अप्रत्याशित इस्तीफा, चरम मौसम, और सड़क पर संघर्ष: भारत के लिए बड़े सवाल
चर्चा में क्यों? (Why in News?):
हाल ही में, देश ने एक साथ कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे, जिन्होंने राष्ट्रीय विमर्श में अपनी जगह बनाई। इनमें सबसे चौंकाने वाला था उपराष्ट्रपति का अचानक इस्तीफा। इसके साथ ही, देश के कई राज्यों में मानसून की अनियंत्रित बारिश ने कहर बरपाया, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने विभिन्न मुद्दों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। ये तीनों घटनाएँ, भले ही एक-दूसरे से सीधे जुड़ी न हों, लेकिन ये भारत के संवैधानिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय चुनौतियों और लोकतांत्रिक जीवंतता की एक साथ पड़ताल करने का अवसर प्रदान करती हैं। UPSC उम्मीदवार के तौर पर, इन घटनाओं को केवल सुर्खियों के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है; हमें इनके पीछे के संवैधानिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक निहितार्थों को गहराई से समझना होगा।
1. उपराष्ट्रपति का अचानक इस्तीफा: संवैधानिक निहितार्थ और राजनीतिक प्रभाव
उपराष्ट्रपति का पद: एक संवैधानिक स्तंभ
भारत का उपराष्ट्रपति पद संविधान द्वारा स्थापित एक गरिमामय और महत्वपूर्ण कार्यालय है। यह पद देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद का प्रतिनिधित्व करता है और कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है, जिनमें राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करना और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, त्यागपत्र, महाभियोग या मृत्यु की स्थिति में उनके कर्तव्यों का निर्वहन करना शामिल है।
“संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है; यह एक जीवित ग्रंथ है जो राष्ट्र की आत्मा और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है।”
संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 63 कहता है कि “भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।” यह पद अमेरिकी उपराष्ट्रपति के पद से प्रेरित है।
- अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा।
- अनुच्छेद 65: राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान, या राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा या उसके कृत्यों का निर्वहन करेगा।
- अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
- अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन वह इस अवधि के भीतर राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है। उसे राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, जिसे लोकसभा स्वीकार कर लेती है।
- अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए चुनाव रिक्ति होने के छह महीने के भीतर किया जाना चाहिए।
अचानक इस्तीफे के मायने
उपराष्ट्रपति का इस्तीफा, विशेष रूप से कार्यकाल पूरा होने से पहले, एक दुर्लभ और असाधारण घटना है। ऐसे इस्तीफे कई कारणों से हो सकते हैं:
- व्यक्तिगत कारण: स्वास्थ्य संबंधी या अन्य व्यक्तिगत प्रतिबद्धताएँ।
- राजनीतिक कारण: सरकार या पार्टी के भीतर मतभेद, नीतिगत असहमति, या किसी अन्य पद पर नियुक्त होने की संभावना।
- संवैधानिक मर्यादा: कुछ स्थितियों में, पद की गरिमा या संवैधानिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह आवश्यक हो सकता है।
एक अचानक इस्तीफे से उत्पन्न होने वाले प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं:
- संवैधानिक स्थायित्व पर प्रश्न: यद्यपि संविधान रिक्ति को भरने की प्रक्रिया प्रदान करता है, एक उच्च संवैधानिक पद का अचानक खाली होना एक निश्चित अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
- राजनीतिक अटकलें: ऐसे फैसलों के पीछे के वास्तविक कारणों पर अक्सर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ जाती है, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ सकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय छवि: वैश्विक स्तर पर, यह घटना देश की राजनीतिक स्थिरता और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज के बारे में धारणाओं को प्रभावित कर सकती है।
- उपचुनाव की आवश्यकता: पद रिक्त होने पर नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें समय और संसाधन लगते हैं।
आगे की राह: संवैधानिक पदों का सम्मान
यह घटना हमें संवैधानिक पदों की गरिमा और स्वतंत्रता के महत्व की याद दिलाती है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि ऐसे पदों पर नियुक्त व्यक्ति राजनीतिक दबावों से मुक्त होकर कार्य कर सकें और उनके पद छोड़ने या नियुक्त होने के निर्णय पूरी तरह से संवैधानिक नैतिकता और देश हित पर आधारित हों। यह लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
2. कई राज्यों में बारिश का कहर: जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन
क्यों हो रही है इतनी भीषण बारिश?
