में परिभाषित किया जिसका कर्ता (actor) द्वारा लगाया गया व्यक्तिपरक अर्थ (subjective meaning) दूसरों के व्यवहार को ध्यान में रखता है और उसी के अनुसार उन्मुख होता है।
- एनोमी (Anomie): दुर्खीम की प्रसिद्ध अवधारणा, जो सामाजिक मानदंडों की अनुपस्थिति या अस्पष्टता को दर्शाती है, जिससे व्यक्तियों में दिशाहीनता और निराशा होती है।
- सामाजिक तथ्य (Social Fact): दुर्खीम ने समाजशास्त्र को सामाजिक तथ्यों के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया, जो बाहरी, बाध्यकारी और सामान्य होते हैं।
- पवित्र और अपवित्र (Sacred and Profane): दुर्खीम ने धर्म को पवित्र और अपवित्र के बीच अंतर के रूप में देखा, जैसा कि उनकी पुस्तक ‘द एलिमेंट्री फॉर्म्स ऑफ द रिलीजियस लाइफ’ (The Elementary Forms of the Religious Life) में वर्णित है।
3. प्रश्न: कार्ल मार्क्स के अनुसार, ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा के कितने प्रमुख आयाम हैं?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
सही उत्तर: c
विस्तृत व्याख्या:
कार्ल मार्क्स ने अपनी ‘इकोनॉमिक एंड फिलोसॉफिकल मैन्युस्क्रिप्ट्स ऑफ 1844’ (Economic and Philosophical Manuscripts of 1844) में पूंजीवादी व्यवस्था में श्रमिकों के ‘अलगाव’ (Alienation) के चार प्रमुख आयामों का वर्णन किया है:
- उत्पाद से अलगाव (Alienation from the product of one’s labor)
- उत्पादन की प्रक्रिया से अलगाव (Alienation from the process of production)
- प्रजाति-सार से अलगाव (Alienation from one’s species-being/human essence)
- अन्य मनुष्यों से अलगाव (Alienation from other human beings)
4. प्रश्न: ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना किसने की थी?
- ज्योतिबा फुले
- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
- महात्मा गांधी
- स्वामी विवेकानंद
सही उत्तर: a
विस्तृत व्याख्या:
‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना 1873 में महाराष्ट्र में ज्योतिबा फुले ने की थी। इस समाज का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अस्पृश्यों को शिक्षा का अधिकार दिलाना, जातिगत भेदभाव का विरोध करना और उनके सामाजिक उत्थान के लिए काम करना था।
- ज्योतिबा फुले: एक प्रमुख समाज सुधारक, जिन्होंने शिक्षा, जातिगत समानता और महिला अधिकारों के लिए काम किया। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका माना जाता है।
- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर: भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार, जिन्होंने दलितों के अधिकारों और जातिगत उन्मूलन के लिए आजीवन संघर्ष किया।
5. प्रश्न: मैक्स वेबर के अनुसार, सत्ता (Authority) के कितने आदर्श प्रकार (Ideal Types) हैं?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
मैक्स वेबर ने सत्ता (Authority) के तीन आदर्श प्रकारों की पहचान की:
- तर्कसंगत-कानूनी सत्ता (Rational-Legal Authority): नियमों और कानूनों पर आधारित, आधुनिक नौकरशाही में प्रचलित।
- परंपरागत सत्ता (Traditional Authority): रीति-रिवाजों और परंपराओं में निहित, राजशाही में देखी जाती है।
- करिश्माई सत्ता (Charismatic Authority): एक असाधारण नेता के व्यक्तिगत गुणों और प्रेरणा शक्ति पर आधारित।
6. प्रश्न: ‘प्रकार्यवादी परिप्रेक्ष्य’ (Functionalist Perspective) में, समाज को एक __________ के रूप में देखा जाता है?
