संसद का मानसून सत्र: एअर इंडिया घटना पर सरकार की ‘सत्यनिष्ठा’ की अग्निपरीक्षा
चर्चा में क्यों? (Why in News?):
हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान, संसद में एक महत्वपूर्ण घटना ने सबका ध्यान आकर्षित किया। एअर इंडिया से संबंधित एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे पर गहन चर्चा हुई, जिसके बाद सरकार ने सदन में अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि वह ‘सच के साथ खड़ी’ है। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत बहस के कारण दोनों सदनों को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। यह घटना न केवल विमानन सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालती है, बल्कि संसदीय प्रक्रियाओं, विपक्ष की भूमिका और जवाबदेही के महत्व को भी उजागर करती है। किसी भी बड़े सार्वजनिक हादसे के बाद, जनता की अपेक्षा होती है कि सरकार न केवल त्वरित कार्रवाई करे, बल्कि पूर्ण पारदर्शिता के साथ तथ्यों को सामने रखे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। यह लेख इस घटना के विभिन्न आयामों को गहराई से परखेगा, जिसमें संसदीय नियंत्रण, विमानन सुरक्षा चुनौतियाँ और सरकार की जवाबदेही शामिल है, जो यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा।
एअर इंडिया दुर्घटना: क्या हुआ और क्यों महत्वपूर्ण?
हालांकि समाचार शीर्षक में किसी विशिष्ट एअर इंडिया दुर्घटना का उल्लेख नहीं है, लेकिन ऐसे किसी भी गंभीर हादसे पर संसदीय बहस का होना उसकी गंभीरता और राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है। आमतौर पर, जब कोई विमानन दुर्घटना होती है, तो उसके कई दूरगामी परिणाम होते हैं, जो केवल जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं रहते। यह घटना विमानन सुरक्षा, नियामक निकायों की दक्षता, एयरलाइन के संचालन प्रोटोकॉल और यहां तक कि देश की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर भी सवाल उठाती है।
किसी भी विमानन दुर्घटना के प्रमुख निहितार्थ:
- मानवीय क्षति: सबसे दुखद पहलू है जीवन का नुकसान और घायलों का दर्द। यह परिवारों पर विनाशकारी प्रभाव डालता है।
- यात्री सुरक्षा का विश्वास: बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं यात्रियों के मन में हवाई यात्रा की सुरक्षा के प्रति संदेह पैदा करती हैं, जिससे देश के विमानन क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- एयरलाइन की प्रतिष्ठा: संबंधित एयरलाइन की ब्रांड छवि और वित्तीय स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचता है, जिससे यात्रियों का विश्वास घटता है और टिकटों की बिक्री प्रभावित होती है।
- नियामक ओवरसाइट: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और अन्य नियामक निकायों की भूमिका और प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। क्या सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन किया जा रहा था? क्या निरीक्षण पर्याप्त थे?
