आधार, वोटर ID और राशन कार्ड: पहचान के लिए पर्याप्त नहीं? चुनाव आयोग का महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण
चर्चा में क्यों? (Why in News?):
हाल ही में, भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर यह स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) और राशन कार्ड को नागरिकता या चुनावी पंजीकरण के लिए ‘एकमात्र पहचान प्रमाण’ (Sole Identity Requirement – SIR) के रूप में नहीं माना जा सकता है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब देश में विभिन्न पहचान दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उनके विशिष्ट उपयोग को लेकर बहस तेज हो गई है। यह स्पष्टीकरण चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और नागरिकता के दायरे को परिभाषित करने में आयोग की सूक्ष्म दृष्टि को दर्शाता है।
मामले की जड़: चुनाव आयोग का रुख क्या है? (The Core Issue: What is EC’s Stance?)
चुनाव आयोग का यह रुख कोई नया नहीं है, बल्कि यह समय-समय पर विभिन्न संदर्भों में दोहराया गया है। इसका मूल संदेश यह है कि जबकि आधार, वोटर ID और राशन कार्ड व्यक्तियों की पहचान या विशिष्ट लाभ प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, वे भारत की नागरिकता या किसी व्यक्ति की चुनावी सूची में शामिल होने की पात्रता का एकमात्र प्रमाण नहीं हो सकते।
- नागरिकता बनाम निवास: आयोग ने रेखांकित किया है कि ये दस्तावेज मुख्य रूप से व्यक्ति के निवास स्थान या विशिष्ट सरकारी योजनाओं तक उसकी पहुँच को प्रमाणित करते हैं, न कि उसकी नागरिकता को।
- चुनावी प्रक्रिया की शुचिता: इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य चुनावी सूचियों में अवैध या अपात्र व्यक्तियों के शामिल होने की संभावना को रोकना है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
- बहु-स्तरीय सत्यापन की आवश्यकता: इसका निहितार्थ यह है कि चुनावी पंजीकरण या नागरिकता संबंधी मामलों के लिए अधिक पुख्ता और बहु-स्तरीय सत्यापन प्रक्रियाओं की आवश्यकता है।
आधार: पहचान का आधार, पर नागरिकता का नहीं (Aadhaar: Basis of Identity, but Not Citizenship)
क्या है आधार? (What is Aadhaar?)
आधार भारत सरकार द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India – UIDAI) के माध्यम से जारी किया गया एक 12-अंकीय विशिष्ट पहचान संख्या है। इसे बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा पर आधारित एक सार्वभौमिक पहचान प्रणाली के रूप में परिकल्पित किया गया था।
“आधार का उद्देश्य ‘निवासी की पहचान’ स्थापित करना है, न कि उसकी नागरिकता। यह किसी व्यक्ति के भारत में निवास करने का प्रमाण है, नागरिक होने का नहीं।”
आधार का उद्देश्य और सीमाएं:
- उद्देश्य: आधार का प्राथमिक उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता लाना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और विभिन्न सेवाओं तक पहुँच को सुगम बनाना है। यह किसी भी भारतीय नागरिक या भारत में 182 दिनों से अधिक समय तक निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
- नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं?:
- निवास-आधारित: आधार केवल भारत में निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। एक विदेशी नागरिक भी, यदि वह कुछ शर्तों को पूरा करता है, तो आधार प्राप्त कर सकता है।
- कोई नागरिकता सत्यापन नहीं: UIDAI आधार जारी करते समय नागरिकता की स्थिति का सत्यापन नहीं करता है। इसका फोकस व्यक्ति की विशिष्ट पहचान स्थापित करने पर है।
- स्वैच्छिक नामांकन: आधार नामांकन स्वैच्छिक है, और इसके बिना भी व्यक्ति भारतीय नागरिक हो सकता है।
आधार-वोटर ID लिंकेज का विवाद:
मतदाता सूची को आधार से जोड़ने का मुद्दा लंबे समय से बहस का विषय रहा है।
- समर्थन में तर्क:
- मतदाता सूची से डुप्लिकेट प्रविष्टियों (duplicate entries) को हटाना।
- फर्जी मतदाताओं की पहचान करना।
- चुनावी धोखाधड़ी को कम करना।
- चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बढ़ाना।
- विरोध में तर्क:
- निजता का उल्लंघन: निजता के अधिकार का उल्लंघन (जो अब संवैधानिक अधिकार है – पुट्टस्वामी केस)।
- मताधिकार से वंचित होना: आधार न होने या तकनीकी खराबी के कारण पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने का खतरा।
- नागरिकता का प्रमाण नहीं: चूंकि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसे मतदाता सूची से जोड़ने से अवैध नागरिक भी मतदाता बन सकते हैं।
चुनाव विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत, मतदाता सूची डेटा को आधार पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की अनुमति दी गई है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि यह लिंकेज स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। चुनाव आयोग का वर्तमान स्पष्टीकरण इस स्वैच्छिक प्रकृति और आधार की सीमाओं को और पुष्ट करता है।
मतदाता पहचान पत्र (EPIC): नागरिकता बनाम मतदान अधिकार (EPIC: Citizenship vs. Right to Vote)
क्या है EPIC?