भारत में मॉनसून एक वार्षिक घटना है, लेकिन हाल के वर्षों में हमने इसकी प्रकृति में एक खतरनाक बदलाव देखा है। ‘सामान्य’ बारिश अब ‘चरम मौसमी घटनाओं’ में बदल रही है। कई राज्यों में रिकॉर्ड-तोड़ बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ अब आम होती जा रही हैं।
कारण:
- जलवायु परिवर्तन: यह सबसे बड़ा कारक है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है, जिससे वायुमंडल में अधिक नमी आ रही है। यह अधिक तीव्र और केंद्रित वर्षा का कारण बनता है।
- पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून का मेल: कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) और मॉनसून की हवाएँ एक साथ मिलकर भारी बारिश का कारण बनती हैं, खासकर उत्तरी पहाड़ी राज्यों में।
- शहरीकरण और अनियोजित विकास: शहरों में कंक्रीट के जंगल, जल निकासी प्रणालियों की कमी, और झीलों व तालाबों पर अतिक्रमण शहरी बाढ़ का कारण बनते हैं।
- वनों की कटाई: पहाड़ो में वनस्पति के आवरण की कमी से मिट्टी का कटाव बढ़ता है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और नदियाँ गाद से भर जाती हैं।
प्रभाव: एक बहुआयामी संकट
अत्यधिक बारिश का कहर सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक बहुआयामी संकट है:
- जनजीवन और संपत्ति का नुकसान: घरों का बहना, फसलों का नष्ट होना, जानमाल का नुकसान।
- आधारभूत संरचना पर प्रभाव: सड़कें, पुल, बिजली और संचार नेटवर्क का क्षतिग्रस्त होना।
- कृषि पर सीधा असर: खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है और खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडराता है।
- स्वास्थ्य संकट: बाढ़ के बाद जलजनित रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है।
- आर्थिक मंदी: पुनर्निर्माण की लागत, व्यापार में बाधा, और पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव से अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
भारत का आपदा प्रबंधन ढाँचा
भारत ने आपदाओं से निपटने के लिए एक मजबूत ढाँचा विकसित किया है, जो आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 द्वारा निर्देशित है:
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA): प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में शीर्ष निकाय।
- राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA): मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर।
- जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA): जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर।
- राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF): विशेष रूप से प्रशिक्षित बल जो आपदा स्थलों पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हैं।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF): राज्य स्तर पर NDRF के समान कार्य।
इसके बावजूद, चुनौतियाँ बनी हुई हैं: पूर्व-चेतावनी प्रणालियों का कमजोर होना, अनियोजित विकास, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन की धीमी गति।
आगे की राह: लचीलापन और अनुकूलन
हमें अब ‘आपदा प्रतिक्रिया’ से ‘आपदा लचीलापन’ की ओर बढ़ना होगा।
- जलवायु-लचीली अवसंरचना: ऐसी इमारतें, सड़कें और पुल बनाना जो चरम मौसमी घटनाओं का सामना कर सकें।
- बेहतर शहरी नियोजन: जल निकासी प्रणालियों में सुधार, जल निकायों का संरक्षण, और हरित स्थानों का विकास।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना: सटीक मौसम पूर्वानुमान और समय पर जानकारी का प्रसार।
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाना।
- प्राकृतिक समाधान: वनीकरण, मैंग्रोव संरक्षण, और आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन जैसे प्राकृतिक बफर को बढ़ावा देना।
3. आज UP में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका
विरोध प्रदर्शन: लोकतंत्र की आत्मा
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन भारतीय लोकतंत्र के एक मूलभूत पहलू को उजागर करता है: विरोध करने का अधिकार। यह किसी भी जीवंत लोकतंत्र की पहचान है, जहाँ नागरिक और राजनीतिक दल सरकार की नीतियों के प्रति अपनी असहमति व्यक्त कर सकते हैं।