- आर्थिक प्रभाव: दुर्घटना की जाँच, मुआवजा, मरम्मत और भविष्य की सुरक्षा उन्नयन में भारी लागत आती है। पर्यटन और व्यापार पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय जाँच और मानदंड: बड़ी दुर्घटनाओं में अक्सर अंतर्राष्ट्रीय जाँच एजेंसियां (जैसे NTSB, ICAO) शामिल होती हैं, और देश को अंतर्राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों (जैसे ICAO Anex 13) का पालन करना होता है।
एअर इंडिया, भारत की ध्वज वाहक एयरलाइन होने के नाते, ऐसी किसी भी घटना का राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व होता है। सरकार का ‘सच के साथ खड़े होने’ का बयान इस बात को रेखांकित करता है कि वह इस मामले की गंभीरता को स्वीकार करती है और पारदर्शिता के साथ जाँच प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है। यह एक गंभीर जिम्मेदारी है, क्योंकि इसमें न केवल पीड़ितों के प्रति संवेदना और न्याय शामिल है, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना भी शामिल है।
संसदीय कार्यवाही और ‘सत्य के साथ खड़े होने’ का आशय
संसद, लोकतंत्र का मंदिर, जनता की आवाज उठाने और सरकार को जवाबदेह ठहराने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। मानसून सत्र, विशेष रूप से, विधायी कामकाज के साथ-साथ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस और विचार-विमर्श के लिए जाना जाता है। एअर इंडिया हादसे पर सरकार के बयान और सदन के स्थगन ने संसदीय प्रक्रियाओं की जीवंतता को दर्शाया।
संसदीय प्रक्रिया और स्थगन:
जब किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में भारी हंगामा होता है या सदस्य किसी मामले पर तत्काल ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, तो स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) लाया जा सकता है। यह एक असाधारण उपकरण है जिसका उपयोग तत्काल सार्वजनिक महत्व के एक निश्चित, महत्वपूर्ण मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जाता है। यदि स्पीकर इसे स्वीकार कर लेते हैं, तो यह सदन के सामान्य कामकाज को रोक देता है ताकि उस विषय पर बहस की जा सके। एअर इंडिया घटना का मामला इतना गंभीर था कि इस पर तात्कालिक चर्चा की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके कारण सदन को स्थगित करना पड़ा। यह दर्शाता है कि विपक्ष और कुछ सदस्य इस मुद्दे पर सरकार से तत्काल और ठोस जवाब चाहते थे।
‘हम सच के साथ खड़े हैं’ का वास्तविक अर्थ:
सरकार का यह बयान सिर्फ एक जुमला नहीं है, बल्कि इसके गहरे निहितार्थ हैं:
- पारदर्शिता और जवाबदेही: इसका अर्थ है कि सरकार घटना के तथ्यों को छिपाएगी नहीं, बल्कि उन्हें सार्वजनिक करेगी। इसमें दुर्घटना की जाँच रिपोर्ट, उसमें पाए गए कारण और जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं का खुलासा शामिल है।
- निष्पक्ष जाँच का वादा: यह आश्वासन कि जाँच प्रक्रिया किसी भी राजनीतिक दबाव या निहित स्वार्थ से प्रभावित नहीं होगी, बल्कि विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं पर आधारित होगी।
- सुधारात्मक कार्रवाई का संकल्प: ‘सच के साथ खड़े होने’ का मतलब सिर्फ अतीत के बारे में बताना नहीं है, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाना भी है। इसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना, नियामक ढांचे में सुधार करना और आवश्यक हो तो कर्मियों या प्रक्रियाओं में बदलाव करना शामिल है।
- पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता: सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पीड़ितों और उनके परिवारों को पर्याप्त सहायता, मुआवजा और न्याय मिले। यह बयान उनकी चिंताओं को दूर करने का एक प्रयास भी है।
- सार्वजनिक विश्वास बहाल करना: ऐसे बयान का उद्देश्य जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता और देश की विमानन सुरक्षा प्रणाली पर भरोसा बहाल करना है।
यह बयान सरकार के लिए एक अग्निपरीक्षा है। उसे न केवल दुर्घटना के कारणों को उजागर करना होगा, बल्कि यह भी दिखाना होगा कि वह भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए कितनी गंभीर है। संसद में होने वाली यह बहस इस दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह सरकार पर जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को पूरा करने के लिए दबाव बनाती है।
