समाजशास्त्र: अपनी वैचारिक स्पष्टता को परखें – दैनिक अभ्यास सेट
प्रिय उम्मीदवारों, समाजशास्त्र की दुनिया में आपका स्वागत है! यह दैनिक अभ्यास सेट आपकी विश्लेषणात्मक क्षमताओं और सैद्धांतिक समझ को गहरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रमुख समाजशास्त्रीय अवधारणाओं, विचारकों और समकालीन सामाजिक मुद्दों पर आधारित इन 25 बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी का परीक्षण करें। यह सिर्फ एक क्विज़ नहीं, बल्कि आपके ज्ञान को परखने और उसे सुदृढ़ करने का एक अवसर है।
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किस समाजशास्त्री ने सामाजिक तथ्यों को “वस्तुओं” के रूप में अध्ययन करने पर जोर दिया?
- (A) कार्ल मार्क्स
- (B) मैक्स वेबर
- (C) एमिल दुर्खीम
- (D) हर्बर्ट स्पेंसर
सही उत्तर: (C) एमिल दुर्खीम
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने ‘सामाजिक तथ्यों’ की अवधारणा दी और तर्क दिया कि उन्हें वैज्ञानिक रूप से “वस्तुओं” के रूप में अध्ययन किया जाना चाहिए, जो व्यक्तियों के बाहर मौजूद होते हैं और उन पर बाध्यकारी शक्ति रखते हैं। यह उनकी पुस्तक ‘द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड’ में विस्तृत है। अन्य विचारक जैसे मार्क्स (वर्ग संघर्ष), वेबर (सामाजिक क्रिया और नौकरशाही) और स्पेंसर (सामाजिक डार्विनवाद) के अध्ययन के अलग-अलग केंद्र बिंदु थे।
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मैक्स वेबर के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा ‘सामाजिक क्रिया’ का प्रकार नहीं है?
- (A) लक्ष्य-तर्कसंगत क्रिया
- (B) मूल्य-तर्कसंगत क्रिया
- (C) भावात्मक क्रिया
- (D) परोपकारी क्रिया
सही उत्तर: (D) परोपकारी क्रिया
विस्तृत व्याख्या: मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के चार मुख्य प्रकार बताए हैं: लक्ष्य-तर्कसंगत (Zweckrational), मूल्य-तर्कसंगत (Wertrational), भावात्मक (Affectual) और पारंपरिक (Traditional)। परोपकारी क्रिया वेबर द्वारा वर्गीकृत सामाजिक क्रिया का प्रकार नहीं है, हालाँकि यह एक प्रकार की सामाजिक गतिविधि हो सकती है।
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‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा का संबंध किस समाजशास्त्री से है, जिन्होंने इसे पूंजीवादी समाज में श्रम प्रक्रिया से जोड़ा?
- (A) टालकॉट पार्सन्स
- (B) कार्ल मार्क्स
- (C) जॉर्ज सिमेल
- (D) रॉबर्ट किंग मर्टन
सही उत्तर: (B) कार्ल मार्क्स
विस्तृत व्याख्या: कार्ल मार्क्स ने ‘अलगाव’ (Alienation) की अवधारणा को पूंजीवादी व्यवस्था के संदर्भ में समझाया। उनके अनुसार, पूंजीवाद श्रमिकों को उनके श्रम के उत्पाद, स्वयं की प्रकृति, अन्य मनुष्यों और यहां तक कि उनके प्रजाति-सार (species-essence) से भी अलग कर देता है। पार्सन्स संरचनात्मक-प्रकार्यवादी थे, सिमेल ने औपचारिक समाजशास्त्र पर काम किया, और मर्टन ने प्रकार्यवाद में योगदान दिया।
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संरचनात्मक प्रकार्यवाद (Structural Functionalism) के प्रमुख प्रतिपादकों में से कौन है?