संवैधानिक अधिकार:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) “वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” और अनुच्छेद 19(1)(b) “शांतिपूर्ण और निहत्थे सम्मेलन का अधिकार” प्रदान करता है। ये अधिकार नागरिकों को सरकार की आलोचना करने और सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज़ उठाने की शक्ति देते हैं। हालांकि, इन अधिकारों पर अनुच्छेद 19(2) और 19(3) के तहत राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और मानहानि जैसे उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
“लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यक और असहमति के अधिकारों का भी सम्मान है।”
विपक्ष की भूमिका: एक प्रहरी
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसे अक्सर ‘सरकार का प्रहरी’ कहा जाता है।
- जवाबदेही सुनिश्चित करना: विपक्ष सरकार को उसकी नीतियों और कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराता है।
- वैकल्पिक नीतियाँ प्रस्तुत करना: यह जनता के सामने वैकल्पिक दृष्टिकोण और नीतियाँ प्रस्तुत करता है।
- जनता की आवाज बनना: उन वर्गों की आवाज़ बनता है जिनकी चिंताएँ सरकार तक नहीं पहुँच पातीं।
- संवैधानिक मूल्यों की रक्षा: सरकार द्वारा संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन या अतिक्रमण की स्थिति में विपक्ष इन मूल्यों का बचाव करता है।
- समीक्षा और संतुलन: यह सरकार की शक्ति को संतुलित करने का काम करता है, जिससे सत्ता का दुरुपयोग रोका जा सके।
विरोध प्रदर्शन के कारण (सामान्य संदर्भ)
हालांकि विशिष्ट कारण नहीं दिए गए हैं, लेकिन आमतौर पर विरोध प्रदर्शन निम्नलिखित मुद्दों पर होते हैं:
- आर्थिक मुद्दे: महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट।
- शासनिक मुद्दे: भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की स्थिति, विकास कार्यों में कमी।
- सामाजिक न्याय: जातिगत उत्पीड़न, महिला सुरक्षा, हाशिए पर पड़े वर्गों के अधिकार।
- राजनीतिक मुद्दे: विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई, लोकतंत्रिक संस्थानों का कमजोर होना।
चुनौतियाँ और आगे की राह
विरोध प्रदर्शनों के साथ कुछ चुनौतियाँ भी आती हैं:
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन बनाम हिंसा: प्रदर्शनों का हिंसक होना चिंता का विषय है, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और आम जनता को असुविधा होती है।
- राज्य की प्रतिक्रिया: विरोध प्रदर्शनों के प्रति राज्य की प्रतिक्रिया अक्सर विवादों में रहती है, जिसमें बल प्रयोग या अधिकारों के उल्लंघन के आरोप शामिल होते हैं।
- राजनीतिकरण: कई बार, विरोध प्रदर्शनों का राजनीतिकरण हो जाता है, जिससे उनके मूल उद्देश्य से ध्यान भटक जाता है।
एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए, यह आवश्यक है कि:
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन को प्रोत्साहित किया जाए: नागरिक समाज और राजनीतिक दलों को अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों का पालन करना चाहिए।
- सरकार संवाद के लिए खुली रहे: सरकार को प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को सुनना चाहिए और समाधान के लिए संवाद का मार्ग अपनाना चाहिए।
- पुलिस का संयमित व्यवहार: कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भीड़ को नियंत्रित करते समय मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
- विपक्ष रचनात्मक हो: विपक्ष को केवल विरोध के लिए विरोध न करके, समस्याओं के ठोस और व्यवहार्य समाधान प्रस्तुत करने चाहिए।
निष्कर्ष: भारत का भविष्य इन तीन धरातलों पर
उपराष्ट्रपति का इस्तीफा, जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसमी घटनाएँ, और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन – ये तीनों घटनाएँ एक जटिल और गतिशील भारत की तस्वीर पेश करती हैं। एक तरफ, संवैधानिक संस्थाओं की स्थिरता और उनके सम्मान का प्रश्न है। दूसरी ओर, हमें जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से जूझना पड़ रहा है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और समाज को गहरे तक प्रभावित कर रहा है। अंत में, लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार हमें एक जीवंत और प्रगतिशील समाज के रूप में परिभाषित करता है।