सरकार की जवाबदेही और संसद की भूमिका
लोकतंत्र में, सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। संसद इस जवाबदेही को सुनिश्चित करने का प्राथमिक माध्यम है। जब कोई बड़ी दुर्घटना या संकट होता है, तो संसद सक्रिय हो जाती है ताकि सरकार से स्पष्टीकरण माँगा जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
संसदीय नियंत्रण के उपकरण (Tools of Parliamentary Control):
संसद के पास सरकार को जवाबदेह ठहराने के कई प्रभावी उपकरण हैं:
- प्रश्नकाल (Question Hour): सत्र के पहले घंटे में सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं, और मंत्री जवाब देने के लिए बाध्य होते हैं। यह सरकार की नीतियों और प्रदर्शन पर प्रकाश डालता है।
- शून्यकाल (Zero Hour): यह प्रश्नकाल के तुरंत बाद शुरू होता है। सदस्य तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामलों को उठाते हैं, हालांकि इसके लिए पहले से कोई नोटिस की आवश्यकता नहीं होती।
- ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion): इसके तहत कोई सदस्य तत्काल सार्वजनिक महत्व के किसी मामले पर किसी मंत्री का ध्यान आकर्षित कर सकता है। मंत्री संक्षिप्त वक्तव्य देता है और सदस्य स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।
- स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion): जैसा कि इस मामले में देखा गया, इसका उपयोग असाधारण परिस्थितियों में तत्काल सार्वजनिक महत्व के एक निश्चित मामले पर चर्चा करने के लिए किया जाता है। इसके लिए 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
- अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion): यदि विपक्ष को लगता है कि सरकार ने सदन का विश्वास खो दिया है, तो वह अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। यदि यह पारित हो जाता है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
- संसदीय समितियाँ (Parliamentary Committees): ये समितियाँ कानूनों और नीतियों की गहन जाँच करती हैं। उदाहरण के लिए, परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर स्थायी समिति विमानन सुरक्षा से संबंधित मामलों की समीक्षा कर सकती है और सिफारिशें दे सकती है। ये समितियां विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं जो सरकार के लिए दिशा-निर्देश का काम करती हैं।
- बजट और वित्तीय नियंत्रण: संसद सरकार के वित्तीय प्रस्तावों की जाँच और अनुमोदन करके उसके खर्चों पर नियंत्रण रखती है।
एअर इंडिया दुर्घटना के मामले में, स्थगन प्रस्ताव और सरकार के बयान ने इन उपकरणों के महत्व को रेखांकित किया। यह दर्शाता है कि कोई भी सरकार ऐसी महत्वपूर्ण घटनाओं पर चुप नहीं रह सकती, और उसे संसद के माध्यम से जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी होगी।
एविएशन सेक्टर में चुनौतियाँ (Challenges in Aviation Sector):
भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियाँ भी आती हैं जो सुरक्षा और दक्षता को प्रभावित करती हैं:
- नियामक ढाँचा और उसकी दक्षता (Regulatory Framework and its Efficiency):
- नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA): यह भारत में विमानन सुरक्षा नियामक है। इसकी चुनौतियों में पर्याप्त स्टाफिंग, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी, स्वायत्तता का अभाव और समय पर निरीक्षण और ऑडिट की कमी शामिल हैं।
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI): हवाई अड्डों और हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) का प्रबंधन करता है। इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण और ATC कर्मियों का प्रशिक्षण एक सतत चुनौती है।
- सुरक्षा मानक और उनका प्रवर्तन (Safety Standards and their Enforcement): अंतर्राष्ट्रीय मानकों (ICAO) के अनुरूप सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है। दुर्घटनाओं की जाँच में देरी या दोषपूर्ण जाँच भी एक समस्या हो सकती है।
- बुनियादी ढाँचा (Infrastructure): बढ़ते हवाई यातायात के लिए पर्याप्त रनवे, टर्मिनल और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सुविधाओं की आवश्यकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में विमानन बुनियादी ढांचे का विकास एक प्राथमिकता है।
