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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: संसद सत्र के बीच भारत के इतिहास में पहली बार!

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: संसद सत्र के बीच भारत के इतिहास में पहली बार!

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

हाल ही में, भारत के उपराष्ट्रपति, श्री जगदीप धनखड़ ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इस इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों को बताया गया है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संसद के एक सत्र के बीच हुआ है और ऐसा करने वाले श्री धनखड़ भारत के इतिहास में पहले उपराष्ट्रपति हैं। उनका यह अप्रत्याशित कदम देश के संवैधानिक इतिहास में एक नई मिसाल कायम करता है और कई महत्त्वपूर्ण संवैधानिक तथा राजनीतिक प्रश्न खड़े करता है। यह न केवल संवैधानिक प्रावधानों की गहन समीक्षा की मांग करता है, बल्कि उपराष्ट्रपति के पद की महत्ता और उसके भविष्य पर भी रोशनी डालता है।

यह घटना क्यों महत्वपूर्ण है? (Why is this event significant?)

जगदीप धनखड़ का इस्तीफा कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण है:

  1. अभूतपूर्व घटना: भारत के 75 वर्षों से अधिक के संवैधानिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान पद से इस्तीफा दिया है, विशेषकर तब जब संसद का सत्र चल रहा हो। यह एक ऐसा precedent है जो भविष्य के लिए मायने रखेगा।
  2. संवैधानिक निहितार्थ: उपराष्ट्रपति का पद भारत के संविधान में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उनके इस्तीफे से उत्पन्न होने वाली रिक्ति और उसे भरने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार संचालित होती है, जिसकी गहन समझ आवश्यक है।
  3. राज्यसभा पर प्रभाव: उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उनके इस्तीफे से राज्यसभा के संचालन और उसकी बैठकों पर तत्काल प्रभाव पड़ेगा, जब तक कि नए सभापति का चुनाव नहीं हो जाता।
  4. राजनीतिक समय: संसद सत्र के बीच इस्तीफा देना, जब देश महत्वपूर्ण विधेयकों और बहसों से गुजर रहा हो, राजनीतिक गलियारों में अटकलों को जन्म देता है। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों को बताया गया है, फिर भी समय का चयन महत्वपूर्ण है।
  5. भविष्य की परंपराएँ: यह घटना भविष्य में ऐसे उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए एक नई परंपरा स्थापित कर सकती है, खासकर इस्तीफे के कारणों और समय को लेकर।

उपराष्ट्रपति का पद: संवैधानिक प्रावधान और भूमिका (The Office of Vice President: Constitutional Provisions and Role)

भारत का उपराष्ट्रपति पद देश के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों में से एक है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति के पद से प्रेरित है। यह पद देश में राजनीतिक और संवैधानिक स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions):

  • अनुच्छेद 63: भारत का उपराष्ट्रपति

    भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।

    यह अनुच्छेद स्पष्ट रूप से भारत में उपराष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है, जो राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।

  • अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना

    उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा।

    यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का अध्यक्ष बनाता है। इस भूमिका में, वे सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं, अनुशासन बनाए रखते हैं और सदन के नियमों की व्याख्या करते हैं।

  • अनुच्छेद 65: राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके कृत्यों का निर्वहन
    यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने या उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने का अधिकार देता है जब राष्ट्रपति का पद उनकी मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्युति या अन्य किसी कारण से रिक्त हो जाए, या जब राष्ट्रपति अपनी अनुपस्थिति, बीमारी या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हों। इस दौरान, उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और प्रतिरक्षाएँ प्राप्त होती हैं।
  • अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
    उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले एक निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है। यह चुनाव गुप्त मतदान द्वारा होता है।
  • अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति की पदावधि
    उपराष्ट्रपति पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है। वे राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकते हैं। उन्हें राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, जिसे लोकसभा भी स्वीकार करती है।
  • अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने वाले व्यक्ति की पदावधि
    उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति से हुई रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। यदि मृत्यु, त्यागपत्र या पदच्युति के कारण रिक्ति होती है, तो निर्वाचन यथाशीघ्र (as soon as possible) किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
    उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेते हैं।

योग्यताएँ (Qualifications):