UPSC के उम्मीदवारों के लिए, इन घटनाओं का अध्ययन केवल तथ्यों को रटने तक सीमित नहीं होना चाहिए। आपको इन्हें एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना होगा: संवैधानिक शासन, पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक न्याय और राजनीतिक जीवंतता के अंतर्संबंधों को समझना होगा। भारत के सामने चुनौतियाँ बड़ी हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों के विश्लेषण और समझ से हम भविष्य के समाधानों की ओर बढ़ सकते हैं।
यह आवश्यक है कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें जहाँ संवैधानिक मूल्य सर्वोच्च हों, जहाँ प्रकृति का सम्मान हो और जहाँ हर आवाज को सुना जाए। यही एक मजबूत और समावेशी राष्ट्र की नींव है।
UPSC परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions for UPSC Exam)
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – 10 MCQs
-
प्रश्न 1: भारत के उपराष्ट्रपति के पद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
2. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
3. उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए लोकसभा में एक प्रस्ताव पारित करना होता है, जिसे राज्यसभा स्वीकार करती है।उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत) से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति के चुनाव में केवल निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
कथन 2 सही है। अनुच्छेद 64 के अनुसार, उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
कथन 3 गलत है। उपराष्ट्रपति को राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, जिसे लोकसभा स्वीकार करती है। पहल राज्यसभा में होती है। -
प्रश्न 2: भारत में आपदा प्रबंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रपति करते हैं।
2. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की स्थापना का प्रावधान किया।
3. शहरी बाढ़ का एक प्रमुख कारण जल निकासी प्रणालियों पर अतिक्रमण और अनियोजित शहरीकरण है।नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है। NDMA की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते हैं।
कथन 2 सही है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के तहत NDRF की स्थापना का प्रावधान है।
कथन 3 सही है। अनियोजित शहरीकरण और जल निकासी प्रणालियों पर अतिक्रमण शहरी बाढ़ के प्रमुख कारण हैं। -
प्रश्न 3: भारत में विरोध प्रदर्शनों के अधिकार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में विरोध प्रदर्शन का अधिकार एक निरपेक्ष अधिकार है जिस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और निहत्थे सम्मेलन का अधिकार प्रदान करता है।
3. सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है। भारत में विरोध प्रदर्शन का अधिकार निरपेक्ष नहीं है और इस पर अनुच्छेद 19(2) और 19(3) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
कथन 2 सही है। अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और निहत्थे सम्मेलन का अधिकार प्रदान करता है।
कथन 3 सही है। सार्वजनिक व्यवस्था, राज्य की सुरक्षा और मानहानि जैसे आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। -
प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत के उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का पदेन सभापति होने का प्रावधान करता है?
(a) अनुच्छेद 63
(b) अनुच्छेद 64
(c) अनुच्छेद 65
(d) अनुच्छेद 66उत्तर: (b)
व्याख्या: अनुच्छेद 63 कहता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद 64 विशेष रूप से कहता है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा। -
प्रश्न 5: जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि के संभावित प्रभावों में शामिल हैं:
1. कृषि उत्पादकता में कमी
2. जलजनित बीमारियों में वृद्धि
3. आधारभूत संरचना को नुकसान
4. पर्यटन उद्योग को बढ़ावानीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4उत्तर: (a)
व्याख्या: चरम मौसमी घटनाओं से कृषि उत्पादकता में कमी, जलजनित बीमारियों में वृद्धि और आधारभूत संरचना को नुकसान होता है। पर्यटन उद्योग को बढ़ावा नहीं मिलता, बल्कि उस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। -
प्रश्न 6: भारतीय संविधान में उपराष्ट्रपति के त्यागपत्र के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रावधान सही है?