- पायलटों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण (Pilot and Staff Training): योग्य पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और रखरखाव कर्मियों की कमी एक बड़ी चुनौती है। प्रशिक्षण मानकों को उच्च स्तर पर बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
- वित्तीय दबाव (Financial Pressure): एयरलाइंस पर अक्सर लागत कम करने का दबाव होता है, जिससे कभी-कभी रखरखाव या प्रशिक्षण में समझौता हो सकता है।
- आधुनिकीकरण की आवश्यकता (Need for Modernization): पुराने विमानों, नेविगेशन प्रणालियों और हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण सुरक्षा और दक्षता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
इन चुनौतियों को दूर करना ही देश में विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है। सरकार का ‘सच के साथ खड़े होने’ का बयान इन चुनौतियों को स्वीकार करने और उन्हें दूर करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अंतर्राष्ट्रीय मानक और भारत (International Standards and India):
वैश्विक विमानन एक अत्यधिक विनियमित क्षेत्र है, और अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO): यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो हवाई नेविगेशन के सिद्धांतों और तकनीकों को निर्धारित करती है, और अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के विकास और योजना को बढ़ावा देती है। ICAO सुरक्षा, दक्षता, नियमितता और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक और अनुशंसित अभ्यास (SARPs) विकसित करता है। सदस्य देशों को इन मानकों का पालन करना होता है।
भारत ICAO का एक संस्थापक सदस्य है और उसके SARPs का पालन करता है। ICAO नियमित रूप से सदस्य देशों के विमानन सुरक्षा ओवरसाइट सिस्टम का यूनिवर्सल सेफ्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम (USOAP) के तहत ऑडिट करता है। इन ऑडिट में पाई गई कमियों को दूर करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है ताकि उसकी विमानन सुरक्षा रेटिंग बनी रहे और भारतीय एयरलाइंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिना किसी प्रतिबंध के उड़ान भर सकें। किसी भी बड़ी दुर्घटना के बाद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें जाँच प्रक्रिया और सुधारात्मक कदमों पर टिकी रहती हैं। भारत को अपनी जाँच को ICAO के अनुलग्नक 13 (विमान दुर्घटना और घटना जाँच) के अनुरूप सुनिश्चित करना होता है।
आगे की राह (Way Forward)
एअर इंडिया जैसी घटनाएँ न केवल सबक देती हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक स्पष्ट दिशा भी प्रदान करती हैं। सरकार का ‘सच के साथ खड़े होने’ का बयान केवल शुरुआत है; असली चुनौती इस संकल्प को ठोस कार्यों में बदलना है।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच (Independent and Impartial Investigation):
- दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच तुरंत पूरी की जानी चाहिए। इस जाँच में पायलट की त्रुटि, तकनीकी खराबी, रखरखाव की कमी, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की खामियाँ या बाहरी कारकों सहित सभी संभावित पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।
- जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता को पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्यों का पता चल सके।
- सुधारों की आवश्यकता (Need for Reforms) in Aviation Safety:
- DGCA को मजबूत करना: DGCA को अधिक स्वायत्तता, पर्याप्त तकनीकी और मानव संसाधन प्रदान किए जाने चाहिए ताकि वह प्रभावी ढंग से निगरानी और प्रवर्तन कर सके। सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण को नियमित और कठोर बनाया जाना चाहिए।
- प्रशिक्षण और कौशल विकास: पायलटों, इंजीनियरों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों और अन्य विमानन कर्मियों के लिए उच्चतम स्तर के प्रशिक्षण और निरंतर कौशल विकास पर जोर दिया जाना चाहिए।