- संघर्ष का क्षेत्र
- जीवित प्राणी
- भाषा प्रणाली
- अस्पष्ट अवधारणा
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
प्रकार्यवादी परिप्रेक्ष्य समाज को एक जीवित प्राणी (organic analogy) के रूप में देखता है, जिसके विभिन्न अंग (संस्थाएँ जैसे परिवार, शिक्षा, सरकार) होते हैं। ये सभी अंग एक साथ मिलकर समाज की स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं। एमिल दुर्खीम और हर्बर्ट स्पेंसर इस दृष्टिकोण के प्रमुख प्रस्तावक हैं।
- संघर्ष का क्षेत्र: यह संघर्ष परिप्रेक्ष्य (Conflict Perspective) का मुख्य विचार है (जैसे कार्ल मार्क्स)।
7. प्रश्न: ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा किसने दी?
- विलियम ओग्बर्न
- रॉबर्ट मर्टन
- सी. डब्ल्यू. मिल्स
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
सही उत्तर: a
विस्तृत व्याख्या:
विलियम ओग्बर्न ने ‘सांस्कृतिक विलंबना’ (Cultural Lag) की अवधारणा प्रस्तुत की। इसका अर्थ है कि भौतिक संस्कृति (जैसे प्रौद्योगिकी) में परिवर्तन अमूर्त संस्कृति (जैसे मानदंड, मूल्य, कानून) की तुलना में तेज़ी से होते हैं, जिससे समाज में असंतुलन या समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- रॉबर्ट मर्टन: ‘प्रकार्य’ (Function) और ‘अकार्य’ (Dysfunction), ‘प्रत्यक्ष’ (Manifest) और ‘अप्रकट’ (Latent) प्रकार्य जैसी अवधारणाओं के लिए जाने जाते हैं।
- सी. डब्ल्यू. मिल्स: ‘द सोशियोलॉजिकल इमेजिनेशन’ (The Sociological Imagination) के लिए प्रसिद्ध हैं।
8. प्रश्न: ‘अन्य महत्वपूर्ण’ (Significant Others) और ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणाएँ किस विचारक से संबंधित हैं?
- इरविन गॉफमैन
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- चार्ल्स कूली
- अल्फ्रेड शूट्ज
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
जॉर्ज हर्बर्ट मीड, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) के प्रमुख विचारक, ने ‘स्व’ (Self) के विकास की व्याख्या करने के लिए ‘अन्य महत्वपूर्ण’ (Significant Others) और ‘सामान्यीकृत अन्य’ (Generalized Other) की अवधारणाओं का उपयोग किया।
- अन्य महत्वपूर्ण: वे व्यक्ति जिनके साथ बच्चा सीधे बातचीत करता है और जिनसे वह अपने शुरुआती सामाजिकीकरण में सीखता है (जैसे माता-पिता)।
- सामान्यीकृत अन्य: समाज के सामान्यीकृत मूल्य, मानदंड और अपेक्षाएँ, जिन्हें व्यक्ति आंतरिकृत करता है और जो उसे समाज में अपनी भूमिका निभाने में मदद करती हैं।
9. प्रश्न: ‘अदृश्य हाथ’ (Invisible Hand) की अवधारणा का संबंध किससे है?
- कार्ल मार्क्स
- एडम स्मिथ
- एमिल दुर्खीम
- मैक्स वेबर
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
‘अदृश्य हाथ’ (Invisible Hand) की अवधारणा का प्रतिपादन अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने अपनी पुस्तक ‘द वेल्थ ऑफ नेशंस’ (The Wealth of Nations) में किया था। यह अवधारणा बताती है कि व्यक्तियों के स्व-हित वाले कार्य अनजाने में पूरे समाज के लिए आर्थिक लाभ उत्पन्न करते हैं, बिना किसी केंद्रीय योजना के। हालांकि यह मुख्य रूप से अर्थशास्त्र की अवधारणा है, यह बाजार-आधारित समाजों के संगठन और कार्यप्रणाली को समझने के लिए समाजशास्त्र में भी प्रासंगिक है।
10. प्रश्न: ‘जाति व्यवस्था’ (Caste System) की ‘शुद्धता और अशुद्धता’ (Purity and Pollution) के आधार पर व्याख्या किसने की?