उपराष्ट्रपति चुने जाने के लिए व्यक्ति को निम्नलिखित योग्यताएँ पूरी करनी होती हैं:

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • उसने 35 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो।
  • वह राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के लिए योग्य हो।
  • वह संघ या किसी राज्य सरकार के अधीन या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन लाभ का कोई पद धारण न करता हो।

शक्तियाँ और कार्य (Powers and Functions):

उपराष्ट्रपति के मुख्य कार्य दोहरी प्रकृति के होते हैं:

  1. राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में:
    • वे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
    • सदन में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखते हैं।
    • विधेयकों और प्रस्तावों पर मतदान की अनुमति देते हैं।
    • किसी विधेयक पर समान मत होने पर निर्णायक मत (casting vote) का प्रयोग करते हैं।
    • सदन के नियमों की व्याख्या करते हैं।
  2. कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में:
    जब राष्ट्रपति का पद रिक्त हो (मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्युति, या अन्य कारण से), या जब राष्ट्रपति अनुपस्थित हों, बीमार हों, या अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं या उनके कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। इस अवधि के दौरान, उन्हें राष्ट्रपति के सभी विशेषाधिकार, परिलब्धियाँ और भत्ते प्राप्त होते हैं।

इस्तीफे की प्रक्रिया: संवैधानिक दृष्टिकोण (Resignation Process: Constitutional Perspective)

भारत के उपराष्ट्रपति के त्यागपत्र की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67(क) में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।

अनुच्छेद 67(क) के अनुसार:

उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।

इसका सीधा अर्थ है कि उपराष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र लिखित रूप में तैयार करना होगा और उसे भारत के राष्ट्रपति को संबोधित करना होगा। यह एक औपचारिक प्रक्रिया है जो संवैधानिक पद की गरिमा और महत्व को दर्शाती है।

त्यागपत्र की स्वीकार्यता:
एक बार त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप दिए जाने के बाद, उसे स्वीकार किया जाता है और पद रिक्त घोषित कर दिया जाता है। इस्तीफे के लिए किसी अनुमोदन या स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है; यह एक स्वैच्छिक और एकतरफा कार्य है। जैसे ही राष्ट्रपति को त्यागपत्र प्राप्त होता है, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त माना जाता है।

त्यागपत्र के बाद पद की रिक्ति:
उपराष्ट्रपति के त्यागपत्र से पद रिक्त हो जाता है। इस रिक्ति को भरने के लिए नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना अनिवार्य हो जाता है। अनुच्छेद 68(2) में कहा गया है कि रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन “यथाशीघ्र” (as soon as possible) किया जाएगा। संविधान में उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा (जैसे राष्ट्रपति के लिए 6 महीने) निर्धारित नहीं है। इसका निहितार्थ यह है कि चुनाव प्रक्रिया को बिना किसी अनावश्यक देरी के शुरू किया जाना चाहिए।

इस्तीफे का समय और उसका प्रभाव:

श्री जगदीप धनखड़ का इस्तीफा संसद सत्र के बीच आया है। हालांकि संवैधानिक रूप से इससे कोई बाधा नहीं आती, यह कुछ तात्कालिक कार्यात्मक निहितार्थ पैदा करता है:

  • राज्यसभा का संचालन: चूंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, उनके इस्तीफे से यह पद रिक्त हो गया है। ऐसी स्थिति में, राज्यसभा के उप-सभापति सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं। यदि उप-सभापति का पद भी रिक्त हो, तो राष्ट्रपति किसी अन्य सदस्य को कार्यवाहक सभापति नियुक्त कर सकते हैं।
  • विधायी कार्य: संसद सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक और बहसें होती हैं। सभापति की भूमिका इन कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण होती है। हालांकि उप-सभापति यह कार्य संभाल सकते हैं, लेकिन पूर्णकालिक सभापति की अनुपस्थिति एक विशेष स्थिति है।

यह प्रक्रिया दर्शाती है कि भारतीय संविधान ने उच्च संवैधानिक पदों पर रिक्ति की स्थिति में भी शासन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट तंत्र स्थापित किए हैं।

जगदीप धनखड़: एक संक्षिप्त परिचय (Jagdeep Dhankhar: A Brief Profile)

श्री जगदीप धनखड़, जिन्होंने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया, एक अनुभवी राजनेता और कानूनविद हैं। उनके इस्तीफे ने उनके संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण कार्यकाल को समाप्त कर दिया।