- (A) अल्फ्रेड शूत्ज़
- (B) एंथनी गिडेंस
- (C) टालकॉट पार्सन्स
- (D) पियरे बोर्डीयू
सही उत्तर: (C) टालकॉट पार्सन्स
विस्तृत व्याख्या: टालकॉट पार्सन्स संरचनात्मक प्रकार्यवाद के प्रमुख विचारकों में से एक हैं, जिन्होंने सामाजिक व्यवस्था को विभिन्न अंतर्संबंधित भागों के रूप में देखा जो समाज के संतुलन और स्थिरता बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने ‘AGIL’ मॉडल प्रस्तुत किया। अन्य विचारक (शूत्ज़-घटना विज्ञान, गिडेंस-संरचनाकरण, बोर्डीयू-हैबिटस और पूंजी) अन्य सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्यों से जुड़े हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा एक ‘प्राथमिक समूह’ का उदाहरण है?
- (A) एक क्रिकेट टीम
- (B) एक राजनीतिक दल
- (C) परिवार
- (D) एक बड़ी कंपनी के कर्मचारी
सही उत्तर: (C) परिवार
विस्तृत व्याख्या: प्राथमिक समूह वे होते हैं जो घनिष्ठ, आमने-सामने के सहयोग और व्यक्तिगत संबंधों की विशेषता रखते हैं। परिवार प्राथमिक समूह का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ सदस्य भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं और एक-दूसरे के प्रति गहरी चिंता रखते हैं। क्रिकेट टीम, राजनीतिक दल और कंपनी के कर्मचारी द्वितीयक समूहों के उदाहरण हैं।
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‘संदर्भ समूह’ (Reference Group) की अवधारणा किसने प्रतिपादित की?
- (A) जॉर्ज मीड
- (B) हर्बर्ट ब्लूमर
- (C) रॉबर्ट किंग मर्टन
- (D) एर्विंग गॉफमैन
सही उत्तर: (C) रॉबर्ट किंग मर्टन
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट किंग मर्टन ने ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा विकसित की। संदर्भ समूह वह समूह होता है जिसका उपयोग व्यक्ति अपने व्यवहार, मूल्यों और दृष्टिकोणों का मूल्यांकन करने और उन्हें आकार देने के लिए एक मानक के रूप में करता है, भले ही वह उस समूह का सदस्य हो या न हो। मीड ने प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद, ब्लूमर ने प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद को आगे बढ़ाया और गॉफमैन ने नाटकीयता (dramaturgy) पर काम किया।
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भारतीय समाज में ‘जजमानी व्यवस्था’ क्या थी?
- (A) एक भूमि-स्वामित्व प्रणाली
- (B) गांवों में वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय प्रणाली
- (C) एक विवाह प्रथा
- (D) एक धार्मिक अनुष्ठान
सही उत्तर: (B) गांवों में वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय प्रणाली
विस्तृत व्याख्या: जजमानी व्यवस्था भारतीय गांवों में एक पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक प्रणाली थी जहाँ विभिन्न जातियों के परिवार वंशानुगत संबंधों के आधार पर वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते थे। ‘जजमान’ वह परिवार होता था जो सेवाओं को प्राप्त करता था, और ‘कमीन’ या ‘परजन’ वे परिवार होते थे जो सेवाएं प्रदान करते थे। यह ग्रामीण समुदायों में सहनिर्भरता का एक रूप था।
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‘संस्कृतिकरण’ (Sanskritization) की अवधारणा किससे संबंधित है?
- (A) आंद्रे बेतेई
- (B) एम.एन. श्रीनिवास
- (C) जी.एस. घुरिये
- (D) योगेंद्र सिंह
सही उत्तर: (B) एम.एन. श्रीनिवास
विस्तृत व्याख्या: एम.एन. श्रीनिवास ने ‘संस्कृतिकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसके अनुसार निम्न जाति या जनजाति या अन्य समूह अपनी स्थिति को ऊपर उठाने के लिए किसी उच्च जाति, विशेषकर “द्विज” जाति की जीवन शैली, रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को अपनाते हैं। यह भारतीय समाज में सामाजिक गतिशीलता (social mobility) का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा ‘गुणात्मक अनुसंधान’ (Qualitative Research) पद्धति का एक उदाहरण नहीं है?