- एम.एन. श्रीनिवास
- लुई ड्यूमोंट
- जी.एस. घुर्ये
- योगेंद्र सिंह
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
फ्रेंच समाजशास्त्री लुई ड्यूमोंट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘होमो हायरार्किकस: द कास्ट सिस्टम एंड इट्स इम्प्लिकेशंस’ (Homo Hierarchicus: The Caste System and its Implications) में भारतीय जाति व्यवस्था का विश्लेषण ‘शुद्धता और अशुद्धता’ के द्वैतवाद (dichotomy) के आधार पर किया। उनके अनुसार, यह द्वैतवाद जाति व्यवस्था के पदानुक्रम को समझने की कुंजी है।
- एम.एन. श्रीनिवास: ‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) और ‘पश्चिमीकरण’ (Westernization) की अवधारणाओं के लिए जाने जाते हैं।
- जी.एस. घुर्ये: भारतीय समाजशास्त्र के जनक माने जाते हैं, जिन्होंने जाति, जनजाति और धर्म पर महत्वपूर्ण कार्य किया।
11. प्रश्न: ‘संरचनात्मक प्रकार्यवाद’ (Structural Functionalism) के प्रमुख प्रतिपादकों में से एक कौन हैं?
- रॉबर्ट मर्टन
- जॉर्ज सिमेल
- अल्फ्रेड शुत्ज़
- पीटर बर्गर
सही उत्तर: a
विस्तृत व्याख्या:
रॉबर्ट मर्टन, टालकॉट पार्सन्स के साथ, संरचनात्मक प्रकार्यवाद के प्रमुख विचारकों में से एक हैं। उन्होंने प्रकार्यवादी विश्लेषण को परिष्कृत किया और ‘प्रत्यक्ष’ (Manifest) तथा ‘अप्रकट’ (Latेंट) प्रकार्यों और ‘अकार्य’ (Dysfunction) जैसी अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं।
- जॉर्ज सिमेल: फॉर्मल सोशियोलॉजी और माइक्रो-सोशियोलॉजी पर काम किया।
- अल्फ्रेड शुत्ज़: घटना विज्ञान (Phenomenology) से जुड़े थे।
12. प्रश्न: ‘प्रतिष्ठित स्थिति’ (Achieved Status) का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है?
- राजकुमारी होना
- अमीर परिवार में जन्म लेना
- कॉलेज डिग्री प्राप्त करना
- किसी विशेष जाति से संबंधित होना
सही उत्तर: c
विस्तृत व्याख्या:
‘प्रतिष्ठित स्थिति’ (Achieved Status) वह सामाजिक स्थिति है जिसे व्यक्ति अपने प्रयासों, कौशल और क्षमताओं के माध्यम से प्राप्त करता है (जैसे डॉक्टर, प्रोफेसर, कॉलेज ग्रेजुएट)। इसके विपरीत, ‘प्रदत्त स्थिति’ (Ascribed Status) वह स्थिति है जो व्यक्ति को जन्म से या विरासत में मिलती है (जैसे लिंग, जाति, नस्ल, शाही परिवार में जन्म)।
13. प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सा एक ‘गुणात्मक अनुसंधान विधि’ (Qualitative Research Method) का उदाहरण है?
- सर्वेक्षण अनुसंधान
- सांख्यिकीय विश्लेषण
- जातीय कार्यप्रणाली (Ethnomethodology)
- प्रायोगिक डिजाइन
सही उत्तर: c
विस्तृत व्याख्या:
‘जातीय कार्यप्रणाली’ (Ethnomethodology) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जो यह अध्ययन करती है कि लोग अपने रोजमर्रा के सामाजिक जीवन में कैसे अर्थ उत्पन्न करते हैं और व्यवस्था बनाए रखते हैं। हेरोल्ड गारफिन्केल इसके प्रमुख प्रणेता हैं।
- सर्वेक्षण अनुसंधान, सांख्यिकीय विश्लेषण और प्रायोगिक डिजाइन: ये सभी मुख्य रूप से मात्रात्मक अनुसंधान विधियों के उदाहरण हैं, जो संख्यात्मक डेटा और सांख्यिकीय तकनीकों पर जोर देते हैं।
14. प्रश्न: ‘घेट्टो’ (Ghetto) शब्द मुख्य रूप से किस सामाजिक संदर्भ में प्रयोग किया जाता है?