  • जन्म और प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गाँव में हुआ था।
  • शिक्षा और कानूनी पृष्ठभूमि: उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से पूरी की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। बाद में, उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री (एलएलबी) प्राप्त की। वे राजस्थान उच्च न्यायालय और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक सफल वकील रहे हैं। वे राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष भी रहे हैं।
  • राजनीतिक जीवन की शुरुआत: धनखड़ ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की। वे 1989 में झुंझुनू से लोकसभा के लिए चुने गए और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • पार्टी संबद्धता: बाद में, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
  • पश्चिम बंगाल के राज्यपाल: उपराष्ट्रपति बनने से पहले, वे जुलाई 2019 से जुलाई 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल राज्य सरकार के साथ अक्सर तनावपूर्ण संबंधों के लिए जाना जाता था।
  • उपराष्ट्रपति पद: 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में, उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराकर भारत के 14वें उपराष्ट्रपति का पद संभाला था। उन्होंने 11 अगस्त 2022 को पदभार ग्रहण किया था।
  • राज्यसभा सभापति: उपराष्ट्रपति के रूप में, वे राज्यसभा के पदेन सभापति भी थे, जहाँ उन्होंने सदन की कार्यवाही का संचालन किया।

श्री धनखड़ का राजनीतिक करियर सार्वजनिक सेवा और संवैधानिक पदों पर अनुभव का मिश्रण रहा है। उनके इस्तीफे ने उनके उल्लेखनीय करियर के एक अध्याय का अंत कर दिया है।

इस्तीफे के संभावित निहितार्थ और विश्लेषण (Potential Implications and Analysis of the Resignation)

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा, विशेष रूप से संसद सत्र के बीच, कई संभावित निहितार्थ रखता है, भले ही इसके पीछे आधिकारिक कारण स्वास्थ्य बताया गया हो। एक गहन विश्लेषण इन पहलुओं पर प्रकाश डालता है:

1. संवैधानिक परंपरा पर प्रभाव:

  • पूर्व उदाहरणों का अभाव: जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, भारत के इतिहास में किसी भी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान पद से इस्तीफा नहीं दिया है। यह एक महत्वपूर्ण precedent स्थापित करता है। क्या यह भविष्य में उच्च संवैधानिक पदों पर इस्तीफे के लिए एक सामान्य चलन बन सकता है?
  • संविधान की जीवंतता: यह घटना एक बार फिर भारतीय संविधान की जीवंतता और अनुकूलनशीलता को दर्शाती है। संविधान ने ऐसी स्थितियों के लिए प्रक्रियात्मक ढांचा प्रदान किया है, जो संकट के बजाय एक सुचारु संक्रमण सुनिश्चित करता है।

2. राजनीतिक परिदृश्य:

  • समय का महत्व: संसद सत्र के बीच इस्तीफा देना राजनीतिक गलियारों में हमेशा अटकलों को जन्म देता है, भले ही आधिकारिक कारण स्पष्ट हों। विपक्षी दल और मीडिया अक्सर इसके पीछे के छिपे हुए कारणों की तलाश करते हैं।
  • सत्ताधारी दल पर प्रभाव: उपराष्ट्रपति सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार होते हैं। उनके इस्तीफे से राजनीतिक समीकरणों पर तात्कालिक या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। हालांकि, यह पद राजनीतिक रूप से सीधे तौर पर नीति-निर्माण से जुड़ा नहीं है, फिर भी इसकी सांकेतिक महत्ता होती है।
  • नेतृत्व रिक्ति: राज्यसभा के सभापति का पद रिक्त होने से संसद के ऊपरी सदन में अस्थायी रूप से नेतृत्व में बदलाव आया है। उप-सभापति अब सदन का संचालन करेंगे, लेकिन यह स्थिति नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक ही रहेगी।

3. राज्यसभा का संचालन:

  • राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे सदन में बहस को नियंत्रित करते हैं, अनुशासन बनाए रखते हैं और विधायी प्रक्रिया को सुचारु बनाते हैं।
  • हालांकि उप-सभापति इस भूमिका को प्रभावी ढंग से निभा सकते हैं, लेकिन एक पूर्णकालिक और स्थायी सभापति की अनुपस्थिति सदन के दीर्घकालिक कामकाज पर सूक्ष्म प्रभाव डाल सकती है, खासकर जब सदन में हंगामे और गतिरोध की स्थिति हो।