- (A) प्रतिभागी अवलोकन
- (B) नृवंशविज्ञान (Ethnography)
- (C) सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
- (D) गहन साक्षात्कार
सही उत्तर: (C) सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
विस्तृत व्याख्या: गुणात्मक अनुसंधान विधियाँ गैर-संख्यात्मक डेटा पर ध्यान केंद्रित करती हैं ताकि सामाजिक घटनाओं की गहरी समझ प्राप्त की जा सके। प्रतिभागी अवलोकन, नृवंशविज्ञान और गहन साक्षात्कार गुणात्मक अनुसंधान के उदाहरण हैं। सर्वेक्षण अनुसंधान, जिसमें आमतौर पर बड़ी संख्या में प्रतिभागियों से संख्यात्मक डेटा एकत्र किया जाता है, मात्रात्मक अनुसंधान (Quantitative Research) पद्धति का एक प्रमुख उदाहरण है।
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दुर्खीम के अनुसार, ‘एनोमी’ (Anomie) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?
- (A) जब समाज में अत्यधिक एकीकरण होता है
- (B) जब समाज में नियमहीनता या मानकहीनता की स्थिति होती है
- (C) जब व्यक्ति समाज से पूरी तरह कट जाता है
- (D) जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम होता है
सही उत्तर: (B) जब समाज में नियमहीनता या मानकहीनता की स्थिति होती है
विस्तृत व्याख्या: एमिल दुर्खीम ने ‘एनोमी’ की अवधारणा अपनी पुस्तक ‘सुसाइड’ में प्रस्तुत की। एनोमी समाज में नियमहीनता या नैतिक दिशा-निर्देशों की अनुपस्थिति की स्थिति को संदर्भित करती है, जो सामाजिक मानदंडों के कमजोर पड़ने या गायब होने के कारण उत्पन्न होती है। इससे व्यक्तियों में भ्रम और अनिश्चितता बढ़ती है, जिससे विचलित व्यवहार या आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
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‘प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद’ (Symbolic Interactionism) के संस्थापकों में से कौन है?
- (A) जॉर्ज हरबर्ट मीड
- (B) अल्फ्रेड शूत्ज़
- (C) एंथनी गिडेंस
- (D) मिशेल फूको
सही उत्तर: (A) जॉर्ज हरबर्ट मीड
विस्तृत व्याख्या: जॉर्ज हरबर्ट मीड प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद के संस्थापक पिता में से एक माने जाते हैं। उनका काम ‘माइंड, सेल्फ एंड सोसाइटी’ इस सिद्धांत की आधारशिला है, जो बताता है कि व्यक्ति सामाजिक दुनिया में प्रतीकों के माध्यम से बातचीत करके ‘स्व’ (self) और समाज का निर्माण करते हैं।
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‘घोषणात्मक कार्य’ (Manifest Function) और ‘अघोषणात्मक कार्य’ (Latent Function) की अवधारणाएँ किसने प्रस्तुत कीं?
- (A) टालकॉट पार्सन्स
- (B) रॉबर्ट किंग मर्टन
- (C) अल्फ्रेड रेडक्लिफ-ब्राउन
- (D) ब्रॉनिस्लॉ मैलिनोव्स्की
सही उत्तर: (B) रॉबर्ट किंग मर्टन
विस्तृत व्याख्या: रॉबर्ट किंग मर्टन ने प्रकार्यवादी विश्लेषण को परिष्कृत करते हुए ‘घोषणात्मक कार्य’ (जो समाज में स्पष्ट, इच्छित और मान्यता प्राप्त परिणाम होते हैं) और ‘अघोषणात्मक कार्य’ (जो अनपेक्षित और अक्सर अज्ञात परिणाम होते हैं) की अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं।
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उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की नीतियों का भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है?