- ग्रामीण कृषि क्षेत्र
- आर्थिक रूप से समृद्ध उपनगरीय क्षेत्र
- जातीय या धार्मिक अल्पसंख्यक समूह द्वारा बसाया गया एक वंचित शहरी क्षेत्र
- पर्यटक स्थल
सही उत्तर: c
विस्तृत व्याख्या:
‘घेट्टो’ (Ghetto) एक शहरी क्षेत्र है जहां एक विशेष जातीय या धार्मिक समूह के सदस्य रहते हैं, अक्सर गरीबी, सामाजिक अलगाव और भेदभाव के कारण। यह शब्द ऐतिहासिक रूप से यहूदियों को अलग करने वाले क्षेत्रों से जुड़ा है, लेकिन अब इसे किसी भी वंचित शहरी पड़ोस के लिए उपयोग किया जाता है जो मुख्यधारा समाज से अलग हो गया है।
15. प्रश्न: ‘योग्यता तंत्र’ (Meritocracy) क्या है?
- एक समाज जहाँ सत्ता विरासत में मिलती है
- एक समाज जहाँ व्यक्ति की स्थिति उसकी जाति से निर्धारित होती है
- एक समाज जहाँ सामाजिक स्थिति व्यक्तिगत योग्यता और प्रयास से प्राप्त होती है
- एक समाज जहाँ केवल धनी लोग सफल होते हैं
सही उत्तर: c
विस्तृत व्याख्या:
‘योग्यता तंत्र’ (Meritocracy) एक सामाजिक प्रणाली है जहाँ व्यक्तियों की सामाजिक स्थिति और प्रगति उनकी व्यक्तिगत योग्यता, कौशल और प्रयासों (जैसे शिक्षा, क्षमता और कड़ी मेहनत) पर आधारित होती है, न कि जन्म, धन या सामाजिक पृष्ठभूमि पर।
16. प्रश्न: भारत में ‘संयुक्त परिवार’ (Joint Family) की विशेषता क्या है?
- केवल पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे
- एक ही छत के नीचे रहने वाले कई पीढ़ियों के सदस्य
- पारिवारिक निर्णय केवल सबसे युवा सदस्य द्वारा लिए जाते हैं
- महिला सदस्यों का परिवार पर पूर्ण नियंत्रण
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
भारत में संयुक्त परिवार की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें कई पीढ़ियों (जैसे दादा-दादी, माता-पिता, बच्चे और उनके अविवाहित भाई-बहन) के सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं, एक साझा रसोई का उपयोग करते हैं, और संपत्ति व संसाधनों में हिस्सेदारी रखते हैं। परिवार का मुखिया अक्सर सबसे बुजुर्ग पुरुष सदस्य होता है।
- केवल पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे: यह एक ‘नाभिक परिवार’ (Nuclear Family) की परिभाषा है।
17. प्रश्न: ‘संसूचनात्मक क्रिया’ (Communicative Action) की अवधारणा किसने विकसित की?
- मिशेल फूको
- जुर्गन हैबरमास
- जैक डेर्रीडा
- पियरे बोर्डियू
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
जुर्गन हैबरमास, फ्रैंकफर्ट स्कूल के एक प्रमुख विचारक, ने ‘संसूचनात्मक क्रिया’ (Communicative Action) की अवधारणा विकसित की। उनका मानना है कि तर्कसंगत समाज में व्यक्ति सामान्य समझ और सहमति तक पहुँचने के लिए संचार का उपयोग करते हैं, न कि केवल अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए।
- मिशेल फूको: शक्ति, ज्ञान और प्रवचन (discourse) पर अपने कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
- पियरे बोर्डियू: ‘हैबिटस’ (Habitus), ‘पूंजी के रूप’ (Forms of Capital) और ‘क्षेत्र’ (Field) जैसी अवधारणाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
18. प्रश्न: ‘स्रोतों के विश्वसनीय होने’ (Reliability of Sources) का क्या अर्थ है?
