संसद सत्र के बीच उपराष्ट्रपति का इस्तीफा: संविधान, परंपरा और भविष्य की राह
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
हाल ही में, भारतीय राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला जब देश के उपराष्ट्रपति, श्री जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण “स्वास्थ्य संबंधी व्यक्तिगत कारणों” को बताया है। यह घटना इसलिए विशेष महत्वपूर्ण है क्योंकि वे भारतीय इतिहास के पहले ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने संसद सत्र के बीच अपने कार्यकाल के दौरान पद से त्यागपत्र दिया है। सामान्यतः उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, और उनका पद छोड़ना एक दुर्लभ घटना है। इस इस्तीफे ने संवैधानिक प्रावधानों, संसदीय परंपराओं और उपराष्ट्रपति के पद की गरिमा पर एक नई बहस को जन्म दिया है, जो UPSC उम्मीदवारों के लिए एक गहन अध्ययन का विषय बन गया है।
भारत का उपराष्ट्रपति: एक गरिमामय पद (The Vice-President of India: A Dignified Office)
भारत के उपराष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है, जो राष्ट्रपति के बाद आता है। यह पद भारतीय गणराज्य की संघीय संरचना और संसदीय लोकतंत्र दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions)
भारतीय संविधान के भाग V (संघ) के तहत, अनुच्छेद 63 से 71 तक उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रावधानों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
- अनुच्छेद 63: भारत का उपराष्ट्रपति (The Vice-President of India)
भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है, जो देश में सर्वोच्च संवैधानिक पदानुक्रम में राष्ट्रपति के ठीक बाद आता है।
- अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का राज्यों की परिषद (राज्यसभा) का पदेन सभापति होना (The Vice-President to be ex-officio Chairman of the Council of States)
उपराष्ट्रपति राज्यों की परिषद का पदेन सभापति होगा और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा।
यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का अध्यक्ष बनाता है। यह उनकी प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक है।
- अनुच्छेद 65: उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्तियों या उसकी अनुपस्थिति में उसके कृत्यों का निर्वहन करना (The Vice-President to act as President or to discharge his functions during casual vacancies in the office, or during the absence, of President)
जब राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्युति या अन्यथा रिक्त हो जाता है, या जब राष्ट्रपति अनुपस्थिति, बीमारी या किसी अन्य कारण से अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ होता है, तब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है। राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय, उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के समान शक्तियां, विशेषाधिकार और परिलब्धियां प्राप्त होती हैं। - योग्यताएँ (Qualifications – अनुच्छेद 66(3)): उपराष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति को निम्नलिखित योग्यताएँ पूरी करनी होती हैं:
- भारत का नागरिक हो।
- 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
- राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए योग्य हो।
- केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
- निर्वाचन (Election – अनुच्छेद 66(1)): उपराष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) शामिल होते हैं। यह राष्ट्रपति के चुनाव से भिन्न है, जहाँ केवल संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य ही मतदान करते हैं। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है और ऐसे चुनाव में मतदान गुप्त होता है।
- शपथ (Oath – अनुच्छेद 69): उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी होती है। शपथ में भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा तथा अपने पद के कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रतिज्ञा शामिल होती है।
- पदावधि (Term of Office – अनुच्छेद 67): उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष का होता है। हालाँकि, वह अपनी पदावधि समाप्त होने से पूर्व भी पद छोड़ सकता है या उसे हटाया जा सकता है।
- पदच्युति (Removal – अनुच्छेद 67(b)): उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित एक संकल्प द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसे लोकसभा भी सहमत हो। इस संकल्प को प्रस्तावित करने के लिए कम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना देनी अनिवार्य है। उपराष्ट्रपति को हटाने का कोई विशिष्ट आधार संविधान में उल्लिखित नहीं है, जैसा कि राष्ट्रपति के लिए “संविधान का उल्लंघन” है।