इलेक्ट्रोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (Electoral Photo Identity Card – EPIC), जिसे आमतौर पर वोटर ID कार्ड के नाम से जाना जाता है, भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया एक पहचान पत्र है। यह पंजीकृत मतदाता को वोट डालने का अधिकार देता है और चुनाव के दिन पहचान के प्रमाण के रूप में कार्य करता है।
उद्देश्य और सीमाएं:
- उद्देश्य: EPIC का मुख्य उद्देश्य एक नागरिक को मतदान करने की अनुमति देना और चुनावी बूथ पर उसकी पहचान सुनिश्चित करना है। यह इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत है।
- नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं?:
- पंजीकरण-आधारित: मतदाता पहचान पत्र चुनावी रोल में पंजीकरण के बाद जारी किया जाता है। मतदाता सूची में नाम शामिल होने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है, लेकिन अतीत में, त्रुटियों या धोखाधड़ी के कारण गैर-नागरिकों के नाम भी सूची में शामिल हो सकते हैं।
- कोई नागरिकता सत्यापन नहीं: EPIC जारी करते समय, चुनाव आयोग स्वयं नागरिकता का गहन सत्यापन नहीं करता है, बल्कि यह मौजूदा रिकॉर्ड और आवेदक द्वारा प्रस्तुत घोषणा पर आधारित होता है।
- ऐतिहासिक त्रुटियाँ: मतदाता सूचियों में अक्सर नाम हटाने (deletion) और शामिल करने (inclusion) संबंधी त्रुटियाँ होती हैं, जिनमें कभी-कभी संदिग्ध नागरिकता वाले व्यक्तियों के नाम भी शामिल हो जाते हैं। असम में ‘डी-वोटर्स’ (Doubtful Voters) का मुद्दा इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
इसलिए, जबकि EPIC मतदान के लिए एक आवश्यक दस्तावेज है, यह अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, विशेषकर उन जटिल मामलों में जहाँ नागरिकता पर प्रश्न उठाया जाता है।
राशन कार्ड: खाद्य सुरक्षा का दस्तावेज, पहचान का नहीं (Ration Card: Food Security Document, Not Identity)
क्या है राशन कार्ड?
