भारतीय राजव्यवस्था: संवैधानिक ज्ञान की गहन परीक्षा
भारत, विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र, अपने संविधान की नींव पर खड़ा है। इस जीवंत लोकतांत्रिक ढांचे को समझने के लिए भारतीय राजव्यवस्था का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दैनिक अभ्यास सेट आपको संवैधानिक अनुच्छेदों, मौलिक सिद्धांतों और महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों की अपनी समझ का परीक्षण करने का अवसर प्रदान करता है। अपनी वैचारिक स्पष्टता को चुनौती दें और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अपनी तैयारी को मजबूत करें।
भारतीय राजव्यवस्था बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
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भारत के संविधान की प्रस्तावना में “समाजवादी”, “धर्मनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़े गए थे?
a) 42वां संशोधन अधिनियम, 1976
b) 44वां संशोधन अधिनियम, 1978
c) 73वां संशोधन अधिनियम, 1992
d) 74वां संशोधन अधिनियम, 1992सही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 को ‘लघु संविधान’ के नाम से भी जाना जाता है। इस संशोधन द्वारा प्रस्तावना में “समाजवादी”, “धर्मनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द जोड़े गए। यह संशोधन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान किया गया था। प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके उद्देश्यों एवं दर्शन को दर्शाती है। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले (1973) में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है और इसे संशोधित किया जा सकता है, बशर्ते संविधान के मूल ढांचे को बदला न जाए।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत “अस्पृश्यता का उन्मूलन” किया गया है?
a) अनुच्छेद 14
b) अनुच्छेद 17
c) अनुच्छेद 19
d) अनुच्छेद 21सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 “अस्पृश्यता” को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसके अभ्यास को निषिद्ध करता है। यह मौलिक अधिकारों के तहत समानता के अधिकार का हिस्सा है (अनुच्छेद 14-18)। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण से संबंधित है। अनुच्छेद 19 वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित छह स्वतंत्रताओं से संबंधित है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित है। अस्पृश्यता को समाप्त करने का उद्देश्य सामाजिक समानता स्थापित करना है।
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राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
a) ये आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।
b) इनका उद्देश्य भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
c) ये न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
d) ये सरकार के लिए नैतिक और राजनीतिक वैधता प्रदान करते हैं।सही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित हैं। ये आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं और इनका मुख्य उद्देश्य भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। हालांकि, अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से कहता है कि ये सिद्धांत न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन देश के शासन में मौलिक हैं। ये सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं और कानून बनाने में उनका पालन करना राज्य का कर्तव्य है।
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भारत के संविधान में मौलिक कर्तव्यों को किस समिति की सिफारिश पर शामिल किया गया था?
a) बलवंत राय मेहता समिति
b) अशोक मेहता समिति
c) स्वर्ण सिंह समिति
d) एल.एम. सिंघवी समितिसही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: मौलिक कर्तव्यों को 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-A (अनुच्छेद 51A) में शामिल किया गया था, जो स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित था। प्रारंभ में, 10 मौलिक कर्तव्य थे, और बाद में 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और कर्तव्य (शिक्षा का अधिकार) जोड़ा गया, जिससे कुल 11 मौलिक कर्तव्य हो गए। ये कर्तव्य नागरिकों को अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदारियों की याद दिलाते हैं।
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भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में निम्नलिखित में से कौन भाग नहीं लेता है?
a) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
b) राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
c) केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (जहाँ विधानसभाएँ हैं)
d) राज्यों की विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्यसही उत्तर: d)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य, और दिल्ली व पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (70वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया) शामिल होते हैं। राज्यों की विधान परिषदों के सदस्य (चाहे निर्वाचित हों या मनोनीत) और संसद व राज्यों की विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
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भारत के उपराष्ट्रपति को पद से कैसे हटाया जा सकता है?
a) लोकसभा के विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा
b) राज्यसभा के प्रभावी बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा, जिसे लोकसभा द्वारा सहमति दी गई हो
c) संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में बहुमत से
d) राष्ट्रपति के आदेश द्वारासही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(b) के तहत, उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत (प्रभावी बहुमत) से पारित प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिस पर लोकसभा की सहमति आवश्यक है (एक साधारण बहुमत से)। ऐसे किसी भी प्रस्ताव को पेश करने से कम से कम 14 दिन पहले उपराष्ट्रपति को सूचित करना अनिवार्य है। लोकसभा में इसकी शुरुआत नहीं की जा सकती।
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मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
a) राष्ट्रपति
b) प्रधानमंत्री
c) लोकसभा
d) राज्यसभासही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ यह है कि पूरी मंत्रिपरिषद एक इकाई के रूप में कार्य करती है और उसे लोकसभा में विश्वास बनाए रखना होता है। यदि लोकसभा मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पारित कर देती है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है। अनुच्छेद 75(2) के अनुसार, मंत्री व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
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‘धन विधेयक’ को किस सदन में पेश किया जा सकता है?