- वेतन और भत्ते (Salary and Emoluments): उपराष्ट्रपति को मुख्य रूप से राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में वेतन और भत्ते मिलते हैं। जब वे राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, तो उन्हें राष्ट्रपति के समान वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं।
उपराष्ट्रपति का इस्तीफा: संवैधानिक प्रक्रिया और ऐतिहासिक संदर्भ (Vice-President’s Resignation: Constitutional Process and Historical Context)
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि यह भारतीय गणराज्य के इतिहास में किसी भी उपराष्ट्रपति द्वारा दिया गया पहला इस्तीफा है। इससे पहले किसी भी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के बीच में पद नहीं छोड़ा था।
त्यागपत्र बनाम पदच्युति (Resignation vs. Removal)
उपराष्ट्रपति का पद कई तरीकों से रिक्त हो सकता है, जिनमें त्यागपत्र और पदच्युति प्रमुख हैं:
- त्यागपत्र (Resignation – अनुच्छेद 67(a)): उपराष्ट्रपति किसी भी समय राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है। यह एक स्वैच्छिक कार्य है, और इसके लिए किसी विशेष कारण या प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। राष्ट्रपति को त्यागपत्र प्राप्त होते ही पद रिक्त मान लिया जाता है।
- पदच्युति (Removal – अनुच्छेद 67(b)): जैसा कि ऊपर बताया गया है, उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के एक प्रभावी बहुमत (तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत) से पारित प्रस्ताव और लोकसभा की साधारण सहमति से हटाया जा सकता है। यह एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसके लिए 14 दिन के नोटिस की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब उपराष्ट्रपति संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है या अपने कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम पाया जाता है, हालाँकि संविधान में पदच्युति के लिए कोई विशिष्ट आधार निर्धारित नहीं है।
- अन्य कारण:
- कार्यकाल समाप्त होने पर।
- मृत्यु होने पर।
- चुनाव को अवैध घोषित किए जाने पर।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा त्यागपत्र की श्रेणी में आता है, न कि पदच्युति की। उन्होंने स्वेच्छा से, व्यक्तिगत (स्वास्थ्य) कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ा है। यह इस घटना को और भी अनूठा बनाता है, क्योंकि इससे पहले किसी भी उपराष्ट्रपति ने ऐसा नहीं किया था। इतिहास में, कुछ राष्ट्रपतियों (जैसे वी.वी. गिरि, जब वे कार्यवाहक राष्ट्रपति थे) या प्रधानमंत्रियों ने अपने पद छोड़े हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति के पद से कार्यकाल के बीच इस्तीफा देने का यह पहला उदाहरण है।
“उपराष्ट्रपति का पद केवल एक प्रतीकात्मक पद नहीं है; यह भारतीय संघ के भीतर राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है और विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संतुलनकारी भूमिका निभाता है।”
इस्तीफे के बाद की प्रक्रिया: क्या होता है आगे? (Procedure After Resignation: What Happens Next?)
उपराष्ट्रपति के त्यागपत्र देने के बाद, संविधान कुछ प्रावधानों और परंपराओं के माध्यम से एक सुचारु संक्रमण सुनिश्चित करता है:
- पद का रिक्त होना: जैसे ही राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति का त्यागपत्र स्वीकार कर लेते हैं, उपराष्ट्रपति का पद तुरंत रिक्त हो जाता है।
- राज्यसभा की कार्यवाही: जब उपराष्ट्रपति (जो राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं) का पद रिक्त हो जाता है, तो राज्यसभा का उप-सभापति (Deputy Chairman) सभापति के रूप में कार्य करता है। जब तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता, उप-सभापति ही सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
- नए उपराष्ट्रपति का चुनाव: संविधान में उपराष्ट्रपति के पद की रिक्तता को भरने के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जैसा कि राष्ट्रपति के मामले में 6 महीने की समय-सीमा है। हालाँकि, यह निहित है कि जल्द से जल्द नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कराया जाना चाहिए ताकि संवैधानिक रिक्तता को कम किया जा सके और राज्यसभा के सुचारु कामकाज को सुनिश्चित किया जा सके। चुनाव आयोग इस संबंध में आवश्यक कदम उठाता है।
यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों में कोई व्यवधान न आए और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं सुचारु रूप से चलती रहें।
स्वास्थ्य और संवैधानिक पद: एक व्यापक दृष्टिकोण (Health and Constitutional Posts: A Broader Perspective)
उपराष्ट्रपति द्वारा स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देना एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है: संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के स्वास्थ्य की स्थिति और इसके सार्वजनिक प्रकटीकरण का क्या महत्व है?