(a) वह लोकसभा अध्यक्ष को संबोधित कर अपना त्यागपत्र देता है।
(b) वह भारत के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित कर अपना त्यागपत्र देता है।
(c) वह राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है।
(d) उसे अपना त्यागपत्र राज्यसभा को सौंपना होता है।उत्तर: (c)
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अनुसार, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है। -
प्रश्न 7: भारत में विपक्ष की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विपक्ष सरकार को उसकी नीतियों और कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराता है।
2. विपक्ष केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित होता है और उसे वैकल्पिक नीतियां प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होती।
3. एक मजबूत विपक्ष लोकतंत्र में संतुलन और नियंत्रण (checks and balances) के लिए आवश्यक है।उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 सही है। जवाबदेही सुनिश्चित करना विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कथन 2 गलत है। एक प्रभावी विपक्ष न केवल आलोचना करता है बल्कि वैकल्पिक नीतियाँ और दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करता है।
कथन 3 सही है। विपक्ष सरकार की शक्ति को संतुलित करने और लोकतंत्र को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण है। -
प्रश्न 8: निम्नलिखित में से कौन-सी संस्था भारत में आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष निकाय है?
(a) राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)
(b) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
(c) केंद्रीय जल आयोग (CWC)
(d) भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)उत्तर: (b)
व्याख्या: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) भारत में आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष निकाय है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। NDRF एक प्रतिक्रिया बल है, जबकि CWC और IMD विशिष्ट क्षेत्रों में कार्य करते हैं। -
प्रश्न 9: भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव में कौन भाग लेता है?
(a) संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य।
(b) संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत)।
(c) संसद के दोनों सदनों और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य।
(d) केवल राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य।उत्तर: (b)
व्याख्या: अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जिसमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल होते हैं। -
प्रश्न 10: हाल ही में भारत में चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि के लिए निम्नलिखित में से कौन-से कारक उत्तरदायी हैं?
1. जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती समुद्र सतह का तापमान।
2. अनियोजित शहरीकरण और जल निकायों पर अतिक्रमण।
3. वनों की कटाई और मिट्टी का कटाव।
4. कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग।नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4उत्तर: (a)
व्याख्या:
कथन 1, 2 और 3 चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
कथन 4 (कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग) मिट्टी और जल प्रदूषण का कारण बन सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति या तीव्रता में वृद्धि का प्राथमिक कारक नहीं है, हालांकि यह पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
मुख्य परीक्षा (Mains)
- “भारत के उपराष्ट्रपति का पद केवल एक प्रतीकात्मक पद नहीं है, बल्कि संवैधानिक संतुलन और निरंतरता सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।” उपराष्ट्रपति के संवैधानिक प्रावधानों और उसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए। हाल के घटनाक्रम इस पद की गरिमा को कैसे प्रभावित करते हैं?
- भारत में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण चरम मौसमी घटनाओं, विशेषकर भारी वर्षा और बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति पर चर्चा कीजिए। इन आपदाओं के शमन और प्रबंधन के लिए भारत के वर्तमान ढांचे का मूल्यांकन करते हुए, एक अधिक लचीली और अनुकूलनशील रणनीति हेतु आवश्यक कदमों का सुझाव दीजिए।
- “एक जीवंत लोकतंत्र में, विपक्ष का विरोध करने का अधिकार सरकार की जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।” भारतीय संदर्भ में विरोध प्रदर्शन के अधिकार के संवैधानिक आधारों पर प्रकाश डालते हुए, लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका और रचनात्मक विरोध प्रदर्शन के महत्व का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
- वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए, भारत के लिए एक मजबूत और समावेशी राष्ट्र का निर्माण कैसे संभव है? राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में संवैधानिक नैतिकता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व पर चर्चा कीजिए।
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