राशन कार्ड भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) के माध्यम से रियायती दरों पर खाद्य और अन्य वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए परिवारों की पात्रता को प्रमाणित करता है।
उद्देश्य और सीमाएं:
- उद्देश्य: राशन कार्ड का प्राथमिक उद्देश्य लक्षित परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर उन्हें सब्सिडी वाले खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।
- नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं?:
- राज्य-स्तरीय जारीकरण: राशन कार्ड राज्य सरकारों द्वारा जारी किए जाते हैं और मुख्य रूप से संबंधित राज्य में निवास के प्रमाण पर आधारित होते हैं।
- कोई नागरिकता सत्यापन नहीं: इन्हें जारी करते समय नागरिकता की स्थिति का सत्यापन नहीं किया जाता है। वे सिर्फ यह दर्शाते हैं कि एक परिवार एक निश्चित क्षेत्र में रहता है और खाद्य सब्सिडी के लिए पात्र है।
- परिवार-आधारित: यह एक परिवार-आधारित दस्तावेज है, न कि व्यक्तिगत पहचान का। इसमें परिवार के मुखिया और अन्य सदस्यों के नाम शामिल होते हैं।
- स्थानांतरण की संभावना: लोग राज्यों के बीच पलायन करते हैं, और राशन कार्ड निवास के परिवर्तन पर अपडेट किए जाते हैं, जो नागरिकता के बजाय निवास से अधिक जुड़ा है।
संक्षेप में, राशन कार्ड सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, लेकिन इसे नागरिकता या स्थायी पहचान के दस्तावेज के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है।
“SIR” का गूढ़ रहस्य: क्या यह “नागरिकता” का प्रमाण है? (The Mystery of “SIR”: Is it Proof of “Citizenship”?)
जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, “SIR” का अर्थ यहाँ “Sole Identity Requirement” या “Sole Proof of Identity/Citizenship” से है। चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण विशेष रूप से उन संदर्भों में महत्वपूर्ण हो जाता है जहाँ नागरिकता को लेकर सवाल उठते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) या संदिग्ध मतदाताओं की पहचान।
नागरिकता के असली प्रमाण क्या हैं?
भारत में नागरिकता नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके बाद के संशोधनों द्वारा शासित होती है। नागरिकता के असली प्रमाण वे दस्तावेज होते हैं जो व्यक्ति के जन्म स्थान, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण या भारतीय क्षेत्र में विलय के आधार पर उसकी नागरिकता सिद्ध करते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र (एक निश्चित अवधि के बाद जन्मे व्यक्तियों के लिए, कानून के अनुसार)
- भारतीय पासपोर्ट
- माता-पिता या दादा-दादी के जन्म/नागरिकता संबंधी दस्तावेज
- अधिवास (Domicile) प्रमाण पत्र
- नागरिकता पंजीकरण या प्राकृतिककरण प्रमाण पत्र
- सरकार द्वारा जारी अन्य आधिकारिक दस्तावेज जो विशिष्ट रूप से नागरिकता को प्रमाणित करते हैं।
चुनाव आयोग का यह बयान इस बात पर ज़ोर देता है कि आधार, EPIC और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज, जो निवास या सेवाओं तक पहुंच के लिए बनाए गए हैं, नागरिकता के इन मूल और व्यापक प्रमाणों का स्थान नहीं ले सकते।
भारत में चुनावी प्रक्रिया और पहचान सत्यापन की चुनौतियाँ (Challenges of Electoral Process and Identity Verification in India)
भारतीय चुनावी प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी और जटिल प्रणालियों में से एक है। पहचान सत्यापन में चुनाव आयोग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
- मतदाता सूची में त्रुटियाँ:
- डुप्लीकेशन: एक ही व्यक्ति का नाम कई निर्वाचन क्षेत्रों में या एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई बार होना।
- अपात्र व्यक्तियों का शामिल होना: मृतक मतदाताओं, प्रवास कर चुके व्यक्तियों या गैर-नागरिकों के नाम सूची में बने रहना।
- योग्य व्यक्तियों का छूटना: नए मतदाताओं या स्थानांतरित हुए व्यक्तियों का नाम सूची में शामिल न हो पाना।
- अवैध प्रवासन का प्रभाव: सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवासन से संबंधित चिंताएं अक्सर चुनावी सूचियों की शुचिता पर सवाल उठाती हैं। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होता है कि केवल पात्र भारतीय नागरिक ही मताधिकार का प्रयोग करें।
- तकनीकी एकीकरण: आधार जैसी तकनीकों का उपयोग करने में डेटा गोपनीयता, तकनीकी गड़बड़ियाँ और प्रणाली की विश्वसनीयता से संबंधित चिंताएँ हैं।