- पद की गरिमा और कर्तव्य: संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी क्षमता और दक्षता के साथ करना होता है। यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो यह कर्तव्यों के निर्वहन को प्रभावित कर सकता है।
- पारदर्शिता और सार्वजनिक हित: सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। हालाँकि व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अत्यंत गोपनीय होती है, लेकिन जब यह किसी उच्च संवैधानिक पद के कामकाज को प्रभावित करती है, तो गोपनीयता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती बन जाता है। भारत में, आमतौर पर नेताओं के स्वास्थ्य की स्थिति पर बहुत कम सार्वजनिक चर्चा होती है जब तक कि वे स्वयं इसका खुलासा न करें।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रथाएँ: कई देशों में, उच्च पदस्थ अधिकारियों, विशेष रूप से राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के स्वास्थ्य को लेकर अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के स्वास्थ्य का विवरण नियमित रूप से जनता के सामने जारी किया जाता है।
जगदीप धनखड़ के मामले में, उन्होंने स्वयं स्वास्थ्य कारणों का उल्लेख किया, जिससे किसी भी अटकल को विराम मिल गया। यह एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाता है जहां उच्च पदस्थ अधिकारी अपनी सीमाओं को समझते हुए पदमुक्त होने का निर्णय लेते हैं।
निहितार्थ और चुनौतियाँ (Implications and Challenges)
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के निहितार्थ सामने आ सकते हैं:
- संसदीय कार्यवाही पर प्रभाव: संसद सत्र के बीच इस्तीफा देने से राज्यसभा की अध्यक्षता में कुछ समय के लिए परिवर्तन आया है। हालाँकि, उप-सभापति की उपस्थिति के कारण कार्यवाही अप्रभावित रहेगी। नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
- राजनीतिक निहितार्थ: यद्यपि इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से दिया गया है, भारतीय राजनीति में ऐसे निर्णयों के पीछे अक्सर राजनीतिक अटकलें लगाई जाती हैं। हालांकि, इस मामले में, स्पष्टीकरण ने अटकलों को कम किया है।
- मिसाल (Precedent): यह पहली बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने पद से इस्तीफा दिया है। यह भविष्य में अन्य संवैधानिक पदधारकों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है, खासकर यदि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हों।
- पद की गरिमा: यह घटना संवैधानिक पदों की गरिमा को बनाए रखने और व्यक्तिगत स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के महत्व को रेखांकित करती है।
आगे की राह (Way Forward)
इस घटनाक्रम के आलोक में, आगे की राह निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित होनी चाहिए:
- सुचारु संक्रमण सुनिश्चित करना: चुनाव आयोग को जल्द से जल्द नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए ताकि संवैधानिक रिक्ति को कम किया जा सके और राज्यसभा के कामकाज में स्थिरता बनी रहे।
- संवैधानिक मर्यादा का सम्मान: सभी राजनीतिक दलों और हितधारकों को उपराष्ट्रपति के पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए और इस संवेदनशील अवधि के दौरान अनावश्यक राजनीतिकरण से बचना चाहिए।
- व्यक्तिगत गोपनीयता और सार्वजनिक उत्तरदायित्व का संतुलन: यह घटना संवैधानिक पदधारकों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर बहस को बढ़ावा दे सकती है। यह महत्वपूर्ण है कि व्यक्तिगत गोपनीयता के अधिकार और सार्वजनिक उत्तरदायित्व की अपेक्षा के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित किया जाए।
- पद की शक्ति का पुनर्अवलोकन: यद्यपि उपराष्ट्रपति के पास राष्ट्रपति जितनी कार्यकारी शक्तियां नहीं होतीं, राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में उनका पद विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। यह घटना इस पद के महत्व को फिर से उजागर करती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक अनूठी घटना है। यह न केवल एक व्यक्ति द्वारा अपनी स्वास्थ्य चुनौतियों के कारण लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है, बल्कि यह संवैधानिक प्रावधानों, पद की गरिमा और संसदीय परंपराओं की एक गहन परीक्षा भी प्रस्तुत करता है। भारतीय लोकतंत्र की मजबूती इसी बात में निहित है कि वह ऐसी अप्रत्याशित परिस्थितियों को कैसे संभालता है और संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सुचारु रूप से आगे बढ़ता है। UPSC उम्मीदवारों के लिए, यह घटना भारत के उपराष्ट्रपति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, उनके चुनाव, शक्तियों और पदच्युति/त्यागपत्र की प्रक्रियाओं को गहराई से समझने का एक उत्कृष्ट अवसर है। यह दर्शाता है कि कैसे समसामयिक घटनाएँ सीधे तौर पर हमारे संविधान और शासन प्रणाली से जुड़ी होती हैं।
UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs
(यहाँ 10 MCQs, उनके उत्तर और व्याख्या प्रदान करें)
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भारत के उपराष्ट्रपति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वह अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करके देता है।
- संविधान में उपराष्ट्रपति के पदच्युति के लिए “संविधान का उल्लंघन” जैसा कोई विशिष्ट आधार नहीं बताया गया है।
- उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल I और II
(b) केवल II और III
(c) केवल I और III
(d) I, II और IIIउत्तर: (a)
व्याख्या:
कथन I सही है। अनुच्छेद 67(a) के अनुसार, उपराष्ट्रपति अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करता है।
कथन II सही है। उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए कोई विशिष्ट आधार (जैसे “संविधान का उल्लंघन” जो राष्ट्रपति के लिए है) संविधान में नहीं दिया गया है।
कथन III गलत है। उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) शामिल होते हैं, जबकि राष्ट्रपति के चुनाव में केवल निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। -
भारत के उपराष्ट्रपति के पद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) उपराष्ट्रपति को राज्यों की परिषद (राज्यसभा) के पदेन सभापति के रूप में वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं।
(b) उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
(c) उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही शुरू किया जा सकता है।
(d) उपराष्ट्रपति के पद के लिए 35 वर्ष की आयु पूर्ण करना अनिवार्य है।उत्तर: (c)
व्याख्या:
विकल्प (a), (b), (d) सही हैं।
विकल्प (c) गलत है। उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही शुरू किया जा सकता है, लोकसभा में नहीं। इसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाता है और लोकसभा की सहमति आवश्यक होती है (अनुच्छेद 67(b))। -
भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद उपराष्ट्रपति के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने या राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उसके कृत्यों का निर्वहन करने से संबंधित है?
(a) अनुच्छेद 63
(b) अनुच्छेद 64
(c) अनुच्छेद 65
(d) अनुच्छेद 66उत्तर: (c)
व्याख्या: अनुच्छेद 65 उपराष्ट्रपति के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने या उनकी अनुपस्थिति में उनके कृत्यों का निर्वहन करने से संबंधित है। अनुच्छेद 63 उपराष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है, अनुच्छेद 64 उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का पदेन सभापति बनाता है, और अनुच्छेद 66 उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित है। -
उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित विवादों का निपटारा कौन करता है?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) संसद की संयुक्त समिति
(c) राष्ट्रपति
(d) चुनाव आयोगउत्तर: (a)
व्याख्या: अनुच्छेद 71(1) के अनुसार, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित या उससे उत्पन्न सभी संदेहों और विवादों की जाँच और निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाएगा, जिसका निर्णय अंतिम होगा। -
उपराष्ट्रपति के पद की रिक्तता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर संविधान में किसी कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का प्रावधान नहीं है।
- उपराष्ट्रपति की मृत्यु होने पर, नए चुनाव के लिए संविधान में 6 महीने की समय-सीमा निर्धारित है।
- उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद, राज्यसभा का उप-सभापति सभापति के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल I और II
(b) केवल II और III
(c) केवल I और III
(d) I, II और IIIउत्तर: (c)
व्याख्या:
कथन I सही है। संविधान में कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का कोई प्रावधान नहीं है।
कथन II गलत है। संविधान में उपराष्ट्रपति के पद की रिक्तता को भरने के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा (जैसे 6 महीने) निर्धारित नहीं है, यह प्रावधान राष्ट्रपति के लिए है। उपराष्ट्रपति का चुनाव जल्द से जल्द कराया जाता है।
कथन III सही है। जब उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होता है, तो राज्यसभा का उप-सभापति सभापति के रूप में कार्य करता है। -
भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति के लिए निम्न में से कौन-सी योग्यता आवश्यक नहीं है?