- (A) केवल आर्थिक विकास
- (B) केवल सामाजिक असमानता में वृद्धि
- (C) आर्थिक विकास, उपभोक्तावाद में वृद्धि और सामाजिक असमानताओं का पुनर्गठन
- (D) केवल सांस्कृतिक एकरूपता
सही उत्तर: (C) आर्थिक विकास, उपभोक्तावाद में वृद्धि और सामाजिक असमानताओं का पुनर्गठन
विस्तृत व्याख्या: LPG नीतियां भारतीय समाज पर बहुआयामी प्रभाव डाल चुकी हैं। इन्होंने आर्थिक विकास को गति दी है, उपभोक्तावाद को बढ़ावा दिया है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय, वर्ग और जातीय असमानताओं को नए सिरे से परिभाषित और कभी-कभी बढ़ाया भी है। इससे नए सामाजिक वर्गों का उदय हुआ है और पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं में बदलाव आए हैं।
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ग्रामीण समाजशास्त्र में, ‘सामुदायिक विकास कार्यक्रम’ (Community Development Programme) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- (A) केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना
- (B) ग्रामीण समुदायों का समग्र विकास करना
- (C) शहरीकरण को बढ़ावा देना
- (D) केवल शिक्षा का प्रसार करना
सही उत्तर: (B) ग्रामीण समुदायों का समग्र विकास करना
विस्तृत व्याख्या: भारत में 1952 में शुरू किया गया सामुदायिक विकास कार्यक्रम, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और सामाजिक कल्याण सहित जीवन के सभी पहलुओं में सुधार करके ग्रामीण समुदायों का समग्र विकास करना चाहता था। इसका उद्देश्य लोगों की भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था।
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‘लेवियाथन’ (Leviathan) पुस्तक के लेखक कौन हैं, जिन्होंने सामाजिक अनुबंध सिद्धांत में योगदान दिया?
- (A) जॉन लॉक
- (B) जीन-जैक्स रूसो
- (C) थॉमस हॉब्स
- (D) एडम स्मिथ
सही उत्तर: (C) थॉमस हॉब्स
विस्तृत व्याख्या: ‘लेवियाथन’ (1651) थॉमस हॉब्स द्वारा लिखित एक प्रभावशाली पुस्तक है, जो सामाजिक अनुबंध सिद्धांत की प्रारंभिक और महत्वपूर्ण प्रस्तुति में से एक है। इसमें हॉब्स ने राज्य की प्रकृति और संप्रभु सरकार की आवश्यकता पर तर्क दिया ताकि “सभी के खिलाफ युद्ध” (war of all against all) की स्थिति से बचा जा सके। यद्यपि ये सीधे समाजशास्त्री नहीं हैं, उनके विचार सामाजिक और राजनीतिक सिद्धांत के लिए मौलिक हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा शहरीकरण (Urbanization) का एक सामाजिक परिणाम नहीं है?
- (A) सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि
- (B) घनिष्ठ प्राथमिक संबंधों का कमजोर पड़ना
- (C) गुमनामी और अलगाव
- (D) कृषि पर निर्भरता में वृद्धि
सही उत्तर: (D) कृषि पर निर्भरता में वृद्धि
विस्तृत व्याख्या: शहरीकरण से आमतौर पर कृषि पर निर्भरता में कमी आती है क्योंकि लोग रोजगार के लिए गैर-कृषि क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं। शहरीकरण के अन्य सामाजिक परिणामों में सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि, प्राथमिक समूहों के कमजोर पड़ने से द्वितीयक संबंधों की प्रधानता, और बड़े, भीड़भाड़ वाले वातावरण में गुमनामी और अलगाव की भावना शामिल हैं।
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‘नारीवादी परिप्रेक्ष्य’ (Feminist Perspective) समाज में असमानता का विश्लेषण किस आधार पर करता है?
- (A) वर्ग
- (B) जाति
- (C) लिंग
- (D) धर्म
सही उत्तर: (C) लिंग
विस्तृत व्याख्या: नारीवादी परिप्रेक्ष्य समाज में असमानता और उत्पीड़न के विश्लेषण के लिए लिंग (gender) को केंद्रीय श्रेणी के रूप में उपयोग करता है। यह पितृसत्तात्मक संरचनाओं, लैंगिक भूमिकाओं और लैंगिक आधार पर होने वाले भेदभाव पर केंद्रित है जो महिलाओं को हाशिये पर धकेलता है।
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समाजशास्त्र में ‘प्रामाणिकता’ (Validity) का क्या अर्थ है?