- तकनीकी उन्नयन: पुराने विमानों और उपकरणों का आधुनिकीकरण, तथा हवाई अड्डों पर नवीनतम नेविगेशन और संचार प्रौद्योगिकियों का उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- डेटा-संचालित सुरक्षा प्रबंधन: विमानन सुरक्षा के लिए एक मजबूत डेटा-संचालित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जिसमें घटनाओं और दुर्घटनाओं से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करके भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके।
- पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास (Transparency and Public Trust):
- सरकार को जनता के साथ लगातार संवाद स्थापित करना चाहिए और उन्हें उठाए जा रहे कदमों के बारे में सूचित करते रहना चाहिए।
- संकट के समय में प्रभावी संचार से अफवाहों को रोका जा सकता है और जनता का विश्वास बना रहता है।
- क्षतिपूर्ति और पुनर्वास (Compensation and Rehabilitation):
- दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- आवश्यक होने पर, मनोवैज्ञानिक सहायता और पुनर्वास कार्यक्रम भी प्रदान किए जाने चाहिए।
- संसदीय निगरानी की निरंतरता (Continued Parliamentary Oversight):
- संसद को केवल दुर्घटना के तुरंत बाद ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी विमानन सुरक्षा के मुद्दों पर सक्रिय रूप से निगरानी रखनी चाहिए।
- संसदीय समितियाँ, विशेष रूप से परिवहन संबंधी समिति, विमानन सुरक्षा पर सरकार की प्रगति की नियमित समीक्षा कर सकती हैं।
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय की भूमिका (Role of Ministry of Civil Aviation):
- मंत्रालय को नियामक निकायों और एयरलाइंस के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके।
- यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पूरी तरह से पालन हो और भारत की विमानन सुरक्षा रेटिंग मजबूत बनी रहे।
संक्षेप में, एअर इंडिया जैसी घटनाएँ सरकार और नियामक निकायों के लिए एक वेक-अप कॉल होती हैं। ‘सच के साथ खड़े होने’ का मतलब केवल एक दुर्घटना के तथ्यों को स्वीकार करना नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित, कुशल और विश्वसनीय विमानन प्रणाली बनाने के लिए एक व्यापक और सतत प्रतिबद्धता दिखाना भी है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मानसून सत्र में एअर इंडिया दुर्घटना पर हुई बहस और सरकार का ‘सच के साथ खड़े होने’ का बयान भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली और उसकी जवाबदेही की अंतर्निहित शक्ति को प्रदर्शित करता है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि एक मजबूत विमानन क्षेत्र केवल आर्थिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और विश्वास के लिए भी आवश्यक है। सरकार, नियामक निकायों और एयरलाइंस को मिलकर काम करना होगा ताकि सुरक्षा संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके। संसद द्वारा निभाई गई सक्रिय भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी सरकार सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों पर अपनी आँखें बंद नहीं कर सकती। अंततः, पारदर्शिता, कठोर जाँच, प्रभावी नियामक ढाँचा और निरंतर संसदीय निगरानी ही वह नींव हैं जिन पर एक सुरक्षित और विश्वसनीय विमानन प्रणाली का निर्माण किया जा सकता है, जिससे जनता का विश्वास बना रहे और देश प्रगति की उड़ान भर सके।
UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs
(निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न में दिए गए कथनों पर विचार करें और सही उत्तर चुनें)
1. स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह सदन के सामान्य कामकाज को बाधित करता है।
- इसे सदन में तत्काल सार्वजनिक महत्व के एक निश्चित मामले पर चर्चा के लिए लाया जाता है।
- इसे स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल a और b
- केवल b और c
- केवल a और c
- a, b और c
उत्तर: D
व्याख्या: स्थगन प्रस्ताव एक असाधारण संसदीय उपकरण है। यह निश्चित रूप से सदन के सामान्य कामकाज को बाधित करता है (कथन a सही है)। इसका उद्देश्य तत्काल सार्वजनिक महत्व के एक निश्चित मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करना होता है (कथन b सही है)। इसे स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है (कथन c सही है)।
2. भारतीय विमानन सुरक्षा के संदर्भ में, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की प्राथमिक भूमिका क्या है?