4. चुनाव आयोग की भूमिका:

  • इस्तीफे के बाद, भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) पर जल्द से जल्द नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का दायित्व आ जाता है। चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करनी होगी, चुनाव की तारीखें घोषित करनी होंगी और पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराना होगा।

5. ‘स्वास्थ्य कारण’ की पड़ताल:

हालांकि स्वास्थ्य को इस्तीफे का कारण बताया गया है, ऐसे उच्च पदों पर इस्तीफे के पीछे अक्सर कई जटिल कारक हो सकते हैं। एक संतुलित दृष्टिकोण यह है कि हमें दिए गए कारण का सम्मान करना चाहिए, लेकिन साथ ही सार्वजनिक डोमेन में मौजूद राजनीतिक और संवैधानिक संदर्भ पर भी विचार करना चाहिए।

कुल मिलाकर, यह इस्तीफा भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल है। यह न केवल वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभाव डालता है बल्कि भविष्य में संवैधानिक पदों से संबंधित परंपराओं और प्रक्रियाओं को भी आकार दे सकता है।

क्या पहले भी ऐसा हुआ है? ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (Has this happened before? Historical Perspective)

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अपने कार्यकाल के दौरान पद से इस्तीफा देना भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है। आइए इस तथ्य को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें:

भारत के उपराष्ट्रपति के पद के संबंध में:

  • यह पहला मामला है: भारत में 1952 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पहले उपराष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक (धनखड़ के इस्तीफे से पहले) किसी भी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा नहीं दिया था।
    • अधिकांश उपराष्ट्रपति या तो अपना पूर्ण पाँच साल का कार्यकाल पूरा करते हैं या राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के बाद पद छोड़ते हैं (जैसे डॉ. राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन, वी.वी. गिरि, आर. वेंकटरमन, शंकर दयाल शर्मा, के.आर. नारायणन)।
    • कुछ उपराष्ट्रपति (जैसे बसप्पा दानप्पा जत्ती) ने अस्थायी रूप से राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया, लेकिन उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं दिया।
  • यह तथ्य ही धनखड़ के इस्तीफे को ऐतिहासिक रूप से अद्वितीय बनाता है। यह पहली बार है कि इस उच्च संवैधानिक पद पर कार्यकाल के बीच में, किसी स्वास्थ्य या व्यक्तिगत कारण से, रिक्ति उत्पन्न हुई है।

अन्य संवैधानिक पदों पर इस्तीफे की तुलना:

हालांकि उपराष्ट्रपति का इस्तीफा अभूतपूर्व है, भारत में अन्य उच्च संवैधानिक पदों से इस्तीफे के उदाहरण मिलते हैं:

  • राष्ट्रपति का इस्तीफा: भारत के इतिहास में केवल एक राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा दिया है – श्री फखरुद्दीन अली अहमद (हालांकि उनकी मृत्यु हुई थी) और श्री नीलम संजीव रेड्डी (इन्होंने लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था)। राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने वाले एकमात्र व्यक्ति श्री वी.वी. गिरि थे, जिन्होंने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अपना पद छोड़ा था, लेकिन यह उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं था। (यह तथ्यात्मक त्रुटि हो सकती है, वी.वी. गिरि ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पद छोड़ा था, राष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं दिया था। भारत के इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा नहीं दिया है।)

    सुधार: भारत के किसी भी राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा नहीं दिया है। फखरुद्दीन अली अहमद और ज़ाकिर हुसैन का निधन कार्यकाल के दौरान हुआ था। वी.वी. गिरि ने 1969 में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभालने के बाद, चुनाव लड़ने के लिए उस पद से इस्तीफा दिया था, न कि नियमित राष्ट्रपति के रूप में।
  • प्रधानमंत्री का इस्तीफा: कई प्रधानमंत्रियों ने अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा दिया है, खासकर जब वे लोकसभा में बहुमत खो देते हैं या राजनीतिक कारणों से। उदाहरण के लिए, मोरारजी देसाई, चरण सिंह, वी.पी. सिंह, एच.डी. देवेगौड़ा, अटल बिहारी वाजपेयी।
  • लोकसभा अध्यक्ष का इस्तीफा: लोकसभा अध्यक्ष भी अपना इस्तीफा दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, नीलम संजीव रेड्डी ने 1977 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।
  • उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का इस्तीफा: न्यायाधीश भी राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा दे सकते हैं।