- (A) अनुसंधान के परिणामों की स्थिरता
- (B) अनुसंधान माप रहा है जो उसे मापना चाहिए
- (C) अनुसंधान दोहराया जा सकता है
- (D) अनुसंधान नैतिकता के सिद्धांतों का पालन करता है
सही उत्तर: (B) अनुसंधान माप रहा है जो उसे मापना चाहिए
विस्तृत व्याख्या: समाजशास्त्रीय अनुसंधान में ‘प्रामाणिकता’ का अर्थ है कि एक शोध उपकरण या पद्धति वास्तव में वही माप रही है जिसका उसे दावा है। उदाहरण के लिए, यदि कोई सर्वेक्षण गरीबी को मापने का दावा करता है, तो उसे वास्तव में गरीबी के विभिन्न पहलुओं को मापना चाहिए, न कि केवल आय को। ‘विश्वसनीयता’ (Reliability) परिणामों की स्थिरता से संबंधित है, और दोहराव ‘पुनरुत्पादनशीलता’ से संबंधित है।
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निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा ‘उत्तर-आधुनिकतावाद’ (Postmodernism) से सबसे कम संबंधित है?
- (A) महा-आख्यान का अस्वीकरण
- (B) विखंडन
- (C) वैज्ञानिक सत्य की सार्वभौमिकता
- (D) यथार्थ का निर्माण
सही उत्तर: (C) वैज्ञानिक सत्य की सार्वभौमिकता
विस्तृत व्याख्या: उत्तर-आधुनिकतावाद महा-आख्यानों (grand narratives) और सार्वभौमिक, वस्तुनिष्ठ सत्य के दावों पर संदेह करता है। यह विखंडन, विविधता और वास्तविकता के सामाजिक निर्माण पर जोर देता है। वैज्ञानिक सत्य की सार्वभौमिकता का विचार आधुनिकतावादी ज्ञानोदय (Enlightenment) से जुड़ा है, जिसे उत्तर-आधुनिकतावादी विचारक चुनौती देते हैं।
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‘द प्रेजेंटेशन ऑफ सेल्फ इन एवरीडे लाइफ’ (The Presentation of Self in Everyday Life) के लेखक कौन हैं, जिन्होंने ‘नाटकीयता’ (Dramaturgy) की अवधारणा दी?
- (A) पीटर बर्गर
- (B) थॉमस लुकमैन
- (C) एर्विंग गॉफमैन
- (D) हेरोल्ड गारफिन्केल
सही उत्तर: (C) एर्विंग गॉफमैन
विस्तृत व्याख्या: एर्विंग गॉफमैन ने ‘द प्रेजेंटेशन ऑफ सेल्फ इन एवरीडे लाइफ’ (1959) में ‘नाटकीयता’ (Dramaturgy) की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने सामाजिक अंतःक्रियाओं को रंगमंच पर एक प्रदर्शन के रूप में देखा, जहाँ व्यक्ति अपनी ‘स्व’ को प्रस्तुत करते हैं और दूसरों पर विशिष्ट प्रभाव डालने का प्रयास करते हैं।
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वैश्वीकरण के संदर्भ में, ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) क्या है?
- (A) विभिन्न डिजिटल प्रौद्योगिकियों के बीच का अंतर
- (B) उन लोगों के बीच का अंतर जिनके पास सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तक पहुंच है और जिनके पास नहीं है
- (C) डिजिटल साक्षरता की कमी
- (D) केवल शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इंटरनेट का अंतर
सही उत्तर: (B) उन लोगों के बीच का अंतर जिनके पास सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तक पहुंच है और जिनके पास नहीं है
विस्तृत व्याख्या: डिजिटल डिवाइड समाज के उन वर्गों के बीच के अंतर को संदर्भित करता है जिनके पास सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (जैसे इंटरनेट, कंप्यूटर) तक पहुंच और उपयोग की क्षमता है और जिनके पास नहीं है। यह आर्थिक, सामाजिक, भौगोलिक और शिक्षा के स्तर पर आधारित हो सकता है, जिससे मौजूदा असमानताएं और बढ़ सकती हैं।
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‘जाति व्यवस्था’ की समाजशास्त्रीय समझ के लिए किसने ‘शुद्धता और प्रदूषण’ (Purity and Pollution) की अवधारणा का उपयोग किया?