(a) वह भारत का नागरिक हो।
(b) वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
(c) वह राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए योग्य हो।
(d) वह लोकसभा का सदस्य बनने के लिए योग्य हो।उत्तर: (d)
व्याख्या: उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए योग्य होना चाहिए, न कि लोकसभा का। इसलिए, विकल्प (d) गलत है। अन्य सभी योग्यताएं आवश्यक हैं। -
उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के संकल्प के लिए कितने दिन की पूर्व सूचना अनिवार्य है?
(a) 7 दिन
(b) 14 दिन
(c) 21 दिन
(d) 30 दिनउत्तर: (b)
व्याख्या: उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के संकल्प को प्रस्तावित करने के लिए कम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना देनी अनिवार्य है (अनुच्छेद 67(b))। -
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारत के उपराष्ट्रपति की शक्तियों और कार्यों के संबंध में सही है?
(a) वह लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।
(b) वह किसी भी आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
(c) वह राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और उसके पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करता है।
(d) वह भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति करता है।उत्तर: (c)
व्याख्या: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और उसके पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करता है। वह लोकसभा का अध्यक्ष नहीं होता (वह लोकसभा अध्यक्ष होता है), आपातकाल की घोषणा राष्ट्रपति करता है, और महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। -
भारत में अब तक कितने उपराष्ट्रपतियों ने अपने कार्यकाल के दौरान पद से इस्तीफा दिया है?
(a) शून्य
(b) एक
(c) दो
(d) तीनउत्तर: (b)
व्याख्या: जगदीप धनखड़ भारतीय इतिहास के पहले उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पद से इस्तीफा दिया है। इसलिए, सही उत्तर “एक” है। -
निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव कराता है?
(a) भारत का सर्वोच्च न्यायालय
(b) केंद्रीय मंत्रिमंडल
(c) भारतीय निर्वाचन आयोग
(d) संसद की विशेष समितिउत्तर: (c)
व्याख्या: भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के चुनाव भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा कराए जाते हैं।
मुख्य परीक्षा (Mains)
(यहाँ 3-4 मेन्स के प्रश्न प्रदान करें)
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“उपराष्ट्रपति का पद भारत के संघीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है, विशेषकर राज्यों के सदन के प्रमुख के रूप में।” जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के आलोक में इस कथन का विश्लेषण कीजिए और भारत के उपराष्ट्रपति की भूमिका एवं शक्तियों पर विस्तार से प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
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भारतीय संविधान संवैधानिक पदधारकों के त्यागपत्र और पदच्युति के संबंध में स्पष्ट प्रावधान करता है। उपराष्ट्रपति के हालिया इस्तीफे के संदर्भ में, त्यागपत्र और पदच्युति की संवैधानिक प्रक्रियाओं के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। साथ ही, ऐसे उच्च पदों पर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के सार्वजनिक प्रकटीकरण के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
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उपराष्ट्रपति के अचानक पदत्याग से उत्पन्न होने वाली संवैधानिक और प्रशासनिक रिक्तता को भारतीय राजनीतिक व्यवस्था कैसे संभालती है? इस संदर्भ में, उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया और उनके उत्तराधिकार की संवैधानिक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन कीजिए। (250 शब्द)
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