- मानवीय त्रुटि और धोखाधड़ी: पंजीकरण प्रक्रिया में मानवीय त्रुटियाँ, साथ ही धोखाधड़ी के इरादे से गलत जानकारी प्रस्तुत करना, सत्यापन प्रक्रिया को बाधित करता है।
- राजनीतिक हस्तक्षेप और दबाव: चुनावी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों का हस्तक्षेप भी पहचान सत्यापन को जटिल बना सकता है।
- जागरूकता का अभाव: नागरिकों में पहचान दस्तावेजों के विशिष्ट उपयोग और उनकी सीमाओं के बारे में जागरूकता की कमी भी एक चुनौती है।
चुनाव आयोग की भूमिका और शक्तियाँ (Role and Powers of the Election Commission)
भारत का चुनाव आयोग (ECI) एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत की गई है। इसका मुख्य कार्य भारत में चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करना है।
प्रमुख भूमिकाएँ और शक्तियाँ:
- चुनावी रोल तैयार करना और अद्यतन करना: आयोग को मतदाता सूचियों को तैयार करने, अद्यतन करने और उन्हें शुद्ध करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह सुनिश्चित करना इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि केवल योग्य नागरिक ही मतदाता सूची में हों।
- निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन: परिसीमन आयोग की सहायता से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण।
- चुनाव आचार संहिता: चुनाव के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आचार संहिता लागू करना।
- दलों का पंजीकरण और मान्यता: राजनीतिक दलों को पंजीकृत करना और उन्हें राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय दल के रूप में मान्यता देना।
- विवादों का निपटारा: चुनाव से संबंधित विवादों और शिकायतों का निपटारा करना।
- चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति: चुनाव आयोजित करने के लिए आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति और तैनाती।
चुनाव आयोग का यह नवीनतम स्पष्टीकरण उसकी व्यापक शक्तियों और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के उसके संवैधानिक दायित्व का एक हिस्सा है। यह आयोग की स्वायत्तता और किसी भी दस्तावेज़ या प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के उसके संकल्प को दर्शाता है।
आगे की राह (Way Forward)
चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के आलोक में, चुनावी प्रक्रिया और पहचान सत्यापन को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं:
- पहचान सत्यापन तंत्र को मजबूत करना:
- बहु-स्तरीय सत्यापन: चुनावी पंजीकरण के लिए केवल एक दस्तावेज के बजाय, विभिन्न दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के संयोजन का उपयोग करके मजबूत सत्यापन प्रणाली लागू करना।
- फील्ड सत्यापन: मतदाताओं के पते और नागरिकता की स्थिति को सत्यापित करने के लिए गहन फील्ड सत्यापन और घर-घर सर्वेक्षण को बढ़ाना।
- डेटा प्रबंधन में सुधार:
- आधार और वोटर ID लिंकेज का बुद्धिमानी से उपयोग: आधार-वोटर ID लिंकेज को डुप्लीकेशन हटाने के उपकरण के रूप में उपयोग करना, लेकिन इसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं मानना। निजता की चिंताओं को दूर करते हुए डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- विभिन्न डेटाबेस का एकीकरण: नागरिकता, जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड जैसे विभिन्न सरकारी डेटाबेस के बीच सुरक्षित और अंतर-प्रणालीगत (inter-operable) डेटा साझाकरण को बढ़ावा देना, जिससे सटीक जानकारी प्राप्त की जा सके।
- कानूनी और नीतिगत स्पष्टता:
- कानूनी ढांचे को मजबूत करना: नागरिकता और चुनावी पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर अधिक स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाना।
- निरंतर जागरूकता: नागरिकों को विभिन्न पहचान दस्तावेजों के दायरे और सीमाओं के बारे में शिक्षित करना।
- तकनीकी नवाचार:
- ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की खोज करना जो डेटा की अखंडता और सुरक्षा को बढ़ा सकती हैं।
- AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करके धोखाधड़ी वाले पैटर्न की पहचान करना।
- संस्थागत क्षमता निर्माण: चुनाव आयोग और उसके सहायक तंत्रों की क्षमता को बढ़ाना ताकि वे जटिल सत्यापन प्रक्रियाओं और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
“एक मजबूत लोकतंत्र की नींव एक सटीक और विश्वसनीय चुनावी रोल पर टिकी होती है। चुनाव आयोग का यह कदम इस नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।”
निष्कर्ष (Conclusion)
चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि पहचान और नागरिकता दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं, और एक दस्तावेज जो पहचान के लिए पर्याप्त हो सकता है, वह स्वचालित रूप से नागरिकता का प्रमाण नहीं बन जाता। यह कदम भारतीय चुनावी प्रणाली की शुचिता को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि मताधिकार का प्रयोग केवल पात्र भारतीय नागरिकों द्वारा किया जाए। यह भविष्य में नागरिकता और चुनावी सुधारों पर होने वाली बहसों के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है, जिससे भारत के लोकतंत्र को और अधिक मजबूत किया जा सके। यह यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए नागरिकता, चुनावी सुधारों, चुनाव आयोग की भूमिका और विभिन्न पहचान दस्तावेजों के कानूनी निहितार्थों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।
UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
-
प्रश्न 1: भारत के चुनाव आयोग (ECI) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह एक संवैधानिक निकाय है जिसका उल्लेख भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 में है।
- यह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का भी संचालन करता है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। अनुच्छेद 324 ECI की स्थापना करता है और इसे चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार देता है, जिसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी शामिल हैं। कथन 3 गलत है। CEC की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन इसके लिए किसी विशेष परामर्श की आवश्यकता नहीं होती है। यह सरकार की सलाह पर होता है। -
प्रश्न 2: आधार कार्ड के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही नहीं है?
(a) यह भारत में निवास का प्रमाण है।
(b) यह नागरिकता का भी प्रमाण है।
(c) इसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किया जाता है।
(d) यह एक 12-अंकीय विशिष्ट पहचान संख्या है।
उत्तर: (b)
व्याख्या: आधार कार्ड केवल भारत में निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। यह इसकी मूल अवधारणा में निहित है कि इसे कोई भी निवासी प्राप्त कर सकता है, चाहे उसकी नागरिकता कुछ भी हो, बशर्ते वह भारत में एक निश्चित अवधि तक रहा हो। -
प्रश्न 3: भारत में मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह भारतीय नागरिकता का प्राथमिक प्रमाण है।
- यह किसी व्यक्ति को मतदान करने का अधिकार देता है।
- इसे भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी किया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 2 और 3 सही हैं। EPIC मतदान के लिए एक आवश्यक दस्तावेज है और चुनाव आयोग द्वारा जारी किया जाता है। कथन 1 गलत है क्योंकि EPIC नागरिकता का प्राथमिक प्रमाण नहीं है; यह मुख्य रूप से मतदाता सूची में पंजीकरण का प्रमाण है। -
प्रश्न 4: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत जारी राशन कार्ड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
(a) यह एक व्यक्तिगत पहचान दस्तावेज है।
(b) यह भारत की नागरिकता का एकमात्र प्रमाण है।
(c) यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए पात्रता प्रदान करता है।
(d) इसे केंद्र सरकार द्वारा सीधे जारी किया जाता है।
उत्तर: (c)
व्याख्या: राशन कार्ड मुख्य रूप से NFSA के तहत खाद्य सुरक्षा लाभों के लिए पात्रता प्रदान करता है। यह परिवार-आधारित होता है, न कि व्यक्तिगत पहचान का दस्तावेज, और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इसे राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाता है। -
प्रश्न 5: चुनाव आयोग द्वारा आधार को मतदाता सूची से जोड़ने की पहल के प्राथमिक उद्देश्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- मतदाता सूची से डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाना।
- चुनावी धोखाधड़ी को कम करना।
- नागरिकता को सत्यापित करना।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। आधार-वोटर ID लिंकेज का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को साफ करना और चुनावी धोखाधड़ी को रोकना है। कथन 3 गलत है क्योंकि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है और इसका उपयोग नागरिकता सत्यापन के लिए नहीं किया जा सकता। -
प्रश्न 6: भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारत के चुनाव आयोग से संबंधित है?