उपरोक्त तुलना दर्शाती है कि जबकि अन्य संवैधानिक पदों से इस्तीफे आम रहे हैं, उपराष्ट्रपति का इस्तीफा एक दुर्लभ और पहली बार होने वाली घटना है। यह इस पद की स्थिरता और भारत की संवैधानिक मशीनरी की निरंतरता को दर्शाता है। धनखड़ का इस्तीफा एक नया अध्याय जोड़ता है, जिसके लिए संविधान ने पहले से ही आवश्यक तंत्र प्रदान किए हैं ताकि सत्ता का निर्बाध हस्तांतरण सुनिश्चित हो सके।

आगे की राह और भविष्य की संभावनाएँ (The Way Forward and Future Prospects)

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद, अगला महत्वपूर्ण कदम नए उपराष्ट्रपति का चुनाव है। भारतीय संविधान ने इस प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

1. नए उपराष्ट्रपति का चुनाव:

  • अनुच्छेद 68(2) के अनुसार:

    उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, मृत्यु, त्यागपत्र या पदच्युति या अन्य कारण से हुई रिक्ति को भरने के लिए, रिक्ति होने के पश्चात् यथाशीघ्र किया जाएगा।

    यहाँ ‘यथाशीघ्र’ (as soon as possible) वाक्यांश महत्वपूर्ण है। यह राष्ट्रपति के चुनाव की तरह 6 महीने की विशिष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि चुनाव प्रक्रिया को बिना किसी अनावश्यक देरी के शुरू किया जाना चाहिए।

  • चुनाव प्रक्रिया:
    • भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
    • यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
    • मतदान गुप्त होता है।
    • भारत का चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) इस चुनाव को आयोजित करने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • मुख्य चरण:
    1. चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की अधिसूचना जारी करना।
    2. नामांकन दाखिल करना।
    3. नामांकनों की जाँच।
    4. उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि।
    5. मतदान (यदि आवश्यक हो)।
    6. मतगणना और परिणाम की घोषणा।

2. राज्यसभा का संचालन:

  • जब तक नया उपराष्ट्रपति चुना नहीं जाता, राज्यसभा का संचालन उप-सभापति द्वारा किया जाएगा। यदि उप-सभापति भी अनुपस्थित हों, तो राष्ट्रपति राज्यसभा के किसी अन्य सदस्य को अस्थायी रूप से सदन की अध्यक्षता करने के लिए नियुक्त कर सकते हैं।
  • यह सुनिश्चित करेगा कि विधायी कार्य, बहसें और सदन का अन्य कामकाज निर्बाध रूप से जारी रहे।

3. संभावित उम्मीदवार और राजनीतिक समीकरण:

  • सत्तारूढ़ दल, अपने संख्या बल को देखते हुए, अपना उम्मीदवार प्रस्तुत करेगा। विपक्ष भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकता है, जैसा कि पिछली बार हुआ था।
  • उपराष्ट्रपति का चुनाव आमतौर पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में जाता है क्योंकि उनके पास संसद के दोनों सदनों में सदस्यों की संख्या अधिक होती है।
  • यह चुनाव भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में एक और महत्वपूर्ण संवैधानिक अभ्यास होगा, जो संसद में विभिन्न दलों की सापेक्ष शक्ति को भी दर्शाएगा।

4. संवैधानिक रिक्ति को भरने का महत्व:

  • उपराष्ट्रपति का पद न केवल राज्यसभा के सभापति के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रपति के बाद दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद के रूप में भी इसकी अपनी गरिमा है। यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति के पद में किसी भी आकस्मिक रिक्ति की स्थिति में एक सक्षम कार्यवाहक उपलब्ध हो।
  • इसलिए, इस रिक्ति को यथाशीघ्र भरना भारतीय संवैधानिक ढांचे की निरंतरता और मजबूती के लिए आवश्यक है।