a) केवल लोकसभा में
b) केवल राज्यसभा में
c) संसद के किसी भी सदन में
d) दोनों सदनों के संयुक्त सत्र मेंसही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में ‘धन विधेयक’ को परिभाषित किया गया है। अनुच्छेद 109(1) के अनुसार, धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है और राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना इसे पेश नहीं किया जा सकता। लोकसभा से पारित होने के बाद, इसे राज्यसभा को भेजा जाता है, जिसके पास इसे अस्वीकार करने या संशोधित करने की शक्ति नहीं होती है। राज्यसभा को इसे 14 दिनों के भीतर वापस करना होता है, अन्यथा इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
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राज्यों की विधान परिषदों (Legislative Councils) के सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है?
a) 4 वर्ष
b) 5 वर्ष
c) 6 वर्ष
d) स्थायी सदन, सदस्यों का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होतासही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: विधान परिषद (राज्य विधानमंडल का ऊपरी सदन) राज्यसभा की तरह एक स्थायी सदन है, लेकिन इसके सदस्य स्थायी नहीं होते। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 172 के अनुसार, विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। प्रत्येक दूसरे वर्ष एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं। विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
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भारतीय संविधान का संरक्षक कौन है?
a) राष्ट्रपति
b) संसद
c) सर्वोच्च न्यायालय
d) प्रधानमंत्रीसही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान का संरक्षक (Guardianship) और अंतिम व्याख्याकर्ता सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 124-147) है। सर्वोच्च न्यायालय न्यायिक समीक्षा (अनुच्छेद 13, 32, 131-136) की शक्ति के माध्यम से यह सुनिश्चित करता है कि संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन न हो। यह मौलिक अधिकारों का रक्षक भी है। अन्य विकल्प सही नहीं हैं क्योंकि राष्ट्रपति कार्यकारी प्रमुख हैं, संसद कानून बनाने वाली संस्था है, और प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है।
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उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया किसके समान है?
a) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
b) राष्ट्रपति
c) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
d) a और c दोनोंसही उत्तर: d)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 218 के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया के समान ही होती है। यह प्रक्रिया काफी जटिल है और संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करने के बाद राष्ट्रपति के आदेश पर ही हटाया जा सकता है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान तरीके से ही हटाया जाता है (अनुच्छेद 148)। अतः, विकल्प (d) सही है।
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‘न्यायिक समीक्षा’ की अवधारणा भारत के संविधान में किस देश से ली गई है?
a) यूनाइटेड किंगडम
b) आयरलैंड
c) संयुक्त राज्य अमेरिका
d) कनाडासही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) की अवधारणा संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से ली गई है। न्यायिक समीक्षा वह शक्ति है जिसके तहत न्यायपालिका संसद द्वारा पारित कानूनों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच कर सकती है। यदि वे संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो न्यायालय उन्हें शून्य और अमान्य घोषित कर सकता है। भारत में अनुच्छेद 13, 32, 131, 132, 133, 134, 136, 143, 226 और 227 न्यायिक समीक्षा से संबंधित हैं।
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केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित ‘सरकारीया आयोग’ का गठन किस वर्ष किया गया था?
a) 1969
b) 1983
c) 1991
d) 2007सही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: केंद्र-राज्य संबंधों पर विचार करने और सुझाव देने के लिए न्यायमूर्ति आर.एस. सरकारीया की अध्यक्षता में ‘सरकारीया आयोग’ का गठन जून 1983 में किया गया था। इस आयोग ने 1987 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और 247 सिफारिशें कीं। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति और जिम्मेदारियों के बेहतर संतुलन के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करना था।
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भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) का कार्यकाल कितना होता है?
a) 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
b) 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
c) 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
d) राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंतसही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India) में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले पूरा हो। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान तरीके से ही हटाया जा सकता है।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों को कौन नियुक्त करता है?
a) प्रधानमंत्री
b) राष्ट्रपति
c) संसद
d) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशसही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वे 6 वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करते हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा हटाया भी जा सकता है, लेकिन इसके लिए एक विशेष प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का मुख्य कार्य क्या है?
a) केंद्र सरकार के लिए राजस्व एकत्र करना
b) संसद के लिए कानून बनाना
c) भारत सरकार के सभी वित्तीय लेनदेन का ऑडिट करना
d) राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति करनासही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी वित्तीय लेनदेन (राजस्व और व्यय दोनों) का ऑडिट करना है। CAG ‘सार्वजनिक पर्स का संरक्षक’ और देश की संपूर्ण वित्तीय प्रणाली का मुख्य लेखा परीक्षक होता है। वह अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उसे संसद के समक्ष रखवाता है।
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वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन कितने वर्षों के अंतराल पर किया जाता है?
a) 2 वर्ष
b) 3 वर्ष
c) 4 वर्ष
d) 5 वर्षसही उत्तर: d)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग एक अर्ध-न्यायिक निकाय है। इसका गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल पर या उससे पहले भी किया जा सकता है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण और भारत की संचित निधि से राज्यों को सहायता अनुदान के सिद्धांतों पर सिफारिशें करना है।
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निम्नलिखित में से कौन सा एक संवैधानिक निकाय नहीं है?
a) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
b) भारत का चुनाव आयोग
c) संघ लोक सेवा आयोग
d) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षकसही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसका गठन संसद के अधिनियम (मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993) द्वारा किया गया है। इसका उल्लेख संविधान में नहीं है। जबकि, भारत का चुनाव आयोग (अनुच्छेद 324), संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315-323) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (अनुच्छेद 148-151) सभी संवैधानिक निकाय हैं, जिनका उल्लेख सीधे भारतीय संविधान में किया गया है।
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भारत में पंचायती राज व्यवस्था को किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया?
a) 73वां संशोधन अधिनियम, 1992
b) 74वां संशोधन अधिनियम, 1992
c) 42वां संशोधन अधिनियम, 1976
d) 61वां संशोधन अधिनियम, 1989सही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने भारत में पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया। इसने संविधान में एक नया भाग IX और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय शामिल हैं (अनुच्छेद 243 से 243-O)। इस संशोधन ने ग्रामीण स्थानीय स्वशासन के लिए एक त्रि-स्तरीय प्रणाली (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) की स्थापना को अनिवार्य कर दिया।
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भारतीय संविधान की किस अनुसूची में शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं?
a) नौवीं अनुसूची
b) दसवीं अनुसूची
c) ग्यारहवीं अनुसूची
d) बारहवीं अनुसूचीसही उत्तर: d)
विस्तृत व्याख्या: 74वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा दिया। इसने संविधान में एक नया भाग IX-A और बारहवीं अनुसूची जोड़ी। बारहवीं अनुसूची में नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं (अनुच्छेद 243-P से 243-ZG)। नौवीं अनुसूची कुछ अधिनियमों और विनियमों के सत्यापन से संबंधित है। दसवीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून से संबंधित है। ग्यारहवीं अनुसूची पंचायती राज से संबंधित है।
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भारत में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?
a) अनुच्छेद 352
b) अनुच्छेद 356
c) अनुच्छेद 360
d) अनुच्छेद 365सही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान के भाग XVIII में आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352-360) शामिल हैं। अनुच्छेद 352 राष्ट्रपति को युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता (राष्ट्रपति शासन) से संबंधित है। अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है। अनुच्छेद 365 कहता है कि यदि कोई राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन करने या उन्हें प्रभावी करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति के लिए यह मान लेना वैध होगा कि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है।
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शिक्षा का अधिकार (Right to Education) को भारतीय संविधान में किस संशोधन द्वारा मौलिक अधिकार बनाया गया?
a) 86वां संशोधन अधिनियम, 2002
b) 91वां संशोधन अधिनियम, 2003
c) 97वां संशोधन अधिनियम, 2011
d) 101वां संशोधन अधिनियम, 2016सही उत्तर: a)
विस्तृत व्याख्या: 86वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 ने शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया। इस संशोधन ने संविधान में एक नया अनुच्छेद 21A जोड़ा, जिसमें 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। इसने अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 51A (मौलिक कर्तव्य) में भी संशोधन किया।
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केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय संविधान की किस अवधारणा को प्रतिपादित किया था?
a) न्यायिक सक्रियता
b) मूल ढांचा सिद्धांत (Basic Structure Doctrine)
c) जनहित याचिका
d) संसदीय संप्रभुतासही उत्तर: b)
विस्तृत व्याख्या: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामला (1973) भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस ऐतिहासिक फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने “संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत” को प्रतिपादित किया। न्यायालय ने यह फैसला सुनाया कि संसद के पास संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधित करने की शक्ति है, लेकिन वह संविधान के मूल ढांचे को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। इस सिद्धांत ने संविधान की सर्वोच्चता और उसके मौलिक मूल्यों की रक्षा की।
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भारतीय संविधान में एकल नागरिकता (Single Citizenship) का प्रावधान किस देश के संविधान से प्रेरित है?
a) संयुक्त राज्य अमेरिका
b) स्विट्जरलैंड
c) यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन)
d) कनाडासही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान में एकल नागरिकता का प्रावधान यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के संविधान से लिया गया है। भारत में, एक व्यक्ति केवल भारत का नागरिक हो सकता है, राज्यों का नहीं। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे संघीय देशों में दोहरी नागरिकता की प्रणाली है (संघ और राज्य दोनों की नागरिकता)। एकल नागरिकता राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देती है।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित निम्नलिखित में से कौन सा आदर्श भारत को एक ऐसा राज्य बनाने का संकेत देता है जहाँ सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान दर्जा प्राप्त हो?
a) न्याय
b) स्वतंत्रता
c) समानता
d) बंधुत्वसही उत्तर: c)
विस्तृत व्याख्या: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में “समानता” का आदर्श भारत को एक ऐसा राज्य बनाने का संकेत देता है जहाँ सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान दर्जा और अवसर प्राप्त हों। प्रस्तावना तीन प्रकार के न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक), पांच प्रकार की स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना), और दो प्रकार की समानता (प्रतिष्ठा और अवसर) की गारंटी देती है। बंधुत्व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। ये सभी आदर्श मिलकर भारत के लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव बनाते हैं।
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