- (A) एम.एन. श्रीनिवास
- (B) लुई ड्यूमॉन्ट
- (C) आंद्रे बेतेई
- (D) जी.एस. घुरिये
सही उत्तर: (B) लुई ड्यूमॉन्ट
विस्तृत व्याख्या: फ्रांसीसी समाजशास्त्री लुई ड्यूमॉन्ट ने अपनी पुस्तक ‘होमो हायरार्किकस: द कास्ट सिस्टम एंड इट्स इम्प्लिकेशंस’ में भारतीय जाति व्यवस्था को ‘शुद्धता और प्रदूषण’ के एक अनुक्रमिक सिद्धांत के रूप में विश्लेषण किया। उनके अनुसार, यह धार्मिक-अनुष्ठानिक पदानुक्रम भारतीय समाज की अनूठी विशेषता है।
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माइक्रो-सोशियोलॉजी (सूक्ष्म-समाजशास्त्र) का ध्यान किस पर केंद्रित होता है?
- (A) बड़े पैमाने की सामाजिक संरचनाएं और संस्थाएं
- (B) व्यक्तियों और छोटे समूहों के बीच आमने-सामने की अंतःक्रियाएं
- (C) सामाजिक परिवर्तन के व्यापक पैटर्न
- (D) वैश्विक सामाजिक प्रक्रियाएं
सही उत्तर: (B) व्यक्तियों और छोटे समूहों के बीच आमने-सामने की अंतःक्रियाएं
विस्तृत व्याख्या: माइक्रो-सोशियोलॉजी समाजशास्त्र की वह शाखा है जो व्यक्तियों और छोटे समूहों के बीच आमने-सामने की अंतःक्रियाओं, अर्थों और प्रतीकों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करती है। इसके विपरीत, मैक्रो-सोशियोलॉजी बड़े पैमाने की सामाजिक संरचनाओं और संस्थाओं का अध्ययन करती है।
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पूंजीवादी समाज में मीडिया को किस मार्क्सवादी अवधारणा के तहत ‘प्रमुख विचारधारा’ (Dominant Ideology) प्रसारित करने वाला माना जाता है?
- (A) एनोमी
- (B) हैबिटस
- (C) आधिपत्य (Hegemony)
- (D) संरचनाकरण
सही उत्तर: (C) आधिपत्य (Hegemony)
विस्तृत व्याख्या: एंटोनियो ग्राम्शी की ‘आधिपत्य’ (Hegemony) की अवधारणा बताती है कि कैसे पूंजीवादी व्यवस्था न केवल बल के माध्यम से, बल्कि आम सहमति और सांस्कृतिक प्रभुत्व के माध्यम से भी अपनी शक्ति बनाए रखती है। मीडिया अक्सर इस आधिपत्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, प्रमुख विचारधाराओं को सामान्य और प्राकृतिक के रूप में प्रस्तुत करता है। ‘एनोमी’ दुर्खीम से, ‘हैबिटस’ बोर्डीयू से और ‘संरचनाकरण’ गिडेंस से संबंधित है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा सामाजिक समस्या के रूप में ‘आव्रजन निरोध’ (Immigration Detention) के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए सबसे उपयुक्त समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण होगा?
- (A) केवल प्रकार्यवाद
- (B) संघर्ष सिद्धांत
- (C) विनिमय सिद्धांत
- (D) चयनात्मक अंतःक्रियावाद
सही उत्तर: (B) संघर्ष सिद्धांत
विस्तृत व्याख्या: आव्रजन निरोध के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए ‘संघर्ष सिद्धांत’ (Conflict Theory) सबसे उपयुक्त दृष्टिकोण होगा। यह दृष्टिकोण समाज में शक्ति संबंधों, असमानताओं और संसाधनों के असमान वितरण पर केंद्रित है। आव्रजन निरोध में अक्सर कमजोर समूहों पर राज्य की शक्ति का प्रयोग, मानवाधिकारों का उल्लंघन और सामाजिक न्याय के मुद्दे शामिल होते हैं, जिनकी जांच संघर्ष सिद्धांत के लेंस से प्रभावी ढंग से की जा सकती है। यह सामाजिक असमानता, शक्ति के दुरुपयोग और हाशिए पर पड़े समूहों के अनुभवों को उजागर करता है, जैसा कि हाल के अकादमिक शोध भी दर्शाते हैं।
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