- भारत में हवाई अड्डों का निर्माण और प्रबंधन करना।
- देश में हवाई किराए को विनियमित करना।
- नागरिक विमानन सुरक्षा मानकों को विनियमित करना और उनका प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय उड़ान मार्गों को निर्धारित करना।
उत्तर: C
व्याख्या: DGCA (Directorate General of Civil Aviation) भारत में नागरिक विमानन सुरक्षा के लिए प्राथमिक नियामक निकाय है। यह सुरक्षा मानकों को निर्धारित करता है, उनका प्रवर्तन करता है, एयरलाइंस का निरीक्षण करता है और विमान दुर्घटनाओं की जाँच में सहायता करता है। हवाई अड्डों का प्रबंधन AAI (Airports Authority of India) द्वारा किया जाता है।
3. अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के लिए सुरक्षा और दक्षता मानक निर्धारित करता है।
- भारत ICAO का सदस्य नहीं है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल a
- केवल a और b
- केवल b और c
- a, b और c
उत्तर: B
व्याख्या: ICAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो अंतर्राष्ट्रीय हवाई नेविगेशन के सिद्धांतों और तकनीकों को निर्धारित करती है, और अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के विकास और योजना को बढ़ावा देती है। यह सुरक्षा और दक्षता के लिए मानक और अनुशंसित अभ्यास (SARPs) विकसित करता है (कथन a और b सही हैं)। भारत ICAO का संस्थापक सदस्य है (कथन c गलत है)।
4. ‘शून्यकाल’ के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही नहीं है?
- यह प्रश्नकाल के तुरंत बाद शुरू होता है।
- सदस्य तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामलों को उठाते हैं।
- इसके लिए सदस्यों को पहले से नोटिस देना अनिवार्य होता है।
- यह भारतीय संसदीय प्रक्रिया में एक नवाचार है और संसदीय नियमों में इसका उल्लेख नहीं है।
उत्तर: C
व्याख्या: शून्यकाल भारतीय संसदीय प्रक्रिया की एक अनौपचारिक व्यवस्था है जो प्रश्नकाल के तुरंत बाद शुरू होती है। इसमें सदस्य बिना किसी पूर्व सूचना के तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठा सकते हैं। इसलिए, कथन c (इसके लिए सदस्यों को पहले से नोटिस देना अनिवार्य होता है) सही नहीं है।
5. निम्नलिखित में से कौन-सा संसदीय नियंत्रण का एक उपकरण नहीं है जिसका उपयोग सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है?
- ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
- अविश्वास प्रस्ताव
- विश्वास प्रस्ताव
- प्रश्नकाल
उत्तर: C
व्याख्या: ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव और प्रश्नकाल सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरण हैं। विश्वास प्रस्ताव (Vote of Confidence) सरकार द्वारा स्वयं लाया जाता है ताकि यह साबित किया जा सके कि उसके पास सदन का बहुमत है, न कि यह सरकार पर संसदीय नियंत्रण का उपकरण है।
6. भारत में विमानन क्षेत्र के संदर्भ में, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की मुख्य जिम्मेदारी क्या है?
- एयरलाइंस को विमान खरीदने के लिए ऋण प्रदान करना।
- भारत में हवाई अड्डों का प्रबंधन और हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) सेवाएं प्रदान करना।
- पायलटों को प्रशिक्षण और लाइसेंस जारी करना।
- विमानन ईंधन की कीमतों को विनियमित करना।
उत्तर: B
व्याख्या: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) भारत में नागरिक हवाई अड्डों का निर्माण, रखरखाव और प्रबंधन करता है, और पूरे भारतीय हवाई क्षेत्र और आसन्न महासागरीय क्षेत्रों में हवाई यातायात प्रबंधन (ATM) सेवाएं प्रदान करता है।
7. संसदीय समितियों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- वे कानूनों और नीतियों की गहन जाँच करती हैं।
- वे सरकार के खर्चों पर नियंत्रण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- स्थायी समितियाँ स्थायी प्रकृति की होती हैं जबकि तदर्थ समितियाँ अस्थायी प्रकृति की होती हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल a
- केवल b और c
- केवल a और c
- a, b और c
उत्तर: D