(a) अनुच्छेद 280
(b) अनुच्छेद 315
(c) अनुच्छेद 324
(d) अनुच्छेद 338
उत्तर: (c)
व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग के गठन, शक्तियों और कार्यों से संबंधित है। अनुच्छेद 280 वित्त आयोग, अनुच्छेद 315 संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों, और अनुच्छेद 338 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से संबंधित है। -
प्रश्न 7: भारत में नागरिकता स्थापित करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा/से दस्तावेज़ अधिक पुख्ता प्रमाण माना जा सकता है/सकते हैं?
- आधार कार्ड
- भारतीय पासपोर्ट
- जन्म प्रमाण पत्र
- राशन कार्ड
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
(a) केवल 1 और 4
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (b)
व्याख्या: भारतीय पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र (कानूनी प्रावधानों के अनुसार) नागरिकता के अधिक पुख्ता प्रमाण हैं। आधार कार्ड और राशन कार्ड निवास या सेवाओं तक पहुँच के प्रमाण हैं, नागरिकता के नहीं। -
प्रश्न 8: चुनाव विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह मतदाता सूची डेटा को आधार पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की अनुमति देता है।
- इस अधिनियम के तहत आधार को मतदाता सूची से जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है।
- यह चुनाव आयोग को किसी भी परिसर में चुनाव से संबंधित किसी भी भौतिक सामग्री को जब्त करने का अधिकार देता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या: कथन 1 सही है। यह अधिनियम मतदाता सूची को आधार से जोड़ने की अनुमति देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह लिंकेज स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। कथन 3 इस अधिनियम का हिस्सा नहीं है। -
प्रश्न 9: भारत में ‘संदिग्ध मतदाता’ (Doubtful Voters या D-voters) पद का उपयोग मुख्य रूप से किस राज्य में किया जाता है?
(a) पश्चिम बंगाल
(b) असम
(c) बिहार
(d) ओडिशा
उत्तर: (b)
व्याख्या: ‘डी-वोटर्स’ शब्द का उपयोग मुख्य रूप से असम में उन व्यक्तियों के लिए किया जाता है जिनकी नागरिकता संदिग्ध है और जो विदेशी न्यायाधिकरणों द्वारा सत्यापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं। -
प्रश्न 10: भारत के चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) केवल केंद्रीय चुनावों का संचालन करना।
(b) भारत में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करना।
(c) राजनीतिक दलों को वित्त पोषण प्रदान करना।
(d) कानूनों का मसौदा तैयार करना।
उत्तर: (b)
व्याख्या: चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य भारत में संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना है। यह केवल केंद्रीय चुनावों तक सीमित नहीं है और न ही इसका कार्य राजनीतिक दलों को वित्त पोषण देना या कानूनों का मसौदा तैयार करना है।
मुख्य परीक्षा (Mains)
- “आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पहचान के महत्वपूर्ण उपकरण हैं, लेकिन वे भारत में नागरिकता का एकमात्र प्रमाण नहीं हो सकते।” इस कथन के आलोक में, भारत के चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण के निहितार्थों का विश्लेषण करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पहचान और नागरिकता के अंतर को स्पष्ट करें।
- भारत में चुनावी सूचियों की शुचिता बनाए रखने में चुनाव आयोग के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इन चुनौतियों का सामना करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका और निजता संबंधी चिंताओं को संतुलित करने के तरीकों पर चर्चा करें।
- “नागरिकता केवल संवैधानिक अधिकार ही नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के साथ व्यक्ति के मूल संबंधों का भी प्रतीक है।” इस संदर्भ में, विभिन्न सरकारी पहचान दस्तावेजों के उद्देश्य और उनकी सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण करें, विशेषकर नागरिकता साबित करने के संदर्भ में। चुनावी प्रक्रिया में इनके दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
- भारत में नागरिकता के निर्धारण और सत्यापन के लिए वर्तमान कानूनी ढांचे का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें। पहचान दस्तावेजों के संदर्भ में चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को देखते हुए, क्या आपको लगता है कि नागरिकता कानून में और सुधारों की आवश्यकता है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दें।
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