- डेटा एकत्र करने में कितना समय लगा
- क्या एक ही माप दोहराए जाने पर लगातार परिणाम देगा
- क्या माप वास्तव में वही माप रहा है जो उसे मापना चाहिए
- शोधकर्ता की व्यक्तिगत राय
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
अनुसंधान में ‘विश्वसनीयता’ (Reliability) से तात्पर्य है कि एक शोध विधि एक ही माप को दोहराए जाने पर लगातार और सुसंगत परिणाम उत्पन्न करती है। यदि कोई माप विश्वसनीय है, तो विभिन्न शोधकर्ता या एक ही शोधकर्ता अलग-अलग समय पर समान परिणाम प्राप्त करेंगे।
- क्या माप वास्तव में वही माप रहा है जो उसे मापना चाहिए: यह ‘वैधता’ (Validity) की अवधारणा है।
19. प्रश्न: ‘संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992’ (73rd Constitutional Amendment Act, 1992) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- शिक्षा का अधिकार लागू करना
- पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देना
- नागरिकों को सूचना का अधिकार प्रदान करना
- लैंगिक समानता को बढ़ावा देना
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992, पंचायती राज संस्थाओं (स्थानीय स्वशासन) को संवैधानिक दर्जा और संरक्षण प्रदान करने के लिए पारित किया गया था। इसने भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन के लिए एक त्रि-स्तरीय संरचना (ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर) स्थापित की और नियमित चुनाव, सीटों का आरक्षण (महिलाओं और अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए) और वित्तीय शक्तियों को अनिवार्य बनाया।
20. प्रश्न: ‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) का क्या अर्थ है?
- यह मानना कि अपनी संस्कृति दूसरों से श्रेष्ठ है
- यह सिद्धांत कि एक व्यक्ति की मान्यताओं और गतिविधियों को उस व्यक्ति की अपनी संस्कृति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए
- सांस्कृतिक सार्वभौमिकता की अवधारणा
- दुनिया की सभी संस्कृतियों को एक मानक के तहत लाना
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
‘सांस्कृतिक सापेक्षवाद’ (Cultural Relativism) का अर्थ है कि एक व्यक्ति की मान्यताओं, मूल्यों और प्रथाओं को उसकी अपनी संस्कृति के मानदंडों और संदर्भों के भीतर ही समझा जाना चाहिए। इसका मतलब है कि किसी अन्य संस्कृति के व्यवहारों का मूल्यांकन अपने सांस्कृतिक मानकों के आधार पर नहीं करना चाहिए।
- यह मानना कि अपनी संस्कृति दूसरों से श्रेष्ठ है: यह ‘जाति-केंद्रवाद’ (Ethnocentrism) है।
21. प्रश्न: ‘गैसलशाफ्ट’ (Gesellschaft) की अवधारणा किसने दी, जो आधुनिक, बड़े पैमाने पर, औद्योगिक समाजों की विशेषता है?
- फर्डिनेंड टॉनिस
- एमिल दुर्खीम
- मैक्स वेबर
- कार्ल मार्क्स
सही उत्तर: a
विस्तृत व्याख्या:
फर्डिनेंड टॉनिस ने ‘गेमाइन्शाफ्ट और गैसलशाफ्ट’ (Gemeinschaft and Gesellschaft) के द्वैधवाद की अवधारणा प्रस्तुत की।
- गेमाइन्शाफ्ट (Gemeinschaft): पारंपरिक, ग्रामीण समाजों का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ संबंध व्यक्तिगत, घनिष्ठ और समुदाय-आधारित होते हैं।
- गैसलशाफ्ट (Gesellschaft): आधुनिक, शहरी, औद्योगिक समाजों का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ संबंध अवैयक्तिक, कार्यात्मक और तर्कसंगत होते हैं, जो स्व-हित पर आधारित होते हैं।
22. प्रश्न: ‘लुक एट मी’ (Look at Me) एक सिद्धांत है जो ‘स्व’ (Self) के विकास में दर्पण-स्व (Looking-Glass Self) की भूमिका को दर्शाता है। यह अवधारणा किसने दी?