कुल मिलाकर, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने भारतीय राजनीतिक और संवैधानिक तंत्र में एक नया चरण शुरू किया है। हालाँकि यह एक अभूतपूर्व घटना है, भारत का संविधान ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए एक मजबूत और स्पष्ट ढाँचा प्रदान करता है, जिससे सत्ता का निर्बाध और संवैधानिक हस्तांतरण सुनिश्चित होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का संसद सत्र के बीच पद से इस्तीफा देना भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण घटना है। यद्यपि स्वास्थ्य कारणों को इस निर्णय के पीछे का कारण बताया गया है, यह पहला अवसर है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान पद छोड़ा है। यह घटना हमें भारतीय संविधान के गहन और सुविचारित प्रावधानों की याद दिलाती है, जो ऐसी आकस्मिक परिस्थितियों में भी सत्ता के निर्बाध हस्तांतरण और संवैधानिक निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।

यह इस्तीफा न केवल उपराष्ट्रपति के पद की संवैधानिक गरिमा और कार्यों पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि राज्यसभा के संचालन और नए उपराष्ट्रपति के ‘यथाशीघ्र’ चुनाव की प्रक्रिया को भी प्रकाश में लाता है। यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण है कि ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव बिना किसी संवैधानिक संकट के, स्थापित नियमों और परंपराओं के अनुसार होते हैं। आने वाले समय में, नए उपराष्ट्रपति का चुनाव भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रणाली की अंतर्निहित शक्ति को एक बार फिर प्रदर्शित करेगा, जो किसी भी आकस्मिक रिक्ति को भरने में सक्षम है और राष्ट्र के शासन को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs

निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही विकल्प चुनें:

1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
  2. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
  3. उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों का मत भी शामिल होता है।

उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 2 और 3

उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत) से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, न कि केवल निर्वाचित सदस्यों द्वारा।
कथन 2 सही है। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
कथन 3 गलत है। उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते हैं। ये केवल राष्ट्रपति के चुनाव में शामिल होते हैं।

2. भारत के उपराष्ट्रपति के पद के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
  2. उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है जब राष्ट्रपति का पद मृत्यु या त्यागपत्र से रिक्त हो जाता है।
  3. संविधान उपराष्ट्रपति को हटाए जाने के लिए कोई आधार निर्दिष्ट नहीं करता है।

सही विकल्प चुनें:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन 1 सही है (अनुच्छेद 64)।
कथन 2 सही है (अनुच्छेद 65)।
कथन 3 सही है। संविधान उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए कोई विशिष्ट आधार (जैसे ‘संविधान का उल्लंघन’ राष्ट्रपति के लिए) निर्दिष्ट नहीं करता है, बस ‘राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव’ जिसे लोकसभा स्वीकार करे।

3. भारतीय संविधान के निम्नलिखित अनुच्छेदों में से कौन सा उपराष्ट्रपति के इस्तीफे से संबंधित है?
(a) अनुच्छेद 63
(b) अनुच्छेद 65
(c) अनुच्छेद 67(क)
(d) अनुच्छेद 69

उत्तर: (c)
व्याख्या:
अनुच्छेद 67(क) कहता है कि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
अनुच्छेद 63 उपराष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 65 राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने से संबंधित है।
अनुच्छेद 69 उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान से संबंधित है।

4. यदि उपराष्ट्रपति का पद उनके त्यागपत्र के कारण रिक्त होता है, तो नए उपराष्ट्रपति का चुनाव:
(a) रिक्ति के 6 महीने के भीतर किया जाना चाहिए।
(b) रिक्ति के 3 महीने के भीतर किया जाना चाहिए।
(c) यथाशीघ्र किया जाना चाहिए, कोई विशिष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
(d) संसद द्वारा तय की गई तिथि पर किया जाना चाहिए।

उत्तर: (c)
व्याख्या: अनुच्छेद 68(2) में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन रिक्ति होने के पश्चात् “यथाशीघ्र” किया जाएगा। संविधान में कोई विशिष्ट समय-सीमा (जैसे राष्ट्रपति के लिए 6 महीने) निर्धारित नहीं है।

5. उपराष्ट्रपति बनने के लिए किसी व्यक्ति को निम्नलिखित में से कौन सी योग्यता पूरी करनी होती है?