व्याख्या: संसदीय समितियाँ संसद के कामकाज को सुचारू बनाने और विशेषज्ञता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे विधेयकों और नीतियों की विस्तृत जाँच करती हैं (कथन a सही है)। वे विभिन्न मंत्रालयों के बजट और खर्चों की समीक्षा करके वित्तीय नियंत्रण में भी योगदान करती हैं (कथन b सही है)। संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियां (जो निरंतर प्रकृति की होती हैं) और तदर्थ समितियां (जो एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए बनाई जाती हैं और काम पूरा होने पर भंग हो जाती हैं) (कथन c सही है)।
8. प्रश्नकाल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह प्रत्येक संसदीय सत्र का पहला घंटा होता है।
- इसमें सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं।
- मंत्रियों को मौखिक या लिखित उत्तर देना अनिवार्य नहीं होता।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल a
- केवल a और b
- केवल b और c
- a, b और c
उत्तर: B
व्याख्या: प्रश्नकाल प्रत्येक संसदीय सत्र का पहला घंटा होता है (कथन a सही है)। इसमें सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं, और मंत्री उत्तर देने के लिए बाध्य होते हैं, चाहे वह मौखिक हो या लिखित (कथन b सही है)। मंत्रियों को उत्तर देना अनिवार्य होता है (कथन c गलत है)।
9. विमान दुर्घटना जाँच में, ICAO का कौन सा अनुलग्नक (Annex) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
- अनुलग्नक 9 – सुविधा
- अनुलग्नक 13 – विमान दुर्घटना और घटना जाँच
- अनुलग्नक 17 – सुरक्षा
- अनुलग्नक 18 – खतरनाक माल का सुरक्षित हवाई परिवहन
उत्तर: B
व्याख्या: ICAO के अनुलग्नक 13 (Annex 13) विशेष रूप से विमान दुर्घटना और घटना जाँच (Aircraft Accident and Incident Investigation) से संबंधित मानकों और अनुशंसित अभ्यासों को निर्धारित करता है।
10. सरकार की जवाबदेही के संदर्भ में, ‘विश्वास प्रस्ताव’ (Vote of Confidence) और ‘अविश्वास प्रस्ताव’ (No-Confidence Motion) के बीच मुख्य अंतर क्या है?
- विश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा लाया जाता है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव सरकार द्वारा लाया जाता है।
- विश्वास प्रस्ताव सरकार द्वारा सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए लाया जाता है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा सरकार के बहुमत को चुनौती देने के लिए लाया जाता है।
- दोनों प्रस्तावों का उद्देश्य एक ही है, लेकिन वे अलग-अलग सत्रों में पेश किए जाते हैं।
- विश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जा सकता है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव राज्यसभा में भी लाया जा सकता है।
उत्तर: B
व्याख्या: विश्वास प्रस्ताव सरकार द्वारा स्वयं सदन में यह साबित करने के लिए लाया जाता है कि उसके पास बहुमत है। इसके विपरीत, अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा सरकार के बहुमत को चुनौती देने और उसे हटाने के उद्देश्य से लाया जाता है। दोनों केवल लोकसभा में लाए जा सकते हैं।
मुख्य परीक्षा (Mains)
1. “लोकतांत्रिक शासन में संसदीय नियंत्रण सरकार की जवाबदेही का आधार है।” हाल ही में एअर इंडिया हादसे पर संसद में हुई बहस और सरकार के बयान के आलोक में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
2. भारत के विमानन क्षेत्र को किन प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? इन चुनौतियों को दूर करने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक मजबूत विमानन सुरक्षा ढाँचा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को कौन से कदम उठाने चाहिए?
3. ‘हम सच के साथ खड़े हैं’ – सरकार द्वारा दिए गए ऐसे बयानों के लोकतंत्र में क्या निहितार्थ होते हैं? सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने और संकट के समय में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में ऐसे बयानों की भूमिका का विश्लेषण करें।
4. संसदीय उपकरण, जैसे कि स्थगन प्रस्ताव, सरकार को जवाबदेह ठहराने में कितने प्रभावी हैं? भारतीय संसदीय प्रणाली में इनकी प्रासंगिकता और सीमाओं का मूल्यांकन करें।