- जॉर्ज हर्बर्ट मीड
- चार्ल्स कूली
- इरविन गॉफमैन
- सिगमंड फ्रायड
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
चार्ल्स कूली ने ‘दर्पण-स्व’ (Looking-Glass Self) की अवधारणा दी, जो बताती है कि हमारा ‘स्व’ दूसरों की प्रतिक्रियाओं और perceptions के आधार पर कैसे विकसित होता है। हम खुद को वैसे ही देखते हैं जैसे हमें लगता है कि दूसरे हमें देखते हैं। यह तीन चरणों में होता है: हम कल्पना करते हैं कि दूसरे हमें कैसे देखते हैं, हम कल्पना करते हैं कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, और हम उस कथित निर्णय के अनुसार महसूस करते हैं (गौरव या शर्म)।
23. प्रश्न: भारत में ‘सामाजिक आंदोलन’ (Social Movements) के अध्ययन में ‘संसाधन जुटाना सिद्धांत’ (Resource Mobilization Theory) के एक प्रमुख समर्थक कौन हैं?
- घनश्याम शाह
- टी.के. ओमन
- ए.आर. देसाई
- सुजीत के. चौधरी
सही उत्तर: a
विस्तृत व्याख्या:
घनश्याम शाह भारतीय समाजशास्त्र में सामाजिक आंदोलनों के अध्ययन के एक प्रमुख विद्वान हैं, और उन्होंने ‘संसाधन जुटाना सिद्धांत’ (Resource Mobilization Theory) के परिप्रेक्ष्य का उपयोग करके कई आंदोलनों (जैसे दलित आंदोलन, किसान आंदोलन) का विश्लेषण किया है। यह सिद्धांत तर्क देता है कि सफल सामाजिक आंदोलनों को संसाधनों (जैसे धन, समय, कौशल, नेतृत्व, संगठन) को जुटाने की क्षमता पर निर्भर होना चाहिए।
24. प्रश्न: ‘ज्ञान की पुरातत्व’ (Archaeology of Knowledge) और ‘सत्ता/ज्ञान’ (Power/Knowledge) की अवधारणाएँ किस विचारक से संबंधित हैं?
- जुर्गन हैबरमास
- मिशेल फूको
- जैक डेर्रीडा
- ज्यां-फ्रेंकोइस लियोटार्ड
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
मिशेल फूको एक प्रभावशाली फ्रेंच दार्शनिक और समाजशास्त्री थे जिन्होंने ‘ज्ञान की पुरातत्व’ (Archaeology of Knowledge) और ‘सत्ता/ज्ञान’ (Power/Knowledge) की अवधारणाओं को विकसित किया। उन्होंने दिखाया कि कैसे ज्ञान और शक्ति अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं और कैसे ज्ञान प्रणालियाँ सामाजिक नियंत्रण और शक्ति संबंधों को आकार देती हैं।
25. प्रश्न: ‘प्रत्यक्षवादी उपागम’ (Positivist Approach) का मुख्य ध्यान किस पर होता है?
- व्यक्तिपरक अर्थों की व्याख्या
- सामाजिक घटनाओं के उद्देश्यपूर्ण, मापने योग्य पहलुओं का अध्ययन
- समाज में शक्ति संबंधों की आलोचना
- सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करना
सही उत्तर: b
विस्तृत व्याख्या:
‘प्रत्यक्षवादी उपागम’ (Positivist Approach), जिसकी शुरुआत अगस्ट कॉम्ते ने की थी, का मुख्य ध्यान सामाजिक घटनाओं के उद्देश्यपूर्ण, मापने योग्य पहलुओं का अध्ययन करने पर होता है, ठीक उसी तरह जैसे प्राकृतिक विज्ञानों में किया जाता है। यह अवलोकन, अनुभवजन्य डेटा और सामान्य कानूनों की खोज पर जोर देता है।
- व्यक्तिपरक अर्थों की व्याख्या: यह ‘व्याख्यात्मक उपागम’ (Interpretive Approach) या ‘घटना विज्ञान’ (Phenomenology) का ध्यान है।
- समाज में शक्ति संबंधों की आलोचना: यह ‘संघर्ष परिप्रेक्ष्य’ (Conflict Perspective) का हिस्सा है।
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