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसने 30 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो।
  3. वह राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के लिए योग्य हो।
  4. वह लोकसभा का सदस्य चुने जाने के लिए योग्य हो।

सही विकल्प चुनें:
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 1, 2 और 3
(c) केवल 1 और 4
(d) केवल 1, 3 और 4

उत्तर: (a)
व्याख्या:
कथन 1 सही है।
कथन 2 गलत है। उपराष्ट्रपति बनने के लिए 35 वर्ष की आयु पूरी करनी होती है, न कि 30 वर्ष।
कथन 3 सही है। उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के लिए योग्य होना चाहिए।
कथन 4 गलत है। यह राष्ट्रपति के लिए आवश्यक योग्यता है, न कि उपराष्ट्रपति के लिए।

6. निम्नलिखित में से कौन सा कथन भारत के उपराष्ट्रपति के संबंध में गलत है?
(a) वह राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कृत्यों का निर्वहन करता है।
(b) वह राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करता है।
(c) वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद धारण करता है।
(d) उसके निर्वाचन में राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी भाग लेते हैं।

उत्तर: (d)
व्याख्या: कथन (d) गलत है। उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं, जबकि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य केवल राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेते हैं। अन्य सभी कथन सही हैं।

7. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए, निम्नलिखित में से किसकी आवश्यकता होती है?
(a) लोकसभा के बहुमत से पारित प्रस्ताव।
(b) राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव, जिसे लोकसभा भी स्वीकार करती है।
(c) संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव।
(d) सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राष्ट्रपति द्वारा।

उत्तर: (b)
व्याख्या: उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसे लोकसभा भी स्वीकार करती है (अनुच्छेद 67 ख)।

8. उपराष्ट्रपति के रूप में, जगदीप धनखड़ ने भारत के इतिहास में कौन सी अनूठी घटना दर्ज की है?
(a) वे सबसे कम उम्र के उपराष्ट्रपति थे।
(b) वे पहले उपराष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान संसद सत्र के बीच इस्तीफा दिया।
(c) वे पहले उपराष्ट्रपति थे जो गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से थे।
(d) वे पहले उपराष्ट्रपति थे जिन्हें निर्विरोध चुना गया था।

उत्तर: (b)
व्याख्या: जगदीप धनखड़ पहले उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान, विशेषकर संसद सत्र के बीच, पद से इस्तीफा दिया। यह एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व घटना है।

9. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद उपराष्ट्रपति को लाभ का कोई अन्य पद धारण करने से प्रतिबंधित करता है?
(a) अनुच्छेद 63
(b) अनुच्छेद 64
(c) अनुच्छेद 66
(d) अनुच्छेद 67

उत्तर: (b)
व्याख्या: अनुच्छेद 64 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उपराष्ट्रपति, राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा।

10. यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है और उपराष्ट्रपति भी अनुपस्थित हो या उपलब्ध न हो, तो राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन कौन करता है?
(a) भारत के मुख्य न्यायाधीश
(b) लोकसभा अध्यक्ष
(c) प्रधानमंत्री
(d) वरिष्ठतम कैबिनेट मंत्री

उत्तर: (a)
व्याख्या: यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है और उपराष्ट्रपति भी उपलब्ध न हो (जैसे मृत्यु, त्यागपत्र या अन्य कारणों से), तो भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। यदि मुख्य न्यायाधीश भी उपलब्ध न हों, तो सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश यह कार्यभार संभालते हैं। यह राष्ट्रपति (कृत्यों का निर्वहन) अधिनियम, 1969 द्वारा शासित होता है।

मुख्य परीक्षा (Mains)

1. भारत के उपराष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिकाओं और शक्तियों का विस्तार से वर्णन करें। हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के आलोक में, पद की आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए संवैधानिक तंत्र का विश्लेषण करें। (15 अंक, 250 शब्द)

2. “जगदीप धनखड़ का इस्तीफा भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है।” इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण करें और इस इस्तीफे के संभावित राजनीतिक और संवैधानिक निहितार्थों पर चर्चा करें। (10 अंक, 150 शब्द)

3. उपराष्ट्रपति के चुनाव, हटाने और पद की रिक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर प्रकाश डालें। भारत में इस पद की आवश्यकता और महत्व का मूल्यांकन करें। (15 अंक, 250 शब्द)

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